इलाहाबाद। विश्व का सबसे बड़ा मेला प्रयाग का महाकुंभ। तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं वाले इस धार्मिक मेले पर आखिरकार देवराज इंद्र भारी पड़ गए। पैंतीस किमी परिक्षेत्र में फैले इस धार्मिक मेला की अच्छी खासी रौनक बिगड़ गई। दो दिन की मूसलाधार बारिश ने गृहस्थ कल्पवासियों को छोड़िए, संत-महात्मा, मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर, दंडी स्वामियों को मेला से वापसी को मजबूर कर दिया है। तीर्थराज प्रयाग के संगम तट पर कई मील दूर तक बसा धर्म का महानगर उजड़ने की ओर है। दो दिन पहले तक लाखों लोगों की भीड़ से गुलजार रहने वाली कुंभ नगरी में राहत कार्य जरूर चल रहे हैं पर वे नाकाफी हैं।
बसंत पंचमी के ही दिन 15 फरवरी को दोपहर बाद से लगातार दो दिन चलने वाली बारिश और हवा के थपेड़ों ने रेत पर खड़े सौ-दो सौ नहीं बल्कि हजारों की तादाद में तंबू के आशियानों को तहस-नहस कर डाला। लाखों-करोड़ रुपए की लागत से बने धर्माचार्यों के सैकड़ों महलनुमा पंडाल धराशायी हो गए हैं। हजारों होर्डिंग्स, कटआउट हवा में लटके अपनी दुर्दशा बयां कर रहे हैं। कीचड़ पानी से सने हजारों टेंट शिविरों में अभी भी पानी जमा है, वहां राहत नहीं पहुंच सकी है। लाखों कल्पवासी जो सैकड़ों किमी दूर से यहां एक महीने रहकर कल्पवास करने आए उन्हें वापस लौटने को मजबूर होना पड़ रहा है, वजह उनके लिए यहां बुनियादी सुविधा तक नहीं बची है। बारिश ने जगह-जगह जलजमाव किया। रही सही कसर तेज हवाओं के थपेड़ों ने पूरी कर दी। तेज हवा ने ज्यादातर शिविर, पंडालों को धराशायी कर दिया। गलन भी बढ़ गई। लाखों कल्पवासी खुले आकाश में दिन रात ठिठुरने को विवश हो गए। उनका सामान असुरक्षित हो गया है। जगह-जगह बिजली के तार टूटे पड़े हैं इसके अलावा बिजली के पोल भी उखड़ गए हैं। डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रमुख मार्गों पर चेकर्ड प्लेट अव्यवस्थित हालत में आ गए हैं।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट।





