दैनिक जागरण और इसमें कार्यरत वरिष्ठों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं. पत्रकारिता को छोड़कर कोर्ट-कचहरी और पुलिस का इस्तेमाल करने वाला जागरण प्रबंधन अब अपने बोये को काटने को मजबूर है. बिहार में अवैध संस्करणों का मामला अभी कोर्ट में चल ही रहा था कि पानीपत में भी मालिकों और निशिकांत ठाकुर के खास सीनियर न्यूज एडिटर एवं हरियाणा प्रभारी अवधेश बच्चन के खिलाफ थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा जागरण के ही एक सब एडिटर ने दर्ज करा दिया है.
जानकारी के अनुसार दैनिक जागरण में डेस्क पर कार्यरत अरुण शांडिल्य ने अवधेश बच्चन के खिलाफ चांदनी बाग थाना में आईपीसी की धारा 468 एवं 420 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. शांडिल्य ने यह मामला मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने के दौरान अपने कर्मचारियों पर दबाव बनाकर जबरिया हस्ताक्षर कराने के मामले में दर्ज कराया है. जागरण प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करने के लिए अपने सभी कर्मचारियों से हस्ताक्षर कराया था कि उन्हें ज्यादा सैलरी नहीं चाहिए वे संतुष्ट हैं. इस दौरान प्रबंधन ने तमाम लोगों की छंटनी भी की थी.
अरुण ने इसी अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ठानी और अपने संपादकीय प्रभारी अवधेश बच्चन के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया. अब बताया जा रहा है कि प्रबंधन अपनी पोल खुलने के डर से कम्प्रोमाइज करने की कोशिश में जुटा हुआ है. इस मामले में कई पत्रकारों ने पुलिस के सामने गवाही भी दी है. संभावना जताई जा रही है कि पुलिस जल्द ही इस मामले में एक्शन लेगी. इसी के चलते बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है. सूत्रों का कहना है कि अरुण किसी भी स्तर पर समझौता करने के मूड में नहीं हैं. उनके पिता खुद अधिवक्ता हैं लिहाजा वे लड़ाई को किसी भी कीमत पर कोर्ट तक ले जाना चाहते हैं ताकि जागरण प्रबंधन का झूठ तथा सुप्रीम कोर्ट को बरगलाने का पर्दाफाश हो सके.
वैसे भी आरोप लगते रहे हैं कि निशिकांत के खास अवधेश बच्चन चुन चुनकर यूपी वाले कर्मचारियों को अपना निशाना बना रहे थे. इनके इसी रैवेये के चलते आधा दर्जन से ज्यादा यूपी के रहने वाले पत्रकार हरियाणा में दैनिक जागरण से विदा हो गए. वे बिहार के और खासकर अपने लोगों को जागरण में भरना चाहते थे, इसलिए यहां स्थितियां और भी बुरी हो गईं थी. इसके बाद जबरिया हस्ताक्षर कराने के कारण उनके खिलाफ मामला थाने पहुंच गया. पुलिस इस मामले में तेजी से जांच कर रही है. कई पत्रकारों की गवाही भी पूरी हो चुकी है. अगर जांच में आरोप सही साबित हो गए तो पुलिस वारंट भी जारी कर सकती है. यानी अब जागरण और इसके लोगों के गलत कारनामों के खिलाफ चौतरफा हमला शुरू हो चुका है.