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सुपरमैन का पत्रकारिता से मोहभंग!

 

सुपरमैन अब पत्रकारिता का पेशा छोड़ रहा है. सुपरमैन की भूमिका निभाने वाले क्लार्क केंट मेट्रोपोलिस अखबार डेली प्लेनेट को छोड़ रहे हैं जहां वो 1940 के दशक से तब से काम कर रहे हैं जब से सुपरमैन श्रृंखला की पहली कॉमिक्स प्रकाशित हुई थी. सुपरमैन श्रृंखला को प्रकाशित करने वाली कंपनी डीसी कॉमिक्स का कहना है कि पत्रकारिता में खबरों की बजाय मनोरंजन की कहानियों को ज्यादा जगह दिए जाने के विरोध में केंट ने ये पेशा छोड़ने का फ़ैसला किया है.

 

सुपरमैन अब पत्रकारिता का पेशा छोड़ रहा है. सुपरमैन की भूमिका निभाने वाले क्लार्क केंट मेट्रोपोलिस अखबार डेली प्लेनेट को छोड़ रहे हैं जहां वो 1940 के दशक से तब से काम कर रहे हैं जब से सुपरमैन श्रृंखला की पहली कॉमिक्स प्रकाशित हुई थी. सुपरमैन श्रृंखला को प्रकाशित करने वाली कंपनी डीसी कॉमिक्स का कहना है कि पत्रकारिता में खबरों की बजाय मनोरंजन की कहानियों को ज्यादा जगह दिए जाने के विरोध में केंट ने ये पेशा छोड़ने का फ़ैसला किया है.
 
डेली प्लेनेट को एक बड़े उद्योग समूह की ओर से खरीदने के बाद ये घटना घटी है. प्रकाशक का कहना है कि अब क्लार्क केंट रिपोर्टर की भूमिका में नजर नहीं आएंगे, हो सकता है कि वो निजी रूप से वो ब्लॉग लेखन करेंगे. कुछ लोगों का कहना है कि हो सकता है कि वो हफ़िंग्टन पोस्ट जैसी कोई वेबसाइट शुरु कर दें. इस कॉमिक्स की श्रृंखला में सबसे नया अंक बुधवार को आया है, जिसमें अपने बॉस के बुरे बर्ताव से गुस्से में आकर क्लार्क केंट ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया.
 
सुपरमैन की नाराज़गी
 
बुधवार के अंक में केंट ने अपने संपादक से कहा कि उसने बतौर पत्रकार सिर्फ पांच साल ही काम किया. हालांकि दशकों से सुपरमैन की कहानी में केंट डेली प्लेनेट में रिपोर्टर की नौकरी कर रहे हैं. नए अंक में अपने संपादक से हुई तीखी बातचीत में केंट को कहते हुए दिखाया गया है, "मुझे सिखाया गया है कि तुम अपने शब्दों से नदी की धारा बदल सकते हो और वो कितना भी गहरा राज़ हो, सूरज की तेज़ रोशनी में वह टिक नहीं सकता."
 
वो निराशा भरे शब्दों में कहता है, "लेकिन तथ्यों का स्थान विचारों ने ले लिया है, और सूचना का स्थान मनोरंजन ने ले लिया है. रिपोर्टर तो सिर्फ़ स्टेनोग्राफ़र होकर रह गए हैं. और मैं अकेला नहीं हूँ जो ख़बरों की इस स्थिति से निराश है." नए सुपरमैन के लेखक स्कॉट लॉबडेल ने यूएसए टुडे अखबार को बताया, “ऐसा ही होता है जब डेस्क के पीछे कोई 27 वर्ष का युवक बैठा हो और उसे एक बड़ा उद्योगपति ऐसी ख़बर के बारे में निर्देश दे रहा हो, जो वास्तव में उसकी चिंता है ही नहीं.” सुपरमैन की कहानी में इस अप्रत्याशित मोड़ ने मीडिया के समीक्षकों का ध्यान खींचा है और उन लोगों का भी जो अख़बार उद्योग के संघर्ष को देख रहे हैं. (बीबीसी)
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