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लखनऊ

जलता उत्तर प्रदेश और अफसरों की अमेरिकी मौज

लखनऊ : कभी-कभी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर सबको तरस भी आता है। जिस समय प्रदेश बारूद के ढेर पर बैठा हो उस समय प्रदेश का प्रमुख सचिव गृह अमेरिका में दीपावली मना रहा हो तो क्या संदेश लोगों को दिया जा सकता है। मुजफ्फरनगर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में जबरदस्त सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने जीवन के सबसे कठिन दौर का सामना कर रहे हैं। ऐसे में जो अफसर उनके साथ दिन रात जुटकर प्रदेश की कानून व्यवस्था के विषय में सोंचे उसकी जगह अफसर दीपावली की छुट्टियां कहां मनायें, इस पर विचार कर रहे हैं। पूरी नौकरशाही में इस बात को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है कि क्या प्रदेश का गृह विभाग पहले की तरह उसी ढर्रे पर चलेगा या फिर इसमें कोई सकारात्मक बदलाव सामने आयेगा।
लखनऊ : कभी-कभी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर सबको तरस भी आता है। जिस समय प्रदेश बारूद के ढेर पर बैठा हो उस समय प्रदेश का प्रमुख सचिव गृह अमेरिका में दीपावली मना रहा हो तो क्या संदेश लोगों को दिया जा सकता है। मुजफ्फरनगर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में जबरदस्त सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी हुई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने जीवन के सबसे कठिन दौर का सामना कर रहे हैं। ऐसे में जो अफसर उनके साथ दिन रात जुटकर प्रदेश की कानून व्यवस्था के विषय में सोंचे उसकी जगह अफसर दीपावली की छुट्टियां कहां मनायें, इस पर विचार कर रहे हैं। पूरी नौकरशाही में इस बात को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है कि क्या प्रदेश का गृह विभाग पहले की तरह उसी ढर्रे पर चलेगा या फिर इसमें कोई सकारात्मक बदलाव सामने आयेगा।
मुजफ्फरनगर एक बार फिर सुलग उठा है। दीपावली से ठीक पहले चार लोगों की हत्या ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बारूद के ढेर पर बैठा दिया है। अभी भी इलाके में भारी तनाव बना हुआ है। जिस इलाके में दंगा हुआ और उसमें मारे गये दर्जनों लोगों के परिवार अभी भी आतंक के साये में जी रहे हैं। सरकार ने नब्बे करोड़ रुपया इनके लिए आवंटित किया और सरकार कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह शरणार्थी कैंपों में रह रहे लोग वापस अपने घर चले जायें।
 
मगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन कोशिशों के बाद भी शांति नहीं हो रही। इन डेढ़ सालों में प्रदेश में हुए सौ से अधिक दंगों ने पहले भी मुख्यमंत्री की छवि को खासा नुकसान पहुंचाया है। तब के तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह आरएम श्रीवास्तव प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधारने से ज्यादा अपने राजनैतिक संबंधों को सुधारने में लगे रहते थे। भारी फजीहत के बाद अंततः उन्हें हटाया गया और काफी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. अनिल गुप्ता को प्रमुख सचिव गृह बनाया गया। उनकी इस तैनाती को लेकर ही चर्चा शुरू हो गयी क्योंकि औद्योगिक विकास आयुक्त के पद पर रहकर वह प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी बनने के लिए जबरदस्त लॉबिंग करने के लिए मशहूर रहे हैं। ऐसे में उनकी इस पद पर तैनाती को लेकर जबरदस्त चर्चाएं भी आम हो गयीं।
 
मुख्यमंत्री का अमेरिका प्रेम किसी से छिपा नहीं है। तरक्की पसंद मुख्यमंत्री अमेरिका का दौरा भी कर आये हैं। अफसर भी अमेरिका के इस महत्व को समझते हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव जावेद उस्मानी तो डेढ़ साल में कई महीने की छुट्टी अमेरिका में बिता भी आये हैं। उनकी छुट्टियां भी नौकरशाही की खबरों में रहती हैं।
 
नये प्रमुख सचिव गृह डॉ अनिल गुप्ता भी जानते हैं कि मुख्यमंत्री के करीब आने के लिए शायद अमेरिका के संपर्क ज्यादा काम आते हैं। लिहाजा दीपावली से ठीक पहले वह कई दिनों की छुट्टियों पर अमेरिका चले गये। उनके इस तरह से अमेरिका चले जाने पर नौकरशाही में जबरदस्त चर्चाएं शुरू हो गयी हैं।
 
नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा कि प्रदेश के इस समय जो हालात चल रहे हैं उस समय किसी भी परिस्थिति में प्रमुख सचिव गृह को इस तरह अवकाश पर जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि डॉ अनिल गुप्ता सिर्फ वैश्य जाति का होने का फायदा उठा रहे हैं। क्योंकि भाजपा सरकार में भी कभी भी वैश्य जाति के इतने अफसरों को इतनी महत्वपूर्ण जगहों पर तैनात नहीं किया गया।
 
कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य नसीब पठान का कहना है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गयी है और अफसर विदेशों में मौज मना रहे हैं। भाजपा के प्रवक्ता डॉ चंद्र मोहन का कहना है कि नौकरशाही सरकार पर पूरी तरह से हावी हो गयी है। वरना यह संभव नहीं है कि इस तनाव के बीच में प्रदेश का प्रमुख सचिव गृह अमेरिका में दीपावली मनायें। उनका कहना है कि जिस तरह नरेन्द्र मोदी पर हमला करने की साजिशें की जा रहीं हैं। मुंबई से फरार आतंकवादी प्रदेश में पकड़े जा रहे हैं उस दौर में कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने वाले अफसर अगर अमेरिका में मौज मना रहे हों तो हालातों का अंदाजा खुद लगाया जा सकता है।
 
दरअसल डॉ. अनिल गुप्ता राजस्व परिषद से वापस मेन स्ट्रीम में आने से खुश तो हैं लेकिन उन्हें प्रमुख सचिव गृह जैसे उनके स्तर से छोटे पद पर तैनाती नहीं भा रही है। किसी समय में वह प्रदेश के औद्योगिक विकास आयुक्त के साथ सभी मलाईदार पदों की कमान संभाल रहे थे। अब वापस उन्हें ऐसे विभाग में रख दिया गया जहां सिर्फ अंगारे बिछे हैं। उनकी सारी कोशिशें प्रदेश का अगला मुख्य सचिव बनने की है। मगर वह इसके लिए सही मोहरे नहीं तलाश कर पा रहे हैं जो उन्हें वहां तक पहुंचा दें।
 
पिछली बार मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक ने दौरा कर लिया था मगर प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह वहां गये तक नहीं और प्रदेश के डीजीपी प्रधानमंत्री के जाने के बाद वहां गये। इस बार चार लोगों की हत्या ने सरकार में खलबली मचा दी और प्रमुख सचिव गृह की विदाई ने डीजीपी को भी मैसेज दे दिया कि अगर इस बार मामला तूल पकड़ा तो उनकी भी विदाई तय है। इसलिए कम से कम इन हत्याओं की होते ही इस बार डीजीपी खुद मुजफ्फर नगर पहुंच गये।
 
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश में हर हालत में कानून व्यवस्था बेहतर करना चाहते हैं। मगर इस तरह के नौकरशाह उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रहे हैं। प्रदेश में यह बताने वाला कोई नहीं है कि आखिर ऐसे समय में जब प्रदेश के कई हिस्सों में भयंकर सांप्रदायिक तनाव की खबर आईबी समेत तमाम खुफिया तंत्र के लोग दे चुके हैं। तब ऐसी क्या परिस्थिति थी कि प्रमुख सचिव गृह अमेरिका चले गये। उनके दफ्तर में इस विषय में पूछने पर बताया गया कि वह इस विषय में कोई जानकारी नहीं दे सकते हैं।
लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार और वीकएंड टाइम्स हिंदी वीकली के संपादक हैं. संजय से संपर्क 09452095094 के जरिए किया जा सकता है.

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