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हाई कोर्ट ने कहा सुधीर हिलसायन को संपादक नियुक्‍त करे सरकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सह अध्यक्ष, डॉ0 अम्बेडकर फाउंडेशन को फाउंडेशन की मासिक पत्रिका ‘सामाजिक न्याय संदेश’ के संपादक के रिक्त पद पर सुधीर हिलसायन को नियुक्त करने का आदेश देते हुए कहा कि वर्ष 2006 से इस पद के रिक्त होने की वजह से सामाजिक न्याय संदेश व फाउंडेशन का काम प्रभावित हो रहा है, जो न तो फाउंडेशन के हित में है और न ही जन हित में। न्यायमूर्ति श्री सुरेश कैथ की एकल पीठ ने 2009 में इस पद के लिए आवेदन करने वाले सुधीर हिलसायन की याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि सरकार याचिकाकर्ता को पत्रिका का संपादक नियुक्त करे।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सह अध्यक्ष, डॉ0 अम्बेडकर फाउंडेशन को फाउंडेशन की मासिक पत्रिका ‘सामाजिक न्याय संदेश’ के संपादक के रिक्त पद पर सुधीर हिलसायन को नियुक्त करने का आदेश देते हुए कहा कि वर्ष 2006 से इस पद के रिक्त होने की वजह से सामाजिक न्याय संदेश व फाउंडेशन का काम प्रभावित हो रहा है, जो न तो फाउंडेशन के हित में है और न ही जन हित में। न्यायमूर्ति श्री सुरेश कैथ की एकल पीठ ने 2009 में इस पद के लिए आवेदन करने वाले सुधीर हिलसायन की याचिका स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि सरकार याचिकाकर्ता को पत्रिका का संपादक नियुक्त करे।

श्री हिलसायन ने अपनी याचिका में कोर्ट से अपील की थी कि डॉ0 अम्बेडकर फाउंडेशन में संपादक के पद के लिए 2009 से चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्ण करके संपादक की नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने याचिका में कहा था कि आरटीआई के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली थी कि जून 2009 में मंत्रालय द्वारा गठित चयन समिति द्वारा लिये गये साक्षात्कार के उपरांत बनाई गयी योग्यता सूची में हिलसायन शीर्ष पर थे और चयन समिति के अध्यक्ष व फाउंडेशन के सदस्य सचिव ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री सह फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री मुकुल वासनिक के समक्ष हिलसायन का नाम अनुमोदन/स्वीकृति के लिए भेजा था, परन्तु उन्होंने इस पद के लिए योग्यता सूची में शीर्ष स्थान पाने वाले हिलसायन को अनुमोदन देने के बजाय नियुक्ति प्रक्रिया को बाधित करने के प्रयास के तहत अपने चहेते अधिकारियों की एक समिति बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया को भंग करने के बहाने तलाशने में जुट गए।

जब श्री वासनिक इसमें भी सफल नहीं हुए तो उन्होंने संपादक पद के लिए कम आवेदन प्राप्त होने का बहाना बनाकर बेहतर व्यक्ति की तलाश का शिगूफा छोड़ा और वे इस पद को अपग्रेड करने के लिए भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडीचर गए, जहां उनके प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान नहीं की गयी अर्थात् डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडीचर ने पद को अपग्रेड करने से मना कर दिया। तदुपरांत मंत्रालय ने पुनः अपग्रेडेशन के लिए फाइल डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडीचर भेजने की बात कही। इस बार मंत्रालय के इंटरनल फाइनेंस डिवीजन (आईएफडी) के वित्तीय सलाहकार इसके लिए तैयार नहीं हुए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुधीर हिलसायन बनाम चेयरमैन डॉ0 अम्बेडकर फाउंडेशन एवं अन्य के मामले में याचिका का निबटारा करते हुए व्यवस्था दी है कि किसी सरकारी संस्थान या उपक्रम में रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए चयन समिति द्वारा चयनित उम्मीदवार को बिना किसी वैध कारण के संबंधित पद पर नियुक्त नहीं किया जाना गैर न्यायोचित है। कोर्ट ने कहा कि बेहतर व्यक्ति की तलाश के बहाने नियुक्ति प्रक्रिया को अवरुद्ध करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि बेहतर व्यक्ति की तलाश में वर्षों तक पद खाली रखना और चयन समिति द्वारा चयनित व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जाना न्यायोचित नहीं है। प्रतिवादी (डॉ0 अम्बेडकर फाउंडेशन) यदि खुद ही चयनियत उम्मीदवार को नियुक्त कर दिया होता तो कोर्ट को हस्तक्षेप करने का कोई मौका नहीं मिलता। कोर्ट ने आदेश प्राप्ति के चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को संबंधित पद पर नियुक्त करने को कहा है।

यहां उल्लेखनीय है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दो-दो बार योग्य पाए जाने के बावजूद याचिकाकर्ता सुधीर हिलसायन को संपादक के पद पर नियुक्त नहीं किया गया। जिसके खिलाफ वरिष्‍ठ पत्रकार सुधीर हिलसायन ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पत्रिका के लिए जनवरी 2009 में टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स व रोजगार समाचार के माध्यम से आवेदन मंगाए गए थे, जिसमें कुल 74 आवेदन प्राप्त हुए थे। 8 जून 2009 को साक्षात्कार हुआ था और चयन समिति ने 9 जून 2009 को अपनी सिफारिश तत्कालीन सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री व डॉ0 अम्बेडकर फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री मुकुल वासनिक के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था। कोर्ट ने याचिकाकर्त्ता की योग्यता व अनुभव को संपादक पद के अनुरूप माना है। नियुक्ति प्रक्रिया के पूरे हो जाने के बावजूद चयन समिति की अनुषंसा को नजर अंदाज करने के कारण संपादक का पद आज भी रिक्त है, जिसके कारण फाउंडेशन से प्रकशित होने वाली सामाजिक न्याय संदेश पत्रिका प्रकाशित नहीं हो पा रही है, जिसकी भारी संख्या में लोग पूरे देश में ग्राहक सदस्य हैं।

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