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पत्रकार को जेल भेजे जाने के विरोध में 11 दिसम्‍बर को बंद रहेगा जालौन

जालौन में सपा नेता पर हुए हमले के आरोप में एक पत्रकार को फर्जी फंसा कर जेल भेजने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिसको लेकर पत्रकार 22 नवम्बर से जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई पहल न होने और निर्दोष पत्रकार को न छोड़े जाने पर जिले के पत्रकारों के साथ साथ सभी दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभी संगठन, राजनैतिक दल और पत्रकार संगठनों के लोगों ने एक सुर में समर्थन देकर 11 दिसंबर को जिले भर का बाजार बंद कराने का आह्वान कर दिया है।

जालौन में सपा नेता पर हुए हमले के आरोप में एक पत्रकार को फर्जी फंसा कर जेल भेजने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। जिसको लेकर पत्रकार 22 नवम्बर से जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से कोई पहल न होने और निर्दोष पत्रकार को न छोड़े जाने पर जिले के पत्रकारों के साथ साथ सभी दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सभी संगठन, राजनैतिक दल और पत्रकार संगठनों के लोगों ने एक सुर में समर्थन देकर 11 दिसंबर को जिले भर का बाजार बंद कराने का आह्वान कर दिया है।

आपको बता दें कि 6 नवम्बर को देर रात जालौन के एट थाना क्षेत्र में सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष राकेश पटेल जब अपने गाँव सोमई से बाइक से एट जा रहे थे तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन पर फायरिंग कर दी, जिसमें वो घायल हो गये थे। घटना के नौ दिन बाद सपा नेता के भाई ने 16 नवम्बर 2012 को गाँव के ही दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला के पत्रकार शशिकांत तिवारी के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था, जिस पर पुलिस ने करवाई कर पत्रकार को जेल भेज दिया था। इस मामले में जनपद के पत्रकारों ने जालौन के पुलिस अधीक्षक आरपी चतुर्वेदी से निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन जांच कराने के बजाये पुलिस ने अपने ऊपर जनपद के सपा के एक जनप्रतिनिधि का दबाब होना बताया था, जिसके चलते पत्रकारों में आक्रोश भड़क गया। पत्रकारों ने 21 नवम्बर 2012 को जिलाधिकारी मनीषा त्रिघटिया से मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने की बात कही थी, लेकिन उन्होंने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया और मजिस्ट्रेट जांच कराने से मना कर दिया।

इसके बाद जनपद के पत्रकार लामबंद हो गये और 22 नवम्बर 2012 से पत्रकारों ने उरई स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना देना शुरू कर दिया, लेकिन धरने के करीब पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई होती न देख पत्रकारों के साथ साथ राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों को लोग भी शामिल हो गए। हालाँकि पत्रकारों के उत्पीड़न के साथ साथ भ्रष्टाचार में संलिप्त रहने के कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आदेश पर जालौन के पुलिस अधीक्षक निलम्बित भी हो चुके हैं, लेकिन पत्रकारों को पुलिस अधीक्षक के निलंबन से संतोष नहीं है। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा का कहना है कि जब तक निर्दोष पत्रकार शशिकांत तिवारी को जेल से रिहा नहीं किया जाता और दोषी लोगों पर करवाई नहीं की जाती तब तक आन्दोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर को होने वाले बाजार बंद में सभी संगठन के लोग शांतिपूर्वक बाजार बंद करायेंगे, जिसमें जिले भर के सभी स्कूल, कालेज, सरकारी कार्यालय सभी बंद रहेंगे।

बाजार बंद को लेकर की गई सभा में गौरीशंकर वर्मा, जगदीश तिवारी, हरेन्द्र विक्रम, कल्ला चौधरी, उरविजा दीक्षित, ब्लाक प्रमुख सुदामा दीक्षित, गिरीन्द्र सिंह, रेहान सिद्दीकी, अशोक द्विवेदी, विजय चौधरी, विनोद चतुर्वेदी (पूर्व विधायक), अभय द्विवेदी, किसान नेता राजवीर जादौन, बलराम सिंह लम्बरदार, लालू शेख सभी प्रमुख पार्टियों के लोगों एवं  मीडिया के वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह, अरविन्द द्विवेदी, ना‍थूराम निगम, दीपक अग्निहोत्री, संजय श्रीवास्तव, ब्रजेश मिश्रा, अतुल त्रिपाठी, संजीव श्रीवास्‍तव, ओमप्रकाश राठौर, अमित द्विवेदी, मनोज राजा, आबिद नकवी, सुनील शर्मा, संजय मिश्रा, रमाशंकर शर्मा, जमील टाटा, अरमान, विकास जादौन, श्रीकांत शर्मा, अलीम सिद्दीकी, संजय गुप्‍ता, अनुज कौशिक, विनय गुप्ता, अजय श्रीवास्‍तव, प्रदीप त्रिपाठी, शशिकांत शर्मा, जितेंद्र द्विवेदी, राहुल गुप्‍ता, संजय सोनी, इसरार खान, मनोज शर्मा, जीतेन्द्र विक्रम सिंह, अधिवक्ता युसूफ इश्तियाक, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल खाबरी सहित तमाम पत्रकार, नेता एवं समाजसेवी मौजूद रहे और एक स्वर में पत्रकार की रिहाई एवं दोषियों को सजा देने की मांग की।

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