जिस पल मौत दिख जाए, फिर मन में पाप नहीं उठता

एकनाथ के जीवन में ऐसा उल्लेख है। एक युवक एकनाथ के पास आता था। जब भी आता था तो वह बड़ी ऊंची ज्ञान की बातें करता था। एकनाथ को दिखाई पड़ता था, वे ज्ञान की बातें सिर्फ अज्ञान को छिपाने के लिए हैं। एक दिन उसने एकनाथ को पूछा सुबह – सुबह कि एक संदेह मेरे मन में सदा आपके प्रति उठता है। आपका जीवन ऐसा ज्योतिर्मय, ऐसा निष्कलुष, ऐसी कमल की पंखडियों जैसा निर्दोष क्वांरा, लेकिन कभी तो आपके जीवन में भी पाप उठे होंगे? कभी तो अंधेरे ने भी आपको घेरा होगा? कभी आपकी जिंदगी में भी कल्मष घटा होगा? आज यही सवाल लेकर आया हूं, ओर चूंकि और कोई मौजूद नहीं है, आज आपको अकेला ही मिल गया हूं, इसलिए निस्संकोच पूछता हूं कि आपके मन में पाप उठता है कभी या नहीं?

नीतीश कुमार अगर यूपी में दस्तक देते हैं तो भाजपा को फायदा पहुंचाएंगे!

अजय कुमार, लखनऊ  

    बिहार में भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंसूबों पर पानी फेरने के बाद अपने आप को केन्द्रीय राजनीति में फिट करने को आतुर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने लिये बिहार और सीएम का पद छोटा लगने लगा है। भले ही नीतीश न-न कर रहे हों लेकिन हकीकत यही है कि वह बिहार से निकल पर पूरे देश में और मुख्यमंत्री से आगे प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। इसके लिये उन्हें यूपी जीतना जरूरी है। यूपी में 2019 के लोकसभा से पहले  2017 में विधान सभा चुनाव होने हैं। नीतीश उत्तर प्रदेश जीतना तो चाहते हैं, परंतु यहां उन्हें न तो समाजवादी पार्टी घास डाल रही है और न ही बसपा की बहनजी। ऐसे में नीतीश के सामने सिर्फ कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल जैसी पार्टियों का ही विकल्प बचता है।

मूर्ति एक डिवाइस है अशरीरी आत्माओं से संबंध स्थापित करने के लिए

मूर्तियों का प्राचीनतम उपयोग …. मूर्ति पर अगर कोई बहुत देर तक चित्त एकाग्र करे और फिर आंख बंद कर ले तो मूर्ति का निगेटिव आंख में रह जाएगा, जैसा कि कैमरे की फिल्म पर रह जाता है। और उस निगेटिव पर भी ध्यान अगर केंद्रित किया जाए तो उसके बड़े गहरे परिणाम हैं।

दो देहों के बीच संबंध यांत्रिक है, सेक्स यांत्रिक है, कामवासना यांत्रिक है

आखिर तंत्र विज्ञान है क्या ….  अक्षर से क्षर की यात्रा यंत्र, क्षर से अक्षर की यात्रा मन्त्र, अक्षर से अक्षर की यात्रा तंत्र। देह है यंत्र। दो देहों के बीच जो संबंध होता है वह है यांत्रिक। सेक्स यांत्रिक है। कामवासना यांत्रिक है। दो मशीनों के बीच घटना घट रही है। मन है मंत्र। मंत्र शब्द मन से ही बना है। जो मन का है वही मंत्र। जिससे मन में उतरा जाता है वही मंत्र। जो मन का मौलिक सूत्र है वही मंत्र। तो देह है यंत्र। देह से देह की यात्रा यांत्रिक – कामवासना।

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया था

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी पीना मुश्किल हो गया था। गले से कोई भी चीज ले जाना कष्ट था। घाव था। तो विवेकानंद ने एक दिन रामकृष्ण को कहा, कि इतनी पीड़ा शरीर को हो रही है। आप जरा मां को क्यों नहीं कह देते? जगत जननी को जरा कह दो। तुम्हारा वह सदा से सुनती रही है। इतना ही कह दो, कि गले को इतना कष्ट क्यों दे रही हो? फिर भोजन की असुविधा हो गई है।

जैनी आज उन्हीं पापों की गठरी ढो रहे जिनसे विरत रहने के लिए महावीर स्वामी ने कहा था

Mukesh Kumar : जैनियों ने महावीर स्वामी के साथ ज़बर्दस्त विश्वासघात किया है। जैसा कि इतिहास सिद्ध है, वे नास्तिक थे और शुरू में जैन धर्म भी नास्तिक ही था। अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह, अचौर्य जैसे सिद्धांतों पर उनका ज़ोर था। चलिए मान लिया कि उनकी तरह दिगम्बर होकर कठिन साधना करना सबके लिए मुश्किल काम है, मगर जैन और भी तो बहुत कुछ कर सकते थे लेकिन वे उसी तरह पाखंडी है गए जैसे दूसरे धर्मों के अनुयायी। वे आज उन्हीं पापों की गठरी ढो रहे हैं जिनसे विरत रहने के लिए महावीर ने कहा था।

मौजूदा मोदी सरकार में इतनी भी हिम्मत नहीं….

Daya Sagar : तो आप देखिए भारत सरकार ने चीनी एक्टविस्ट डोल्कुन ईसा का वीजा रद कर दिया। चीन भारत के इस कदम का विरोध कर रहा था। ईसा साहब आजादी और लोकतंत्र पर हमारे धर्मशाला में होने वाली एक कान्फ्रेंस में हिस्सा लेने आ रहे थे। लेकिन चीन की नजर में ईसा आतंकवादी हैं जैसे उसकी नजर में दलाईलामा एक आतंकी नेता हैं। ईसा को वीजा मिलने का सबसे ज्यादा विरोध हमारे कामरेड दोस्त कर रहे थे जो रात दिन- लेकर रहेंगे आजादी- का कोरस गाते हैं। बताते चलें कि आतंकी ईसा पर कत्लो गारत का आज तक कोई आरोप नहीं है।

मैं गढ़वाल छोड़ कर प्रयाग न जाता, तो शायद ब्लॉक प्रमुख भी न बन पाता : हेमवती नंदन बहुगुणा

Rajiv Nayan Bahuguna : आज भारत के एक अतिशय महत्वाकांक्षी, चतुर, सुयोग्य एवं अवसरवादी राजनेता रह चुके हेमवती नन्दन बहुगुणा जीवित होते तो 97 वर्ष के होते। लेकिन 100 वर्ष तक जीवित रह पाना सिर्फ गुलजारी लाल नन्दा अथवा मोरारजी देसाई जैसे संयमी एवं संतोषी नेता के ही वश में होता है, बहुगुणा जैसों के नहीं। जब डॉक्टरों ने उन्हें सलाह दी की 69 वर्ष की पक्व आयु में दिल का ऑपरेशन कराने की बजाय उन्हें दवाओं के भरोसे रहना अधिक सुरक्षित रहेगा, बशर्ते वह दौड़ भाग कम और आराम अधिक करें। इस पर हेमवती बाबू का जवाब था कि मैं ऐसे जीवन का क्या करूँगा। लिहाज़ा वह ऑपरेशन कराने अमेरिका गए, और मर गए।

कुछ रह तो नहीं गया…

“अरे सब सामान ले लिया क्या? बस में किसी का कुछ रह तो नहीं गया?

“जी सर, सब ले लिया।” स्कूल ट्रिप से वापिस आये सब बच्चे एक साथ चिल्लाये और बस से उतरकर घर की तरफ दौड़ गए।

“सर, फिर भी बस में देख लेना।”

‘परिषद साक्ष्य’ का जेपी अंक यानी संपूर्ण क्रान्ति के नायक को नया हुंकार देती पत्रिका

इस सच से इनकार नहीं किया जा सकता कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण की ‘संपूर्ण क्रान्ति’ देश की आत्मा और देश की चेतना में अब भी पूरी तरह पैवस्त है। बिहार का सन् 1974 का छात्र-आंदोलन व्यवस्था-परिवर्तन के लिए जयप्रकाशजी की ललकार पर किए गए विश्व भर के उन आंदोलनों जैसा ही था, जोकि सफ़ल हुए थे। यह एक ऐसा अद्भुत आंदोलन था, जिसने लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी तथा प्रो. जाबिर हुसेन जैसे नेताओं को भी जन्म दिया, जो जयप्रकाशजी के विचारों को आज भी स्पष्ट और सार्थक तरीक़े से ज़िंदा रखे हुए हैं।

मोदी सरकार के ‘अच्छे दिनों’ की उपलब्धियों को अब सिनेमा हालों में भी झेलिए

नई दिल्ली : केंद्र सरकार की सभी योजनाओं के साथ जल्द ही ‘प्रधानमंत्री’ या राष्ट्रवादी नेताओं के नाम जुड़ सकते हैं और प्रत्येक थिएटर में फिल्मों के प्रदर्शन से पहले नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताने वाले वृत्तचित्रों को अनिवार्य रूप से दिखाया जा सकता है। राज्यों और जिलों में केंद्र सरकार की योजनाओं तथा उपलब्धियों के बारे में बताने के लिए उपाय सुझाने की खातिर गठित मंत्री समूह ने केंद्रीय योजनाओं के साथ ‘प्रधानमंत्री’ तथा अन्य राष्ट्रवादी नेताओं के नाम जोड़ने और सरकार की उपलब्धियों के बारे में फिल्मों के प्रदर्शन से पहले वृत्तचित्र दिखाए जाने सहित विभिन्न सिफारिशें की हैं।

ब्रांड प्रतीकों के सहारे चलती सरकार

गुडगाँव का नाम रातोरात बदलकर जिस तरह गुरुग्राम कर दिया गया. यह कोई महज संयोग नहीं है. इसके पीछे के राजनैतिक मंसूबे तभी स्पस्ट हो गए थे. जब भाजपा सरकार ने पार्टी से ऊपर करके “अबकी बार मोदी सरकार” का नारा स्वीकार कर लिया. यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि भाजपा की लगाम जिस अदृश्यमान लेकिन सबको पता शक्ति के हाथ में है उसका मुख्य मकसद रास्ट्रवादी और स्वदेशी सरकार को स्थापित करना है. अनायास नहीं है कि जिस कार्पोरेटस और मीडिया मुग़लों के सहारे सत्ता तक पहुंची भाजपा सरकार, जिस तरह से एक-एक करके अपने छुपे हुए एजेंडे को लागू कर रही है. उससे न सिर्फ कार्पोरेट्स अपितु अब मीडिया भी मुह मोड़ने लगा है. एक तरफ माननीय प्रधानमंत्री जी कार्पोरेट्स घरानों के कर्ज माफ़ तो करते है लेकिन दूसरी तरफ स्वदेशी के नाम पर बाबा रामदेव की पतंजलि जैसी कंपनियों को बढ़ावा देते है.

भारत में साठ प्रतिशत गिरफ्तारियां अनावश्यक हो रही हैं

भारतीय न्याय व्यवस्था पर श्वेत-पत्र

उदारीकरण से देश में सूचना क्रांति, संचार, परिवहन, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में सुधार अवश्य हुआ है किन्तु फिर भी आम आदमी की समस्याओं में बढ़ोतरी ही हुई है| आज भारत में आम नागरिक की जान-माल-सम्मान तीनों ही सुरक्षित नहीं हैं| ऊँचे लोक पदधारियों को सरकार जनता के पैसे से सुरक्षा उपलब्ध करवा देती है और पूंजीपति लोग अपनी स्वयं की ब्रिगेड रख रहे हैं या अपनी सम्पति, उद्योग, व्यापार की सुरक्षा के लिए पुलिस को मंथली, हफ्ता या बंधी देते हैं| छोटे व्यावसायी संगठित रूप में अपने सदस्यों से उगाही करके सुरक्षा के लिए पुलिस को धन देते हैं और पुलिस का बाहुबलियों की तरह उपयोग करते हैं| अन्य इंस्पेक्टरों-अधिकारियों की भी वे इसी भाव से सेवा करते हैं| व्यावसायियों को भ्रष्टाचार से वास्तव में कभी कोई आपति नहीं होती, जैसा कि भ्रष्टाचार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधिपति ने कहा है,  वे तो अपनी वस्तु या सेवा की लागत में इसे शामिल कर लेते हैं और इसे अंतत: जनता ही वहन करती है| इतिहास साक्षी है कि व्यापरी वर्ग को किसी भी शासक या शासन प्रणाली में कोई आपति नहीं रही क्योंकि वह पैसे की शक्ति को भली भांति पहचानता है और जरुरत पड़ने पर चन्दा भेंट आदि देने में सक्षम है|

जय श्री राम, भारत माता की जय, वन्दे मातरम की जगह अब जय भीम

अम्बेडकर नाम की लूट है लूट पाये सो लूट…. अम्बेडकर और दलित प्रेम बना राजनीतिक दलों के लिए संजीवनी…

लगता है कि पहली बार संघ और भाजपा के चिंतकों ने वृहद राजनीतिक सोच के तहत दलित वर्ग में अपना राजनीतिक भविष्य तलाशने के लिए डॉ० भीम राव अम्बेकर पर अपना होम वर्क जोर-शोर से शुरू कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की पुनः समीक्षा वाले बयान से हुए राजनीतिक नुकसान की पूरे देश में भरपाई और ख़ास तौर से उत्तर प्रदेश में आगामी विधान सभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संघ और बीजेपी के रणनीतिकारों ने श्री राम और भारत माता की जय के नारों को पीछे छोड़ते हुए अब नए राजनीतिक समीकरणों को फलीभूत करने की दिशा में जय भीम का नारा पूरे जोशो खरोश से उछाल दिया है। 

समान अवसर के लिये समान शिक्षा की जरुरत

लोक कल्याण ही लोकतंत्र का मुख्य उद्देश्य है ! संविधान की प्रस्तावना में भी स्पस्ट किया गया है कि भारत एक सोशलिस्ट सेक्युलर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक है ! सरकार का मुख्य कर्तब्य है कि वह संविधान की प्रस्तावना में वर्णित उदेश्य – सामाजिक-आर्थिक न्याय, सामजिक-आर्थिक समानता और सबको समान अवसर सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक कदम उठाये ! आज शिक्षा का व्यापारीकरण हो गया है ! परिवार के  आर्थिक हालत के अनुसार  स्कूल की पांच केटेगरी बन गयी है ! लोअर इनकम ग्रुप, मिडिल इनकम ग्रुप, हायर इनकम ग्रुप और इलीट ग्रुप और सरकारी स्कूल, जहाँ गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वाले परिवारों के बच्चे पढ़ते है ! इन सभी स्कूलों की किताबें अलग-2 होती हैं!

कोबरा पोस्ट ने नीतीश कुमार के आवास पर सोलर पावर लगाने में तीन करोड़ के घोटाले का खुलासा किया

Solar power scam reaches Bihar’s “Sushashan babu” Chief Minister’s doorstep, Cobrapost brings to light a Rs 3 crore scam regarding purchasing of solar lamps for Bihar Chief Minister Nitish Kumar’s residence, involving state government officials

By Md Hizbullah

Another solar scam in Bihar has come to light following an RTI petition by activist Shiv Prakash Rai, this time at Chief Minister Nitish Kumar’s official residence. In 2011, the Central government had proposed installing a solar plant at the chief minister’s residence and office premises, including at his Janta Darbar. According to documents available with Cobrapost from the Ministry of New and Renewable Energy (MNRE), the total cost for the project was Rs 3 crore, of which 50 per cent was to be paid by the state government and the other half by the Central government.

प्रेस काउंसिल आफ इंडिया ने सूचना प्रसारण मंत्रलाय के सचिव के खिलाफ वारंट जारी कर दिया

नई दिल्ली : भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव सुनील अरोड़ा के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। पीसीआई ने यह कदम अपने समन पर सोमवार को उनके उपस्थित नहीं होने पर उठाया। सेवानिवृत न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद की अध्यक्षता वाली परिषद ने सर्वसम्मति से यह निर्णय किया कि बैठक की अगली तारीख 22 अप्रैल को अरोड़ा उपस्थित हों।

IS, The State of Islam : A new phenomenon really?

A million dollar question first

Before starting this article let me start with a question. Have anybody wondered why Islamic State has got such an overwhelming support among Muslims around globe which seemed to be missing in case of Al Qaieda ?? More I study Islam more I become clear of the reasons behind this huge success of Islamic State as compared to Al Qaieda. One fundamental fact about Islam is that it is lesser a religious philosophy & more a political ideology. Interconnections between religious and political authority is something that we can find in almost all religions more or less. However in case of Islam, it is in it’s most explicitly institutionalized form with no parallel in world. This is what makes Islam more a “state” than a “religious community”. And here lies the great misery of a common follower of Islam !! A common follower of Islam could never realize that he has become a passion-full soldier of a virtual state in disguise of a faithful follower of a religion. And this thing governs his psychic so deeply & so naturally that most of the time he remains unaware of it. However he does strongly feel a greater share of loyalty towards this “state” than the formal nation-state he lives in or the society he belongs to in general context of region, language or culture- as a symptom.

दूध विशुद्ध मांसाहारी पेय है!

दूध असल में अत्याधिक कामोत्तेजक आहार है और मनुष्य को छोड़कर पृथ्वी पर कोई पशु इतना कामवासना से भरा हुआ नहीं है, और उसका एक कारण दूध है। क्योंकि कोई पशु बचपन के कुछ समय के बाद दूध नहीं पीता, सिर्फ आदमी को छोड़ कर। पशु को जरूरत भी नहीं है। शरीर का काम पूरा हो जाता है। सभी पशु दूध पीते हैं अपनी मां का, लेकिन दूसरों की माताओं का दूध सिर्फ आदमी पीता है, और वह भी आदमी की माताओं का नहीं, जानवरों की माताओं का भी पीता है।