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इलाहाबाद

अगवा बेटी के लिए किसान अब कहां करे फरियाद?

इलाहाबाद। सत्तासीन होने के बाद अखिलेश सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती पटरी से उतरी कानून व्यवस्था को दुरूस्त करना, पुलिस की मनमानी को रोकना था। पर, पुलिस है कि हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर कार्य करने पर आमादा है। भले ही इसके चलते सरकार को विधानसभा से लेकर सड़क तक बार-बार शर्मिंदगी क्यों न उठानी पड़ रही हो। समाजवादियों को जनता के सामने निरूत्तर होना पड़ रहा हो। कुंडा से देवरिया तक सरकार के मुखिया और पुलिस के मुखिया को तगड़े जनाक्रोश का सामना क्यों न करना पड़ रहा हो। पता नहीं इन घटनाओं से ‘सरकार-बहादुर’ सबक ले भी रही है या नहीं।

इलाहाबाद। सत्तासीन होने के बाद अखिलेश सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती पटरी से उतरी कानून व्यवस्था को दुरूस्त करना, पुलिस की मनमानी को रोकना था। पर, पुलिस है कि हम नहीं सुधरेंगे की तर्ज पर कार्य करने पर आमादा है। भले ही इसके चलते सरकार को विधानसभा से लेकर सड़क तक बार-बार शर्मिंदगी क्यों न उठानी पड़ रही हो। समाजवादियों को जनता के सामने निरूत्तर होना पड़ रहा हो। कुंडा से देवरिया तक सरकार के मुखिया और पुलिस के मुखिया को तगड़े जनाक्रोश का सामना क्यों न करना पड़ रहा हो। पता नहीं इन घटनाओं से ‘सरकार-बहादुर’ सबक ले भी रही है या नहीं।

सूबे के थानों में आम जनता का रिपोर्ट लिखाना कितना कठिन है, इसे जानना हो तो अखिलेश जी या बड़े अफसर पहचान छिपाकर किसी भी थाने में रिपोर्ट लिखाने की टेस्टिंग कर सकते हैं। अगर किसी तरह रिपोर्ट दर्ज भी हो जाए तो आगे की कार्रवाई टेढ़ी खीर साबित होती है। ताजा मामला इलाहाबाद के गंगापार इलाके के नवाबगंज थाने का है। अर्जुनपुर गांव निवासी एक किसान अपनी अगवा बिटिया की तलाश में महीने भर से भटकने को मजबूर हो रहा है। स्थानीय थाने से लेकर एसएसपी और डीआईजी दफ्तर तक पहुंचकर गुहार लगाई पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

नवाबगंज थाने के अर्जुनपुर गांव का निवासी छेदीलाल लोहार 31 जनवरी को अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने नवाबगंज गया था। साथ में उसकी पत्नी भी थी। चार युवक मार्शल लेकर उसके घर पहुंचे और बेटी को उसके माता-पिता का एक्सीडेंट बताकर मार्शल में बैठा लिया और रफूचक्कर हो गए। शाम को घर पहुंचने के बाद छेदीलाल लोहार को घटना की जानकारी हुई। काफी खोजबीन के बाद भी उसकी नाबालिग बेटी का पता नहीं चला। छेदीलाल की थाने में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की गई। निराश होकर उसने दो मार्च को एसएसपी मोहित अग्रवाल को दरख्वास्त दी लेकिन फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। पांच मार्च को डीआईजी ऑफिस पहुंचकर छेदीलाल ने मामले की शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई पर दरख्वास्त लेकर उसे रूखसत कर दिया गया।

सवाल है कि सूबे में पुलिस समाजवाद का कौन सा नया नारा गढ़ रही है। गुंडे-माफियाओं के सामने भीगी बिल्ली बनने और आम नागरिकों के सामने गुर्राने से किसका नुकसान होगा, हे समाजवादियों! अब यह बताने की तो जरूरत नहीं ही है। आखिर यूपी के तमाम ‘छेदीलालों’ को कैसे अहसास होगा कि प्रदेश में सरकार नाम की कोई चीज भी है।

इलाहाबाद से वरिष्‍ठ पत्रकार शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

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