ईटीवी काम करने वाले पत्रकार एवं कर्मचारी अपनी पीड़ा अभिव्यक्त्ा करने के लिए एक ब्लॉग बनाया है. ब्लाग का नाम है whistleblower1-khulasa. इस ब्लॉग के माध्यम से ईटीवी के कर्मचारी अपनी पीड़ा और दुख दर्द की बातों रखा करेंगे. इस ब्लॉग पर जो पहली पोस्ट प्रकाशित है, उसे हम नीचे ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहे हैं.
बेचारा स्ट्रिंगर बना पाण्डेय का शिकार
आपने ईटीवी न्यूज़ पर रिपोर्टरों को खुलासे करते देखा होगा, एंकर भी खुलासे करतें हैं, चैनल पर प्रभु चावला, अजय सेतिया यहाँ तक कि आप ईटीवी न्यूज़ के तथाकथित हिंदी चैनल हेड को खुलासे करते आप देख सकते हैं, ये सब खुलासे जनता को भरमाने के लिए होते हैं. इन सबके सम्बन्ध में हम आपसे बाद में चर्चा करेंगे. पहले ईटीवी न्यूज़ में चेंज हो चुके नियमों की हम बात कर लें. ईटीवी न्यूज़ में समाचार लाने का जमाना चला गया. अब ईटीवी न्यूज़ में अगर आप नौकरी पाना चाहते हैं और उसे बरक़रार रखना चाहतें है तो आपको दो गुणों में महारत हासिल करना होगा पहला चापलूसी और दूसरा दलाली. इन दोनों में अगर आप कमजोर हैं तो फिर आपके के पास एक ही रास्ता है या तो आप को प्रताडि़त किया जायेगा या नहीं तो आपको बाहर का रास्ता दिखाया जायेगा.
शुरुआत कर लेते हैं ईटीवी न्यूज़ के छत्तीसगढ़ प्रदेश से हाल ही में निकाले गए एक स्ट्रिंगर की, जिन्हें ईटीवी न्यूज़ से सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया क्योंकि उन्होंने रायपुर वाले ब्यूरो हेड शैलेश पाण्डेय जी को पैसे देने से मना कर दिया. खबर मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़ इनपुट हेड अरुण त्रिवेदी, मैनेजर दीपक साहा, नोडल इंचार्ज मनीष उपाध्याय, एडिटर राजेश रैना से लेकर कातिल साहब तक पहुंची. लेकिन कहावत है कि खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान वही बात यहाँ भी लागू हो गयी. कातिल के ख़ास होने के चलते शैलेश पाण्डेय जी का तो कुछ नहीं हुआ बेचारे ये स्ट्रिंगर साहब निपट गए. स्ट्रिंगर को बोल दिया गया कि आपको हेड ऑफिस से खबर डालने से मना किया गया है. बेचारे बॉस की बातों में आ गये. नयी-नयी शादी हुई थी बेचारे की खुमारी भी नहीं उतरी थी. दो महीने तक साहब ने स्टोरी नहीं डाली, पांडे को मिला मौका. हेड ऑफिस को दे दी सूचना कि स्ट्रिंगर साहब ने दो महीने से स्टोरी ही नहीं डाली और हेड ऑफिस ने भी आईडी जमा करवा लिया. और बेचारे स्ट्रिंगर साहब बाहर.
अब पते की बात- ईटीवी न्यूज़ का रामोजी मैनेजमेंट किसी को भी हटता या निकलता है तो उसके लिए बजाफ्ते लिखित रूप में भेजा जाता है, लेकिन ठहरे तो साहब स्ट्रिंगर, उन्हें इस बात की जानकारी तो थी नहीं कि जब तक ऊपर से लिखित आदेश नहीं आता है तब तक आपको स्टोरी भेजना बंद नहीं करना है. बेचारे फंस गए चंगुल में और नौकरी भी गयी हाथ से. वैसे भी तिकड़मी आदमी वही हो सकता है जिसके पास ये सब काम करने की फुर्सत हो, काम भी नहीं करना हो और पैसे भी आते रहें.
अब जब बात काम की हो ही रही है तो क्यों ना साहब की काम के बारे में भी जानकारी ले लें. शैलेश पाण्डेय जी साहब ग्यारह से बारह-एक बजे तक अपने ऑफिस में आ ही जाते हैं. ठंडी-ठंडी एक की हवा खाते आते हैं, ऑफिस पहुँचते ही दिन में ऑरकुट, पोर्नोग्राफी एक दो फिल्म डाउनलोड करने देखने के साथ रोजाना कंप्यूटर गेम्स में अच्छा स्कोर तो अवश्य कर लेते हैं. आपके बच्चों को तो गेम्स में जरूर पारंगत कर देंगे. इतने में हंसी-ठट्ठा और रोब दिखाते शाम के 8 बजे और पाण्डेय जी बाहर. अब तो पाण्डेय जी को आप मयखाने-बार और फ्री के दारू पीते नज़र न आये तो क्या आये? वैसे भी एक बीबी के रहते ईटीवी के 15 हज़ार की नौकरी में ४ गर्लफ्रेंड रखना आसान बात है क्या?
ये तो हुई साहब के बारे में छोटी सी जानकारी, अब स्ट्रिंगर कॉट्रैक्ट वाले मजदूर हो गए, बेचारों का कॉट्रैक्ट रिन्यूवल के लिए लेटर आया हुआ था 26 दिसम्बर को, लेकिन पाण्डेय जी तो ठहरे पाण्डेय जी, उसको लेकर सो गए. जब भोपाल में एचआर को याद आई और उन्होंने तफ्तीश किया तो पता चला पाण्डेय जी तो उसे लेकर बैठ गए. बेचारे इतने दिनों तक बिना कांट्रैक्ट रिन्यूवल के ही काम करते रहे स्ट्रिंगर.












sanjay praksah, jabalpur
January 31, 2011 at 7:54 am
इस खबर को पोस्ट करने वाले दुखी स्ट्रिंगर श्री अवधेश मालिक जी के बारे में भी पाठको को जानकारी होना जरूरी है. अवधेश जी १ साल पहले झारखण्ड कि अलका नाम की एक उम्रदराज़ महिला के चक्कर में फंस गए थे. पहले तो मालिक जी ने उसे ३५ हजार रूपये दिए और बाद में पिटे भी. मैडम के चक्कर में मालिक जी रायपुर से लेकर रांची तक बदनाम हुए. बताते है उन कि कोई सीडी भी बन गई थी? ….खेर जो भी हो… बेचारे मालिक जी पहले औरत के मामले में फंसे और अब स्ट्रिनगरी चली गई तो पाण्डेय बाबू को बदनाम कर रहे है.
surenra
January 31, 2011 at 6:27 am
ya sirf raipur ka haal nahi hei..bhopal, gwalior aru jabalpur me bi aisa hi chal raha hei.. bureau log kaali kamaaei me lage huye hei…aur prabandhan hei ki sab dekhane ke baad bhi kaarwahi nahi karte…
rajiv
January 31, 2011 at 11:22 am
शैलेश पाण्डेय जी साहब ग्यारह से बारह-एक बजे तक अपने ऑफिस में आ ही जाते हैं. ठंडी-ठंडी एक की हवा खाते आते हैं, ऑफिस पहुँचते ही दिन में ऑरकुट, पोर्नोग्राफी एक दो फिल्म डाउनलोड करने देखने के साथ रोजाना कंप्यूटर गेम्स में अच्छा स्कोर तो अवश्य कर लेते हैं.
sanyogitakumari
January 31, 2011 at 5:12 pm
ETV MAI IN DINO KATIL RAJ CHAL RAHA HAI.CHAMCHON KI FOJ HAI…ASLI JOURNALIST HASHIYE PER HAI…NA JANE KATIL RAJ AUR KYA KYA GUL KHILAYE GA….
sanyogitakumari
January 31, 2011 at 5:13 pm
ETV KATIL RAJ KE CHALTE APNE PATAN KI RAH PER HAI..RAMOJI RAO AAPNE YE KYA KAR DIYA
mukash
February 1, 2011 at 4:49 am
adhuri jan kari rahakhatay hay ap etv asay hi agay nahi bada uskay pichay pandy ji ka bahut bada hath hay