पीएम की नसीहत: सनसनी फैलाने से बचे मीडिया

 

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि मीडिया को सनसनी फैलाने से बचना चाहिए और कुछ भी लिखने या प्रसारित करने में संयम बरतना चाहिए. सिंह ने कहा कि सांप्रदायिक सहयोग और अंतरसमूह एवं अंतर सामुदायिक संवाद को आगे बढ़ाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है और विचारों की रिपोर्टिंग निष्पक्ष, वस्तुपरक एवं संतुलित रूप से किया जाना चाहिए.
 
केरल श्रमजीवी पत्रकार संघ के स्वर्ण जयंती समारोह का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सनसनीखेज होने की आकांक्षा से बचा जाना चाहिए हालांकि यह कई बार लुभावना लगता है. लिखने, प्रसारण एवं प्रसारित करने में संयम बरतना चाहिए जो समाज या देश को बांटने वाला हो.
 
प्रधानमंत्री ने हाल की असम हिंसा और उसका देश के अन्य इलाकों में पड़े प्रभाव का जिक्र करते हुए मीडिया को यह सलाह दी. इस घटना के बाद देश के कई इलाकों से पूर्वोत्तर के लोग अपने गृह राज्यों में पलायन कर गए थे. सिंह ने कहा कि असम का भयावह घटनाक्रम और मुम्बई, पुणे, बेंगलूर, हैदराबाद, चेन्नई एवं अन्य स्थानों इसके प्रभाव से यह बात सामने आई है कि ‘हम सामाजिक शांति और सौहार्द के बारे में निश्चिंत नहीं रह सकते हैं.
 
मीडिया को सलाह देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में संविधान में प्रदान की गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का हमें गर्व है. हमारे देश में मीडिया न केवल लोक अभिव्यक्ति का विश्वसनीय पैमाना है बल्कि यह हमारे देश की अंतरात्मा का संरक्षक भी है.
 
सिंह ने कहा कि भारत कई धर्मो, जातियों, भाषाओं और विचारों वाला देश है. उन्होंने कहा कि विविध विचारों की स्वतंत्रता और अक्सर विरोधी विचारों का एक साथ सामंजस्य हमारे समाज और राजनीति का एक विशिष्ट गुण है. स्वतंत्र और जवाबदेह मीडिया ऐसे समाज एवं राजनीति को बनाये रखने की पूर्व शर्त है. (समय)

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