मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल की हरकत ने ये तो साबित कर ही दिया कि स्वामी रामदेव से कालेधन पर किया गया समझौता मजबूरी में किया गया समझौता था। जिसकी खीझ मिटाने के लिए कपिल सिब्बल ने स्वामी रामदेव को अपमानित करने की कोशिश की। चिट्ठी का मसौदा मीडिया को दिखाया। ताकि स्वामी रामदेव सौदागर दिखे।
लेकिन सवाल यही है कि काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर कांग्रेस सकपकाई क्यों है? आखिर सरकार की मंशा क्या है। अब सरकार को अपनी नीति और नीयत दोनों साफ करनी होगी। वहीं कांग्रेस का आलम ऐसा है कि राहुल और सोनिया के अलावा हर नेता अपनी सीट के जुगाड़ तक ही सीमित दिखता है। जनता के साथ खड़े होने को कोई नेता नजर नहीं आता। इसे कांग्रेस की मज़बूरी कहें या गाँधी परिवार की खुद को राजनीति में जीवित रखने की कवायद, लेकिन हकीकत यहीं है कि जनता के लिए संघर्ष करने के नाम पर यही दोनों नजर आते हैं। बाकी तो शुतुर्गमुर्ग दिखते हैं। इसीलिए आम आदमी बाबा रामदेव की ओर देखने को मजबूर है।
सरकार तो शुरू से ही अड़ी थी कि स्वामी रामदेव आंदोलन शुरू ना करें। लेकिन स्वामी रामदेव के लिए मामला देश के स्वाभिमान का था। आम आदमी के विश्वास का था। जो बाबा में भरोसा करता है, जो हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके दिल्ली आने को बेकरार रहता है, जो देश को खुशहाली की राह पर ले जाना चाहता था। ऐसे में बाबा कैसे आम आदमी का भरोसा तोड़ते। लेकिन सरकार अड़ी थी, सत्याग्रह बाबा ना करें।
अन्ना हजारे का हश्र देखकर रामदेव भी सचेत रहे। उन्हें सरकार के पैंतरे पर पूरा भरोसा था, इसीलिए वो सरकार को एक भी मौका नहीं देना चाहते थे, कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर अपनी सफाई पेश कर सके। इसीलिए बातचीत भी करते रहे। बातचीत इसलिए भी, कि कहीं दिल्ली पुलिस फायर ब्रिगेड के क्लीरेंस या कोई और मुद्दा बना कर रामलीला मैदान पर बाबा के सत्याग्रह कार्यक्रम को रद्द ना कर दे। इसीलिए 4 जून आने तक सरकार से बातचीत का दौर चला। सरकार कोरे अश्वासन पर काम चला लेना चाहती थी। लेकिन बाबा अध्यादेश के जरिए कानून लाने की मांग पर अड़े रहे।
बाबा के आलोचक पूरे आंदोलन के लिए जुटाए जा रहे पैसे का हिसाब मांग रहे हैं। इसका जवाब है स्वामी रामदेव के फार्मेसी में हजारों लोगों ने अपने एक दिन की तनख्वाह दान में दी। लाखों लोग राष्ट्रीय स्वाभिमान ट्रस्ट के खाते में अपने नाम पते के साथ पैसे जमा कराती रही है। जिसका हिसाब किताब रखा जा रहा है। अगला सवाल हजार और पांच सौ रुपये के नोटों के प्रचलन को खत्म करने की प्रासंगिकता पर उठाया जा रहा है, जो बड़े लेन-देन के लिए जरुरी समझा जाता है। लेकिन इसका हल मोबाइल बैंकिग के जरिए खोजा जा सकता है। जिसका उदाहरण अमेरिका का अमरेला बैंक है। जहां से हर बड़े लेन-देन पर नजर रखी जाती है। जिससे अवैध तरीके से धन के आवागमन पर रोक लगाई जा सकती है।
ऐसे में अब सरकार को आगे आकर और कोरे वादों को भुलाकर अध्यादेश के जरिए कड़ा कानून तुरंत बनाना चाहिए। ताकि आम आदमी का लोकतंत्र में भरोसा बरकरार रह सकें। नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब ये जन आंदोलन जन क्रांति में बदल जाएगा।
लेखक प्रसून शुक्ला मैजिक टीवी के हेड ऑपरेशन हैं.












SANTOSH jain,raipur
June 6, 2011 at 5:35 am
Baba kepiche incometax/ED deptt ne sarkar ke prati vafadari dikhate huye turant karywahi suru kar di hai,lekin sawal ye hai ki ye deptt desh ke prati jawabdari kab dikhayenge?agar is baar chuk gaye to hamari aane wali santan ya to chor banne mazboor hongi ya satta ki chatukar,faisla hamare haath me hi hai,
khushveer mothsara
June 6, 2011 at 5:36 am
baba per ki gai karwahi atyant nindaniye hain.Is ghatana ne 1919 main ghatit jalianwal bagh ki ghatna ki yad dila di. prashasan aur dilli police ugarwadion per karwahi karne main to nakam rahta hain per nihathe logo per apni kheej zaroor utar leta. pakistan aur chine ke samne Bharat ki sarkar mimyane lagti hain aur apne admion ke virudh action kane main sher ban jati hain .Chidembram ne jab bhi naksaliyon ke virud kutch bhi bhola to unhone is ka jabab das bees police walaon ko uda kar diya.wahan to Chidmbram ka zor nahi chala .Dilli main rat ke waqt nihathe logo per unka dav zaroor bath gaya.Chidmbram, Sibble,digvijay jaisie log he Congress ki aisi tesi karwa ke dum lenge.
shailu parashar
June 6, 2011 at 7:13 am
sir,
apne sach hi kaha h ki ab wo din dur nahi jab a andolan hinsatmak ho jayega aj sabhi a hi chahte h abti bahut ho gaya rajniti or rajnetyo ne kar liye bahut atyachar janta bhi ub chuki h es brastachar bhari jindgi se ab khushal raj banane k liye jo sab chahte the wo aj baba ramdev ji ne kar dikhya……………..
Maahi
June 6, 2011 at 9:25 am
Sibbu
Diggi
Chiddu
yeh tino chor hai Sonia k talwe chatne wale
saurabh singh
June 6, 2011 at 2:57 pm
पहली बात की यह सारी बात कांग्रेस की फैलाई है आप गौर से देखिये वो चप्पल पहने था और वो पास जाकर 1 मिनट खड़ा रहा अगर वोह मारना चाहता तो कम से कम १० चप्पल तो जरूर रसीद कर सकता था क्या यह झूठ है और सारी प्रिंट मीडिया के साथ इलेक्ट्रोनिक मीडिया बिक गयी है क्या कोई जवाब दे सकता है की आज के पेपर में और परसों शाम से इतने बड़े बड़े सरकार के प्रचार क्यों आ रहे हैं सिर्फ मीडिया को खरीदने के लिए और वो बिक चुकी है हमारा विश्वास उठ चूका है देश का चौथा खम्भा भी भ्रष्ट हो चूका है अगर आप ऐसा ही करेंगे तो क्या कोई सरकार के खिलाफ आवाज उठा सकेगा नहीं कभी नहीं
धीरेन्द्र
June 6, 2011 at 5:08 pm
आपने बहुत अच्छा लिखा है… रामदेव जी के पीछे अब ही क्यों पड़े हैं, पहले यह सब क्यों नहीं देखा..
sunil
June 6, 2011 at 6:32 pm
bahai ab to sochana hi padedega ki ajadi galat tarike se le gayi, agar ajad ji ke raste se liy gayi hote to Bharat na jane khan hota, abhi to agrejo ki IPC code hi chal rahi hai, jisme sadak per chlene walo ko bhi bandi bana sakte hai baba ji ki to aukat hi kya hai, ab baba ka shath thekar in kale agrejo se mukti pane ka samay hai, ye sab sale teen sal ke mehman hai, inko apene vote bank se aor videshi nari se matlab hai bus,
prithvi Lok Newspaper
June 7, 2011 at 7:15 am
lagta sarkar main hi bo sare log hai jo is satyagreh ko nahi hone dena chahte bharstachar nai apni jade itni majboot kar li hai kya? sarkar ne to angreji hukumat ko bhi chhod diya jo rat ke andhere main is tera ka kaam kiya.