खबर कनफर्म हो चुकी है. हिंदुस्तान, चंडीगढ़ संस्करण बंद करने का ऐलान हो चुका है. इससे संबंधित पत्र जारी हो चुका है. 17 स्ट्रिंगरों को हटाए जाने की सूचना है. इनमें सें 6 स्ट्रिंगर तो पिछले ही महीने हिंदुस्तान, चंडीगढ़ के हिस्से बने थे. इन स्ट्रिंगरों को आठ-आठ हजार रुपये तनख्वाह मिलते थे. चंडीगढ़ संस्करण के जरिए हिंदुस्तान का प्रजेंस चंडीगढ़ के अलावा चार राज्यों में था. पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा की खबरें इस संस्करण में प्रकाशित होती थीं.
यह संस्करण इन दिनों बिना संपादक के चल रहा था. न्यूज एडिटर सुधीर राघव संपादकीय प्रभारी के रूप में काम देख रहे हैं और अब इनके भी तबादले की संभावना है. हिंदुस्तान, चंडीगढ़ की रिपोर्टिंग टीम में आठ लोग हैं. डेस्क पर भी करीब इतने ही लोग हैं. विज्ञापन, प्रसार, एकाउंट समेत अन्य विभागों को मिला लें तो 50 से ज्यादा लोग एडिशन बंदी से प्रभावित होंगे. हिंदुस्तान का चंडीगढ़ संस्करण वर्ष 2008 के जून महीने में लांच हुआ था. अकू श्रीवास्तव संपादक हुआ करते थे. 35 हजार कापियों के साथ लांच हुए हिंदुस्तान के बारे में बताया जा रहा है कि इन दिनों उसकी चंडीगढ़ में सिर्फ 2000 कापियां बिकती थीं. लांचिंग के वक्त 16 पेज का टैबलायड सोहणी सिटी के नाम से निकाला गया लेकिन पाठकों द्वारा इसे पसंद न किए जाने के कारण सोहणी सिटी टैबलायड को वर्ष 2008 के दिसंबर महीने में ही बंद कर दिया गया.
जनवरी, 2009 में सोहणी सिटी को ब्राडशीट (बड़े साइज) के रूप में प्रकाशित किया गया. इसका लेआउट व कलर भी कई बार बदला गया लेकिन इसने जोर नहीं पकड़ा. अब पूरा अखबार ही बंद करने का फैसला ले लिया गया है. इससे ठीक पहले हिंदुस्तान प्रबंधन ने अपना कोलकाता एडिशन बंद कर चुका है. चंडीगढ़ एडिशन का इस्तेमाल कई बार कालापानी की सजा के लिए भी इस्तेमाल होता रहा है. हरिनारायण सिंह का जब रांची से तबादला किया गया तो उन्हें चंडीगढ़ जाने को कहा गया. लेकिन उन्होंने कालापानी स्वीकारने की जगह इस्तीफा दे दिया. इसी तरह राजेंद्र तिवारी को जब रांची से हटाया गया तो उनका तबादला चंडीगढ़ के लिए किया गया. पर राजेंद्र तिवारी ने भी चंडीगढ़ में ज्वाइन करने की जगह इस्तीफा दे दिया. अब खुद प्रबंधन ने चंडीगढ़ में अखबार चलाने की जगह बंद करने का फैसला ले लिया.
हिंदुस्तान प्रबंधन ने अचानक कोलकाता और चंडीगढ़ जैसे दो-दो एडिशन बंद करने का निर्णय क्यों लिया, इस बारे में अगर किसी को कोई खास जानकारी हो तो नीचे कमेंट के रूप में अपनी बात रख सकता है. या फिर [email protected] पर मेल कर सकता है.












v.saran
September 28, 2010 at 4:16 pm
jai ho shashi shekhar ki…
bhut
September 28, 2010 at 6:48 pm
Yashwant g, Shashishekhar ki ninda nahin karenge. Do edition band hona unki vifalta nahin hai……………..
mahandra singh rathore
September 29, 2010 at 5:54 am
shobhna bhartiya ji aur shahsi shekher ji eek baar phir vichar keren chd ke hindustan (hindi) ko jari rekhen.
hindustan ka chd edition her field mai sabse accha tha. sohni city full coverage ker raha tha. edition band hone ki khabar se nirasha hui hai. parbhari sudhir raghav aur sabhi sataff ko shandar kaam ke leye bhaut bhaut badhai. yah management ka kaam hai ki veh loss-profit dekhe per staff ne puri mehenat se kaam kerke dikhya hai. tri city ki itni news aab koi dusra newspaper nahi de sakega. hum-tum mai yaha ke loga ko likhne ka moka mil raha tha. jab hindustan ke pathako ki taadad badh rahi hai aur woh third number per hai to band kerne ka kya matlab hai? jab up mai eek ke baad eek edition shru ho rehe hain to band kerne ka silsila kyon ha raha hai. shobha ji eek baar phir vichar kere. thanks
narendra nath
September 29, 2010 at 7:01 am
ye to hona hi tha jab malikon ke pattechat sampadak aur sampadak ke pattechat hi poore office main honge to woh band nahin hoga to kya hoga.
PRAVEEN KUMAR
September 29, 2010 at 8:33 am
AB HINDUSTAN KE BARI HAI KYA YE HE TAIYYARI HAI.
ARE YASHWANT JI YE HAAL TO INKA SAB JAGAH HONE WALA HAI. JITNE BHI NAYE EDITIONS LAUNCH HUE HAIN SABME SCRAP HOTA HAI.
Hasrat
September 29, 2010 at 6:50 pm
आदरणीय,
यूनिट किसी भी संस्थान के लिए बच्चों की तरह होते हैं। किसी भी परिवार के सभी बच्चे कमाऊपूत नहीं हो सकते। पिता का फर्ज होता है कि जो बच्चा कमाऊ नहीं होता उसको घर से नहीं निकाल दिया जाता। माता-पिता उस बच्चे को कमाई करने के उपाय समझाते हैं, ताउम्र मेहनत करते हैं। सुधीर राघव जी और उनकी टीम हमेशा अच्छा काम करती रही है, जो उनके अखबार से दिखता रहा है। कमाई के जरिए मिलजुल कर ढूंढे जा सकते हैं। और हां, अगर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ जैसे समृद्ध राज्यों में अखबार कमाई नहीं कर पा रहा है तो इससे संबंधित नीतियों पर विचार किया जाना चाहिए था।
आशा है श्री शशि शेखर जी और संस्थान के अन्य कर्ताधर्ता उन लोगों के बारे में सोचकर फैसले पर दोबारा जरूर विचार करेंगे जिनका निवाला इस फैसले से छिन सकता है…. और इस यू्निट को दोबारा प्रफुल्लित करने की ओर ठोस कदम उठाएंगे।
धन्यवाद।
🙁
raam singh
September 30, 2010 at 5:25 am
ab dehradun ki baari hai.dehradun edition resident editor ke karan band hoga. uttrakhand ke log hindustan ki nishank sarkar se milibhagat samjh chuke hain.
ajay
September 30, 2010 at 8:12 am
भाईजी, शशिशेखर तो जहां जाएंगे, बेड़ा ही गर्क करेंगे। उन्हीं के कुशल कार्य़काल में अमर उजाला का जालंधर संस्करण बंद हुआ। अब हिंदुस्तान की सफाई कर रहे हैं। वैसे, सारा कसूर उनका भी नहीं है। हिंदुस्तान चंडीगढ़ के पतन की नींव तो अक्कू श्रीवास्तव ही रख गए थे। खुद तो लालाबुद्धि लगाकर खिसक गया, बदनाम कोई और ही हुआ। बड़े कारपोरेट घराने हैं, उनका तो कुछ नहीं होगा, लेकिन 17 स्ट्रिंगरों का क्या होगा, खुदा ही जाने।
mohit yadav
September 30, 2010 at 8:21 am
sahi kaha ram singh ji aapne dehradun k RE saab ki nishank sarkaar se milibhagat hi ab yahan hindustan ki highlighted story hai…aur achhe paper k liye ye jaroori hai ki neutral raha jaye.ho sakta hai RE saab unko personaly jaante ho per abhi hamein paper dekhna hai….
Vikas
October 4, 2010 at 2:38 am
achha hai….chalta bhi nahin tha…bekar paper hai…hindustan….bahut loss mein ja raha tha….
Vikas