‘चांपना न्यूज’ में बिना सेलरी के कार्यरत रहे थे ‘महीन कुमार’!

वो कलाकार है. कमाई करने और कराने का. मैनेज करने और कराने का. कभी 'चांपना न्यूज' में रहा तो कभी 'खैनन डन' में गया. ऐसे चिरकुट चैनलों में जाने के पीछे वजह यह रही कि वो मालिकों को लंबा चौड़ा झाम देकर पहुंचा था. उसे एक अदद नौकरी चाहिए थी, अपनी मार्केट इमेज बचाए रखने के लिए, और इन चिरकुट चैनलों के मालिकों को ऐसे फेंकू लोग, जो चांद तारे तोड़ लाने के दावे करें. खैर, 'चांपना न्यूज' में दलाल शिरोमणि इस शर्त पर पहुंचे थे कि वे इंटरव्यू का एक प्रोग्राम करेंगे और इस प्रोग्राम के जरिए चैनल को लाखों रुपये देंगे.

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट पांच)

बदतर प्रदेश के सेक्रेटरी मित्तल साहब ने ऐसी मेहरबानी दिखाई कि कुम्भ मीडिया सेंटर में तमाम हेर-फेर और घपलों घोटालों के बावजूद परमातमम ग्रुप को पेमेंट का चेक मिल चुका था। श्रेय किसे मिलना चाहिए, इस बात को लेकर होड़ लगी हुई थी। गजगोबर सिंह घूम-घूम कर चारों तरफ गाता घूम रहा था, घूमते-घूमते वो टेक्निकल हेड पीदक सेन जी के क्यूबिकल में पहुंचा और बोला- ‘टच वुड भगवान जी कृपा है… हनुमान की कृपा है चेक मिल गया… अब कोई साला रिट लगाए या आरटीआई डाले, हमें जो काम करना था वो पूरा हो गया… आज की डेट में तो हम गारनटी के साथ कह सकते हैं … अभी दो चार महीने अपनी नौकरी पक्की…. बाकी बाद में देखा जाएगा…''

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट चार)

भांड सीईओ का चांपना न्यूज के उत्तराखण्ड चैनल में कुछ ज्यादा ही इंट्रेस्ट रहता है। उत्तराखण्ड के एक नेता सशंकितजी से भांड का अच्छा-खासा रिश्ता है। कहा तो यह भी जाता है कि सशंकितजी ने अपने काले हाथों की गाढी़ कमाई का एक बड़ा हिस्सा चांपना न्यूज में इनवेस्ट कर रखा है। चांपना न्यूज में सशंकितजी की हर खबर चलती है। सशंकितजी को सिर दर्द हुआ तो चांपना में ब्रेकिंग, सशंकितजी को लघुशंका बार-बार आ रही है तो चांपना न्यूज में ब्रेकिंग, सशंकितजी खुश दिख रहे हैं तो ब्रेकिंग और अगर सशंकितजी को खुलकर दस्त आ गए तो सशंकितजी का टिक-टैक तो चलेगा ही है। सशंकितजी की ऐसी-वैसी खबरों से देहरादून के ब्यूरो और उत्तराखण्ड डेस्क की ऐसी-तैसी लगी रहती है।

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट तीन)

चांपना न्यूज का भाँड सीईओ, अब लौंडा मालिक मयंक को सर्वे-सर्वा घोषित कराने की युक्तियां शुरू कर चुका था। हर शनिवार की शाम होने वाली टेलीकॉनफ्रेसिंग भी मयंक की मौजूदगी में होने लगी। टेलीकॉनफ्रेंसिंग में भी वही सब कुछ। सुबह जैसा चैनल के सीनियर्स के साथ होता, लगभग वैसा ही ब्यूरो के न्यूज और मार्केटिंग प्रभारियों को भी झेलना होता। लेकिन, सबके सब लॉनचूस।

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट दो)

तीसरी मीटिंग : न्यूज की सारी बातें हो चुकी थीं मध्यप्रदेश के एक साथी ने बताया कि कैलाश विजयवर्गीज के खिलाफ…. तभी भांड़ बोल पड़ा- किसने रोका उनके खिलाफ खबर चलाने से- मामला जादा बडा हो तो स्टिंग भी करवालो…

विजय सिंह बोले- लोग क्या कहेगा, अपने ही पार्टनर के खिलाफ स्टिंग करवा रहे हैं चांपना न्यूज वाले, और फिर कैलाश जी को पता चलेगा तो छोड़ देंगे आपको…

एक न्यूज चैनल में भड़ैती के कुछ सीन (पार्ट एक)

'चांपना न्यूज' में यूं तो न्यूज के नाम पर भड़ैती का नंगा नाच संपादक के रूप में कार्यरत सिंह साहब की विदाई और सीईओ शर्मा जी (आदमी कम भांड़ जादा) की एंट्री के साथ शुरू हो गया था। लोग जानने और समझने भी लगे थे। लेकिन आपसी गुटबाजी, टॉप मैनेजमेंट के तलवे चाट कर अपने समकक्ष की छीलने का अधिकार हासिल करने का लालच ने उन सबकी समझ पर पर्दा डाल दिया। नए संपादक के आने के बाद लगा था कि ब्लैकमेलिंग की डगर पर बढ़ रहे चैनल को अब नई राह मिलेगी, लेकिन ऐसा क्यों नहीं हुआ। यह समझ से परे की बात है क्योंकि नए संपादक, जो वरिष्ठ पत्रकार के रूप में विख्यात हैं, ब्लैकमेलिंग के धंधे में तो शामिल नहीं हो सकते। चलिए, नए संपादक की ज्वाइनिंग से पहले और बाद की कुछ बैठकों और 'चांपना न्यूज' चैनल के भीतरी दृश्यों का कोलाज यहां दिखाते हैं….