सेवा में, श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा और अध्यक्ष हरियाणा साहित्य अकादमी। विषय: साहित्यकारों का सम्मान चयन में अनियमितताएं। महोदय। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2010 में सम्मानित किए जाने वाले साहित्यकारों के नाम समाचार-पत्रों में पढ़कर कुछ गंभीर अनियमितताओं की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करते हुए अनुरोध है कि आप इसे निजी तौर पर देखें।
1. डा. जयनारायण कौशिक, दिल्ली को अकादमी द्वारा हरियाणा अधिवासी होने के नाते पं. लखमीचंद पुरस्कार से पहले ही सम्मानित किया जा चुका है। अब उसी व्यक्ति को हरियाणा से बाहर रहकर साहित्य सेवा करने वाले साहित्यकार के रूप में समकक्ष पुरस्कार हरियाणा गौरव से सम्मानित करने का क्या औचित्य है?
2. श्रीमती शकुंतला ब्रजमोहन को महिला सशक्तिकरण वर्ष में महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से, इसके बाद बाबू बालमुकंद गुप्त पुरस्कार से पहले ही सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें उसी के समकक्ष महिला लेखिका के रूप में सम्मानित करना भी सवाल खड़ा करता है। किसी नई लेखिका को सम्मान मिलता तो इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होती।
3. डा. चंद्र त्रिखा को सम्मानित करना आश्चर्यजनक है, क्योंकि वह हरियाणा सरकार द्वारा निर्धारित हरियाणा अधिवासी की किसी भी परिभाषा के अनुसार हरियाणा अधिवासी नहीं है।
4. अकादमी के पूर्व निदेशक देश निर्मोही को बाबू बालमुकंद गुप्त पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। श्री निर्मोही एक साहित्यिक पत्रिका के संपादक रहे हैं। उनका पुस्तक के रूप में (स्थायी साहित्य के रूप में) नगण्य योगदान होते हुए भी सम्मानित किया गया है। इनसे अच्छे साहित्यकार, पत्रकार के रूप में मनमोहन गुप्ता मोनी, श्रीकृष्ण गोपाल विद्यार्थी की उपेक्षा हुई है।
5. अकादमी निदेशक द्वारा साहित्यकार सम्मान चयन समिति के समक्ष विचाराधीन साहित्यकारों के जीवन परिचय के साथ उनका प्रकाशित साहित्य भी प्रस्तुत किया जाता था। लगता है वह स्वस्थ परंपरा अकादमी द्वारा छोड़ दी गई है, ताकि मनमाने ढंग से साहित्यकारों का चयन करवाया जा सके।
6. सत्यपाल गुप्त को भाषा विभाग, हरियाणा द्वारा (अब साहित्य अकादमी) उत्कृष्ट हिंदी साहित्यकार (सूर पुरस्कार) के रूप में पुरस्कृत किया जा चुका है। अब उनको विशेष साहित्य सेवी सम्मान से फिर सम्मानित करने का सीधा अर्थ है नए साहित्यकारों की उपेक्षा होती रहे। पिछले कई सालों से श्री गुप्त इसके लिए बहुत सारे हथकंडे अपनाते रहे हैं।
7. विशेष साहित्य सेवी सम्मान से सम्मानित ताराचंद प्रेमी की एक पुस्तक तो क्या एक भी प्रकाशित पेज का उल्लेख न होते हुए भी उन्हें अकादमी द्वारा सम्मानित किया जाना कितना उचित है?
8. लाला देशबंधु सम्मान से सम्मानित- गुरमीत सिंह की एक कृति प्रकाशित है। इनकी आयु 40 वर्ष है। नरेंद्र कुमार उपमन्यु की 38 वर्ष और हेमंत अत्री की आयु 36 वर्ष, इतनी कम आयु के लोगों को सम्मानित करके वरिष्ठ लोगों का अपमान किया गया है।
9. भारत भूषण सांघीवाल, रोहतक को वर्ष 2004 में वयोवृद्ध साहित्यकार सम्मान और वर्ष 2006 में पंडित लखमीचंद पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। अब श्री सांघीवाल को विशेष साहित्य सेवी सम्मान से सम्मानित करना कई सवाल खड़े करता है।
10. विगत चार वर्षों में जो साहित्यकार अच्छा लिख रहे हैं, उनकी घोर उपेक्षा हुई है। ऐसे ही कुछ साहित्यकारों के नाम इस तरह से हैं।
1. कुमार रवींद्र, हिसार
2. डा. विश्वबंधु शर्मा, रोहतक
3. जयभगवान गोयल, कुरुक्षेत्र
4. डा.रूपदेवगुण, सिरसा
5. श्रीनिवास वत्स, रोहतक
6. डा.सारस्वत मोहन मनीषी, दिल्ली
7. डा. रामनिवास मानव, हिसार
8. डा.सावित्री वशिष्ठ, सोनीपत
9. रमेश सिद्धार्थ, रेवाड़ी
10. राजकुमार निजात, सिरसा
11. डा. लालचंद गुप्ता मंगल, कुरुक्षेत्र
12. रामकुमार आत्रेय प्रभाकर, कुरुक्षेत्र
13. घमंडीलाल अग्रवाल, हेली मंडी
14. डा. रमाकांत दीक्षित, भिवानी
15. डा. राजेंद्रमोहन भटनागर, उदयपुर
16. कमल कपूर, फरीदाबाद
17. डा. प्रद्युम्न भल्ला, कैथल
18. डा. राजेंद्र गौतम, दिल्ली
19. डा. नरेश मिश्र, रोहतक
20. सुमेर चंद, सोनीपत
21. विपिन सुनेजा, रेवाड़ी
22. सुखचैनसिंह भंडारी, सिरसा
23. हरेराम समीप, फरीदाबाद
24. अशोक भाटिया, करनाल
25. डा. दिनेश दधीचि, कुरुक्षेत्र
26. डा. संतराम देसवाल, सोनीपत
27. विष्णु सक्सेना,पिंजौर
28. मदनलाल शर्मा, कुरुक्षेत्र
29. डा. रोहिणी, रोहतक
30. सुश्री किरण मल्होत्रा, सिरसा
आपसे अनुरोध है कि अकादमी की शाषी परिषद, वित्त विभाग हरियाणा द्वारा अनुमोदित पुरस्कार ही दिए जाएं ताकि इस तरह की घोर अनियमितताओं से बचा जा सके। धन्यवाद
सादर
रोशन सिंह चौहान












Ravinder Singh
September 28, 2010 at 5:43 pm
मित्र, आपने सही लिखा की बहुत से हकदार लोग पुरस्कार से वंचित रह गए। हरियाणा सरकार ने अधिकतर उन्हें ही पुरस्कृत किया होगा जिन्हें वे जानती होगी या फिर उन्हें जो सरकार के पीआरओ के रूप में कार्य करते हैं। हर मेहनत करने वाले को इनाम कहां मिलता है। अगर ऐसा होता तो हर गधे को इनाम मिलता।
mahandra singh rathore
September 29, 2010 at 5:38 am
ankur singh
roshan singh chouhan ji ne awaj uthaker accha kaam kiya hai. haryana ke sabhi lekhko ko iss per aapni ray deni chhahiye. haryana sarker ne iss baar un patrkaro ko gher bethe sammanit ker diya jinhone farm bhi nahi bhara tha. govt ne 2008 mai state aur district level ke leye farm mange the. doo saal baad 120 se jayada logo ko sammanit kerne ka kaam to thik ho sakta hai per kya CM HUDDA iss baat ka pata kernge ki kitne logo na farm bhere the. eek-eek newspaper se 4-5 logo ko samman diya hai.
deepak khokhar
September 29, 2010 at 8:03 am
in haryana govt. all things are not going well. i think govt should stop these types of cheap activities.
mahandra singh rathore
October 1, 2010 at 5:46 am
written by ankur singh butty
roshan singh ji ne awaj uthaker sahahas ka kaam kiya hai. aaj esse logo ki jarurart hai jo himmiti ho. mujhe lagta hai woh puraskar ke davedar nahi honge isske baad bhi unnhone awaj buland ki. roshan singh chouhan ji mere badhai swekar keren.
RHGIUG
October 3, 2010 at 8:39 pm
BAHUT SAHAS KAM KAM KIA HAI PAR KUCH FAYDA NHI HOGA. HUDA K PAS TYM NHI HAI
RHGIUG
October 3, 2010 at 8:41 pm
;)>:(:o:P:)BAHUT SAHAS KA KAM KIA PAR KUCH FAIDA NHI HUA.
HUDA K PAS TYM NHI HAI IN SB CHEEZO KA