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बजट से मारा, अब पेट्रोल से जलाया, और डीजल अभी बाकी है मेरे दोस्त

महंगाई पता नहीं हमें कहां ले जाएगी। आमदनी घट रही है। महंगी बढ़ रही है। सरकार कह रही है कि हर एक को आधार कार्ड जरूरी है। लेकिन हालात देखकर अपना मानना है कि आधार नहीं उधार कार्ड जरूरी है। आप जब तक यह पढ़ रहे होंगे, महंगाई और बढ़ चुकी होगी। सरकार ने अपने लुभावने लगनेवाले बजट के घाटे को कम करने का इंतजाम कर दिया है। पहले बजट से तेल निकाला। अब वह तेल से कमाई निकालेगी। दो दिन पहले बजट में जो महंगाई बढ़ाई गई थी, उससे भी ज्यादा महंगाई पेट्रोल के भाव बढ़ाकर बढ़ाई है। 

महंगाई पता नहीं हमें कहां ले जाएगी। आमदनी घट रही है। महंगी बढ़ रही है। सरकार कह रही है कि हर एक को आधार कार्ड जरूरी है। लेकिन हालात देखकर अपना मानना है कि आधार नहीं उधार कार्ड जरूरी है। आप जब तक यह पढ़ रहे होंगे, महंगाई और बढ़ चुकी होगी। सरकार ने अपने लुभावने लगनेवाले बजट के घाटे को कम करने का इंतजाम कर दिया है। पहले बजट से तेल निकाला। अब वह तेल से कमाई निकालेगी। दो दिन पहले बजट में जो महंगाई बढ़ाई गई थी, उससे भी ज्यादा महंगाई पेट्रोल के भाव बढ़ाकर बढ़ाई है। 

गुरुवार को बजट पेश हुआ। तब सरकार कुछ नहीं बोली। अब शुक्रवार की आधी रात से पेट्रोल के दामों में फिर से इजाफा कर दिया गया है। सीधे एक रुपए 40 पैसे प्रति लीटर बढ़ाने का ऐलान किया गया है। आप रात को सोए थे। और आपके सोते सोते ही पेट्रोल और महंगा हो गया। पेट्रोल के महंगा होने का मतलब बाकी बहुत सारी चीजों का भी महंगा होना है। इससे पहले 16 फरवरी को ही पेट्रोल के दाम में डेढ़ रुपया बढ़ाया था। पंद्रह दिन के भीतर और बढ़ाकर कुल मिलाकर तीन रुपए की बढ़ोतरी हो गई। सरकारी भाषा में कहें तो तेल कंपनियों के लिए कीमत बढ़ानी पड़ रही है। क्योंकि रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमत बढ़ने बढ़ी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का हवाला दिया गया है।

गुरुवार को संसद में पेश बजट से आप और हम पहले से ही परेशान थे। महंगाई का रो रहे थे। सरकार को कोस रहे थे। अब इस पेट्रोल के भावों में बढ़ातरी ने महंगाई का डबल झटका दिया है। चिदंबरम ने बजट में टैक्स स्लैब में भी कोई बदलाव नहीं किया गया। हर हाथ में रहने वाले मोबाइल जैसी छोटी सी चीज पर भी टैक्स लगा दिया। सरकार बहुत खतरनाक तरीके से काम कर रही है। पहले तो टीवी के लिए हर घर में सेट टॉप बॉक्स जरूरी किया। फिर उस पर टैक्स लगा दिया। आम आदमी तो पहले ही महंगाई से परेशान है, उस पर आए दिन पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि करके जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। कम से कम राज्य सरकारों को चाहिए कि वे पेट्रोल से वैट हटा दे तो लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकती है। केंद्र के बाद राज्य सरकारों के बजट आनेवाले हैं। उनको तो कम से कम लोगों को हितों का खयाल करना चाहिए। जिस तरह से बजट के ठीक बाद पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए, उससे डीजल के दाम बढ़ने की आशंका और बढ़ गई है।

हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी कल वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पीठ थपथपा रहे थे। कह रहे थे कि बढ़िया बजट पेश किया है। लेकिन आज पूरे देश के लोग उनकी और सरदारजी की पीठ पर लाठी मारने की सोच रहे हैं। हमारा इतिहास गवाह है कि निर्मम से निर्मम राजाओं ने भी अपने देश की प्रजा को इस तरह परेशान नहीं किया। जितना वर्तमान सरकार कर रही है। पता नहीं अपने सरदारजी क्या खाकर जन्मे थे कि इस आदमी को रहम ही नहीं आता। हर साल महंगाई और मुंह फाड़ती ही जा रही है। पेट्रोल के झटके के बाद डीजल का झटका भी लगने ही वाला है। तैयार रहिए। लोकतंत्र के डाकू लोग इसी तरह लूटा करते हैं। अपन ने तो पहले ही कहा था कि बजट आनेवाला है। जेब संभालो। और अब भी कह रहे हैं कि जेब संभालिए, क्योंकि डीजल तो अभी बाकी है मेरे दोस्त।

लेखक निरंजन परिहार राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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