दो दिन के पुलिसिया रिमांड पर गये सुधीर चौधरी और समीर आहलूवालिया

नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने कथित तौर पर धन की उगाही से संबधित जिंदल समूह द्वारा दायर किये गये मुकदमें में ‘जी समूह’ के गिरफ्तार वरिष्ठ संपादकों को दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. अब उनकी अगली पेशी 30 नवंबर को होगी.

नवीन जिंदल से सौ करोड़ रुपये जबरन वसूली की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किए गए जी न्‍यूज के संपादक सुधीर चौधरी एवं जी बिजनेस के संपादक समीर आहलूवालिया को बुधवार की दोपहर को कोर्ट में पेश किया गया. अपराध शाखा की टीम ने दोनों संपादकों को कड़ी गहमागहमी के बीच कोर्ट में पेश किया. आज अवकाश होने के बावजूद कोर्ट में काफी भीड़ रही.

मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने दोनों संपादकों की जमानत याचिका खारिज कर दी तथा उन्‍हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजे जाने का आदेश दिया. पुलिस ने कोर्ट के सामने निवेदन किया था कि दोनों संपादकों से पूछताछ के लिए कस्‍टडी दी जाए. जिस पर कोर्ट ने दो दिन का रिमांड दे दिया. दो दिन बाद फिर पुलिस दोनों संपादकों को कोर्ट में पेश करेगी.

उधर जी न्यूज ने मांग की है कि कांग्रेस सांसद नवीन जिंदल द्वारा दाखिल जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किये गये उसके दो संपादकों को तत्काल रिहा किया जाए. संस्थान ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई ‘गैरकानूनी’ तथा ‘किसी और मकसद’ से की गयी है. कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड पर आरोप लगाने वाली खबरों को प्रसारित नहीं करने के लिए कंपनी से 100 करोड रुपये मांगने की कोशिश करने के आरोपों का खंडन करते हुए जी न्यूज के सीईओ आलोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि संप्रग.2 सरकार अपनी ‘गलतियों’ के चलते मीडिया को ‘डरा धमका रही’ है.

जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलूवालिया को जिंदल की कंपनी की ओर से अक्तूबर में दाखिल शिकायत के आधार पर कल रात गिरफ्तार कर लिया गया. अग्रवाल और जी समूह के वकील आर के हांडू ने गिरफ्तारी और इसके समय पर सवाल खडा करते हुए कहा कि जानबूझकर छुट्टी वाले दिन से पहले गिरफ्तारियां की गयीं ताकि नियमित जमानत नहीं मिल सके.

हांडू ने कहा कि गिरफ्तारी उस धारा के तहत की गयी है जो गैर जमानती अपराध पर लागू होती है ना कि जमानती के लिए. हांडू ने कहा, ‘‘गिरफ्तारी की क्या जरुरत थी. यह किसी और मकसद से किया गया है.’’   अग्रवाल ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद ने पहले जी के संपादकों को रिश्वत के तौर पर पैसा देने की और बाद में यह पैसा कंपनी को देने की पेशकश की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि जिंदल ने जी के कई वरिष्ठ अधिकारियों को न केवल सीधे बल्कि कई अन्य लोगों के जरिये प्रभावित करने का भी प्रयास किया जिनमें उनके भाई पृथ्वी जिंदल, रिश्तेदार सीताराम जिंदल और दिग्विजय सिंह, रमन सिंह तथा अजरुन मुंडा जैसे नेता भी हैं.

अग्रवाल का यह भी दावा है कि इन लोगों ने जिंदल के खिलाफ खबरों को प्रसारित नहीं करने का अनुरोध भी किया था. उन्होंने कहा कि जिंदल और जी के अधिकारियों की छह मुलाकातों में कुल छह घंटे की बातचीत हुई और यदि कोई इस बातचीत का केवल पांच प्रतिशत निकालता है तो इसे किसी भी तरह से तोडा मरोडा जा सकता है.

जिंदल ने आज इस घटनाक्रम पर अपनी ओर से कोई भी टिप्पणी करने से मना करते हुए कहा, ‘‘मामला अदालत में विचाराधीन है. दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है. मैं इस पर टिप्पणी नहीं करुंगा.’’ हालांकि जब जिंदल से उनके, उनकी कंपनी के अधिकारियों और जी के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत का केवल 14 मिनट का अंश जारी करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने इसकी पडताल की है और सबकुछ सार्वजनिक किया जाएगा.

क्या जिंदल की कंपनी की तरफ से स्टिंग आपरेशन का मकसद कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में जिंदल पावर की कथित संलिप्तता से ध्यान हटाना था, इस पर जिंदल ने तल्ख लहजे में कहा, ‘‘ठीक है, आप अपना ध्यान नहीं भटकाएं.’’ गिरफ्तारी के समय के सवाल पर हांडू ने कहा कि प्राथमिकी जहां दो अक्तूबर को दर्ज की गयी थी वहीं गिरफ्तारी कल ऐसे वक्त की गयी जब दोनों संपादक जांच में सहयोग दे रहे हैं.

उन्होंने दावा किया, ‘‘पुलिस का कहना है कि उनके पास फोरेंसिक रिपोर्ट है. तो वे सीधे आरोपपत्र क्यों नहीं दाखिल करते. गिरफ्तारी की क्या जरुरत है? सामान्य मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाता.’’ अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमने बातचीत से कभी इनकार नहीं किया.’’ उन्होंने कहा कि जब दोनों पुलिस की जांच में शुरु से सहयोग दे रहे हैं तो गिरफ्तारी क्यों की गयी.


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