हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने गुरूवार को जमानत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। कांडा ने यह जमानत याचिका पुलिस के आरोप पत्र दाखिल करने के करीब एक महीने बाद की है। इससे पहले उनकी जमानत याचिका निचली अदालत ने खारिज कर दी थी। इस याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति पी के भसीन की अदालत में होनी थी। पर खबर है कि न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीके भसीन ने शुक्रवार को हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल काडा की जमानत याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। काडा पर पूर्व विमान परिचायिका गीतिका शर्मा को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है।
न्यायमूर्ति भसीन ने बिना कोई कारण बताए खुद को कांडा के जमानत पर सुनवाई वाले मामले से अलग कर लिया है। उन्होंने न्यायालय की एक अन्य पीठ में छह नवंबर को सुनवाई के लिए यह मामला स्थानातरित कर दिया है। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद कांडा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। निचली अदालत ने 20 सितम्बर को जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि आरोपी की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि चार-पांच अगस्त की रात कांडा की पूर्व कर्मचारी गीतिका शर्मा ने आत्महत्या कर लिया था। गीतिका ने दो सुसाइड नोट्स में कांडा व उसकी कर्मचारी अरुणा चड्ढ़ा का नाम लिखा था। अरुणा चड्ढ़ा कांडा की बंद हो चुकी एमडीएलआर एयरलाइंस की पूर्व कर्मचारी है। गीतिका भी कांडा की इसी कंपनी में काम करती थी।