केजरीवाल की ‘हिटलिस्ट’ के जवाब में कई ‘बड़ों’ ने की हल्ला बोलने की तैयारी

आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक एवं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीतिक निशानेबाजी से भाजपा और कांग्रेस दोनों के भीतर हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने इन दलों के कई दिग्गज नेताओं को खुलेआम भ्रष्ट करार किया है। इनकी बाकायदा सूची जारी करके इन्हें लोकसभा चुनाव में हराने की ‘सुपारी’ ले ली है। केजरीवाल के इन आक्रामक तेवरों से दोनों दलों में काफी नाराजगी बढ़ी है। इन दलों के कई बड़े नेताओं ने मानहानि के नोटिस भिजवाने शुरू कर दिए हैं। चुनौती दे दी है कि केजरीवाल या तो उन्हें भ्रष्ट साबित करें, या खुद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। भाजपा-कांग्रेस के साथ ही सपा जैसे दलों ने भी टीम केजरीवाल की खबर ली है। सपा सरकार के एक कैबिनेट मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि केजरीवाल उनके सुप्रीमो मुलायम सिंह के ‘चरणों’ से भी अपनी तुलना नहीं कर सकते। यदि उन्होंने ‘नेता जी’ के बारे में इस तरह की बातें फिर से कीं, तो सपा के कार्यकर्ता उन्हें सबक सिखा देंगे।

उल्लेखनीय है कि केजरीवाल ने शुक्रवार को कई दलों के दिग्गज नेताओं की सूची जारी करके भ्रष्ट करार किया था। इस सूची को ‘आप’ की ‘हिटलिस्ट’ मानी गई। उन्होंने संकल्प जताया था कि ये नेता लोकसभा का चुनाव लड़ते हैं, तो ‘आप’ के उम्मीदवार उन्हें चुनावी चुनौती देंगे। पूरी कोशिश रहेगी कि ये लोग संसद में न पहुंच पाएं। इस सूची में यूपीए सरकार के 15 मंत्रियों के नाम भी हैं। इन मंत्रियों में पी. चिदंबरम, कपिल सिब्बल व श्रीप्रकाश जायसवाल आदि के नाम हैं। इसमें कांग्रेस के 14, भाजपा के 4, एनसीपी और डीएमके के 2-2, सपा, बसपा व नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं के भी नाम हैं। यहां तक कि वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी को भी इस सूची में जगह दी गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती का भी नाम है।

शुक्रवार को जारी की गई इस ‘हिटलिस्ट’ में कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नाम तो था, लेकिन इसमें कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी और भाजपा के ‘पीएम इन वेटिंग’ नरेंद्र मोदी का नाम नहीं रखा गया था। खास तौर पर मोदी का नाम इसमें न होने से ‘आप’ की चुनावी रणनीति को लेकर पार्टी के अंदर भी बहस तेज हुई थी। इसी के चलते शनिवार को पार्टी प्रवक्ता गोपाल राय ने अपनी ‘हिटलिस्ट’ में सोनिया गांधी और नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ लिया है। लेकिन, इन दोनों को नई किस्म की श्रेणी में रखा गया है। सोनिया का नाम वंशवाद की राजनीति को बढ़ावा देने के कारण रखा गया है। जबकि, मोदी का नाम सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा देने के लिए रखा गया। ‘आप’ के ‘थिंक टैंक’ योगेंद्र यादव ने मीडिया से कहा है कि सोनिया गांधी और नरेंद्र मोदी, महाभ्रष्ट नेताओं की सूची में भले नहीं रखे गए, लेकिन इन दोनों नेताओं ने राजनीतिक शुचिता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इनके कृत्य तो भ्रष्टाचार से भी ज्यादा खतरनाक हैं। ऐसे में, पार्टी ने संकल्प किया है कि इन दोनों को भी चुनौती देकर चुनाव न जीतने दिया जाए।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ टीम केजरीवाल पहले भी घोटाले के आरोप लगा चुकी है। इन्हीं आरोपों के चलते गडकरी पार्टी के दोबारा अध्यक्ष नहीं बन पाए थे। जबकि, इस पद पर लाने की उनकी तैयारियां पूरी हो गई थीं। एक बार फिर टीम केजरीवाल के निशाने पर गडकरी आ गए हैं। उन्होंने चुनौती दी है कि या तो केजरीवाल उन्हें भ्रष्ट साबित करें, वरना सार्वजनिक रूप से माफी मांग लें। गडकरी ने मानहानि का नोटिस भिजवा दिया है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा है कि यदि दो दिन के भीतर दिल्ली के मुख्यमंत्री ने माफी नहीं मांगी, तो वे अदालत में घसीटेंगे। गडकरी के अलावा पार्टी के महासचिव अनंत कुमार और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को भी भ्रष्टों की सूची में रखा गया है।

केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने ‘डीएलए’ से कहा कि केजरीवाल अपनी गैर-जिम्मेदाराना राजनीति का परचम लहराने लगे हैं। वे दिल्ली सरकार की अपनी जिम्मेदारियों से बचने के लिए इस तरह के राजनीतिक स्टंट कर रहे हैं। शायद, वे इस कोशिश में हैं कि राहुल गांधी और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं को ‘भ्रष्ट’ करार करें, तो गुस्से में कांग्रेस इनकी सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। लेकिन, कांग्रेस ऐसा करने नहीं जा रही है। हमारी कोशिश रहेगी कि दिल्ली की जनता इनका असली चेहरा अच्छी तरह समझ ले। केजरीवाल की दिक्कत यह है कि उन्होंने जनता को तमाम सब्जबाग दिखा दिए हैं, लेकिन वे जानते हैं कि ये वायदे कभी पूरे नहीं किए जा सकते। शायद, इसी के चलते वे अनर्गल आरोप लगाकर लोगों का ध्यान अपनी सरकार के कामकाज से हटाना चाहते हैं।

सिब्बल ने भी केजरीवाल को अल्टीमेटम दिया है कि या तो वे तीन दिन के अंदर माफी मांग लें, वरना मानहानि के मुकदमे के लिए तैयार रहें। राहुल गांधी के कार्यालय ने ‘आप’ की ‘हिटलिस्ट’ पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन, पार्टी के कई नेताओं ने ‘आप’ नेतृत्व को जमकर कोसा है। केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली का भी नाम इस सूची में है। उन्होंने कहा है कि पता नहीं, केजरीवाल इतनी अराजक राजनीति कैसे कर रहे हैं? वे इस इंतजार में हैं कि पार्टी स्तर पर इस बारे में किस तरह की कार्रवाई की रणनीति बनाई जाती है? केंद्रीय गृह मंत्री सुशील शिंदे भी इस ‘हिटलिस्ट’ में हैं। वे तो पहले ही बहुचर्चित धरने के प्रकरण में केजरीवाल को ‘एड़ा’ (पागल) करार कर चुके हैं। उनकी इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हल्कों में काफी हो-हल्ला भी हुआ था। जब शिंदे से ताजा प्रकरण में सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कराते हुए यही कहा कि इनके नेता (केजरीवाल) के बारे में तो मैंने पहले ही बता दिया था कि वे किस किस्म (एड़ा) के नेता हैं? ऐसा लगता है कि वे पार्टी को चर्चा में रखने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं।

अखिलेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन केजरीवाल की ‘हिटलिस्ट’ में अपने नेता मुलायम सिंह का नाम आने से खासे नाराज हैं। उन्होंने कह दिया है कि मुलायम सिंह ने अपनी राजनीति में वंचितों और पिछड़े वर्गों के हितों के लिए बड़े संघर्ष किए हैं। ऐसे में, ये कल का नेता (केजरीवाल) ‘हिटलिस्ट’ जारी कर रहा है। जबकि, इस शख्स की तुलना नेताजी के चरणों से भी नहीं की जा सकती। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता एवं केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला का नाम भी ‘आप’ की सूची में है। बुजुर्ग नेता फारुख इस प्रकरण से काफी नाराज हैं। उन्होंने कहा है कि वे इस मामले में केजरीवाल को बख्शने नहीं जा रहे। फारुख के बेटे एवं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘आप’ के नेताओं को कश्मीर में चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी है। उन्होंने मीडिया से कहा कि केजरीवाल के उम्मीदवार यहां चुनाव मैदान में आएं। वे इन सब की जमानत जब्त करवा कर दिल्ली भेज देंगे। तब पता चल जाएगा कि शिगूफा राजनीति करने का हश्र क्या होता है?

‘आप’ के प्रवक्ता गोपाल राय का मानना है कि उनकी पार्टी ने जिस निडरता से ‘भ्रष्ट’ दिग्गजों की सूची जारी की है, उसको लेकर तमाम बड़े नेताओं की उन्हें नाराजगी तो झेलनी ही पड़ेगी। इसका अंदाजा उनको पहले ही था। जिनके नाम इस सूची में आए हैं, उनका बौखलाना स्वभाविक है। लेकिन, उनकी पार्टी ऐसे नेताओं की धमकियों से डरने वाली नहीं है। क्योंकि, पूरे देश की जनता जानती है कि पिछले 65 सालों में इन तमाम नेताओं ने लोकतंत्र के नाम पर देश को ‘लूटतंत्र’ में बदल दिया है। हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि इस लोकसभा चुनाव से ऐसे लोगों के खिलाफ तेज जनमुहिम शुरू की जाए। उल्लेखनीय है कि ‘आप’ ने दावा किया है कि उसके उम्मीदवार 350 सीटों पर मुकाबला करेंगे। खासतौर पर विभिन्न दलों के दागी किस्म के नेताओं को हराने की मजबूत रणनीति रहेगी। उनकी प्राथमिकता अपनी जीत की बजाए भ्रष्ट किस्म के नेताओं को हराने की ज्यादा रहेगी।

राजनीतिक हल्कों में ‘आप’ की इस आक्रामक रणनीति को लेकर कई तरह के कयास शुरू हुए हैं। यह माना जा रहा है कि केजरीवाल सरकार को इस दौर में दिल्ली में कई तरह की किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है। इसकी एक खास वजह यह भी है कि राष्ट्रीय राजधानी को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है। ऐसे में, तमाम छोटे-मोटे मुद्दों पर भी स्थानीय सरकार स्वतंत्र रूप से फैसला नहीं ले पाती। उसके पास पुलिस का नियंत्रण तक नहीं है। जबकि, यहां कानून व्यवस्था की स्थिति लगातार खराब हो रही है। बिजली वितरण कंपनियां भी सरकार के साथ सहयोग नहीं कर रहीं। सरकार ने उनके खातों की आॅडिट का फरमान किया, तो ये कंपनियां कई तरह की दिक्कतें खड़ी कर रही हैं। अल्टीमेटम यहां तक दिया गया कि दिल्ली में 8 से 10 घंटे की बिजली कटौती हो सकती है। फंडिंग प्रकरण पर बिजली कंपनियों और सरकार के बीच ठन गई है। किसी तरह से इस मामले में 10 दिन की मोहलत मिली है। लेकिन, यह संकट इसके बाद और ज्यादा गहरा सकता है।

केजरीवाल बार-बार कह रहे हैं कि उनकी सरकार के खिलाफ भाजपा और कांग्रेस में अंदर ही अंदर सांठगांठ हो रही है। उनकी सरकार पर खतरा है। इसके बावजूद उनकी पार्टी इनके दिग्गजों के खिलाफ मुहिम चला रही है। परिणाम की उन्हें परवाह नहीं है। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी संसदीय क्षेत्र से ‘आप’ ने अपने चर्चित नेता कुमार विश्वास को मैदान में उतार दिया है। वे क्षेत्र में   घूमकर राहुल की चुनौतियां बढ़ा रहे हैं। मंथन इस बात पर हो रहा है कि मोदी के मुकाबले किसको उतारा जाए? क्योंकि, अभी तय नहीं है कि मोदी एक सीट से लड़ेंगे या दो सीटों से? इसका खुलासा होने के बाद ही रणनीति तय होगी। ‘आप’ के ‘थिंक टैंक’ प्रो. आनंद कुमार का मानना है कि कम से कम अब जनता तो समझ जाएगी कि उनकी पार्टी न कांग्रेस की ‘बी’ टीम हैं और न ही भाजपा की। पार्टी का एक ही लक्ष्य है कि सभी भ्रष्ट नेताओं की विदाई राजनीति से करा दी जाए। इसी संकल्प पर उनकी पार्टी डटी है। भले, इसके लिए कितनी ही ‘कुर्बानी’ देनी पड़े और लांछन सहने पड़ें। लेकिन, इसकी ज्यादा परवाह नहीं है।

 

लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क virendrasengardelhi@gmail.com के जरिए किया जा सकता है।

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