
योगेश शीतल
जिसपर विद्यार्थियों ने उनसे अपनी बात कहनी चाही लेकिन ओएसडी ने साफ कह दिया कि कोई भी इस मांग को लेकर आंदोलन या सामूहिक बैठक की तो उन्हें एक सप्ताह के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा। साथ ही यह भी धमका गए कि विद्यार्थियों को अभी चार महीने यहीं गुजारना है जो खतरे में पड़ सकता है।
गौरतलब है कि सेवा में पेंशन की मांग को लेकर खुद आईआईएमसी स्टॉफ परिसर में धरना दे रहे है और परिसर जंतर मंतर सा हो गया है। ऐसे में विद्यार्थियों के विरोध की आहट ने निदेशक को खिन्न कर दिया है। ओएसडी की चिड़चिड़ाहट को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

इससे पहले आधी बैठक में विद्यार्थियों ने कथित इंटर्नशिप की यादें ताज की और कई भेदों को भेदा। विद्यार्थियों का कहना था कि तीन महीने बीत जाने के बाद भी संस्थान प्रशासन का वही रवैया है जो खेल के दौरान था। इस को लेकर भी विद्यार्थियों में खासा गुस्सा था कि खेल के दौरान घटिया खाना, काम का स्तर, ओवर टाइम के जरिए शोषण व दुर्व्यवहार से संबंधित कोई भी शिकायत सुनने में कभी भी संस्थान प्रशासन ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।
ओएसडी ने छात्रों से हुई हॉट बातचीत में छात्रों के हक नहीं मिल पाने का कारण सीवीसी शुंगलू कमिटी और सीआईडी द्वारा की जा रही जांच को बताया। आने वाले दिनों में परिसर नार्मल नहीं रहेगा इसकी पूरी संभावना बन रही है। लिखे जानेतक कुछ भी नार्मल नहीं है।
योगेश शीतल की रिपोर्ट.












Priya Sinha
January 19, 2011 at 7:20 am
Baat nikli hai to dur talak jaaygi.
अमित पाठे
January 17, 2011 at 11:40 am
अच्छा है। इस खबर से जुड़ा कार्टून मेरे ब्लॉग पर देखें- http://amitpathe.blogspot.com[url][/url%5D
ankur
January 17, 2011 at 7:50 am
durbhaagya hai ki jahn abhvyakti ki swantatntrata ke liye bht badi badi baaten banayi jaati hain wahan hi abhivyakti ki swantantrata nahi hai …
कमल शर्मा
January 15, 2011 at 8:58 am
आईआईएमसी के छात्रों के साथ जयदीप भटनागर जी को अपने रवैये में बदलाव करना चाहिए। शांत चित से सोचिए भटनागर जी और छात्रों से जो वादे किए गए वे पूरे होने चाहिए। मैं भी आईआईएमसी का पूर्व छात्र हूं।
Neeraj patel
January 15, 2011 at 8:05 am
योगेश भाई आपकी अभिव्यक्ति को सलाम….
Neeraj patel
January 15, 2011 at 8:06 am
योगेश भाई आपकी अभिव्यक्ति को सलाम….
Neeraj patel
January 15, 2011 at 7:59 am
योगेश भाई मैं आपसे सहमत हूं..और आपके साथ भी आपके बेबाकपन को सलाम….
अंकुर विजयवर्गीय
January 15, 2011 at 3:59 am
पता नहीं पत्रकारिता शिक्षा के इस मंदिर को अब किसकी नजर लग गई है। यहां के शिक्षक जिस तरह से छात्रों के हितों की बातों को दरकिनार करते हैं वो शर्मनाक है। अब यहां के शिक्षकों को लेख लिखने और बौद्विक होने का दावा ठोकने के अलावा छात्रों के भविष्य के बारे में भी सोचना होगा।
एक ओर इस संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की तैयारी है दूसरी और ये संस्थान ही ठीक से नहीं चल पा रहा है।
क्या ये भारतीय जनसंचार संस्थान के अंत की शुरूआत है।
सोचिए ।
aaj k bhagat singh
January 14, 2011 at 7:01 pm
छात्रों को भविष्य का $खतरा दिखा कर भयभीत करने का यह मामला पहला नहीं हैं।आजकल यह प्रथा ज़ोरो पर है। पत्रकारिता निडरता का दूसरा नाम है। किंतु बेलगाम हो चले प्रशासन और तानाशाही रवैया अपनाये हुए प्रबंधन के खिलाफ छात्रों की थोड़ी सी अंगड़ाई खलबली मचा देती है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में इन दिनों भी यही कोहराम मचा हुआ है। वि.वि. के नोएडा और खण्डवा प्रांगणों के हालात सभी जानते हैं।भोपाल स्थित मुख्य कैंपस में तो धांधलियाँ चरम पर है। छात्र हित ताक पर है।हो रही है तो सिर्फ राजनीति,वो भी ओछी।छात्रों को डराया धमकाया जाता है।कुलपति पद को सुशोभित करने वाले महात्मन अखबारों में नकारात्मक छवि में मौजूद रहते है। इनके आते ही शिक्षक,छात्र,कर्मचारी व इससे मान्यता प्राप्त संस्थान हंगामा,प्रदर्शन व छात्रों का उग्र आंदोलन भी हो चुकें है। शायद वक्त आ गया है कि देश के समस्त मीडिया संस्थानों के छात्र अपना एक संगठन बनाएं ।
g. a.
January 14, 2011 at 1:45 pm
छात्रों को उनका हक मिलना चाहिए
Amit Pathe
January 27, 2011 at 12:42 pm
काफी कुछ है यहां http://amitpathe.blogspot.com/