इंदौर समेत देश के 14 राज्यों के 125 से ज्यादा स्थानों पर फैले डीजी केबल नेटवर्क में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की शिकायत के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच तेज कर दी है. तीन लोगों को हिरासत में लेने के बाद क्राइम ब्रांच महिपाल सिंह रावत और उसके खासमखास मनोहर वर्मा की तलाश तेज कर दी है. इसके पहले पुलिस मुंबई से तीन आरोपियों राजेश सोनी, तरेंद्र सिंह और सचिन धूपड़ को हिरासत में लिया था.
प्रारंभिक जांच में पांच करोड़ की गड़बड़ी का मामला सामने आया है. कंपनी प्रबंधन ने महिपाल सिंह रावत और सचिन धूपड़ के 2007 से 2011 के बीच की गई फाइनेंसियल डिलिंग के पन्ने भी खंगालना शुरू कर दिया है. कंपनी प्रबंधन के सूत्रों की माने तो रावत-धूपड़ एव वर्मा की तिकड़ी के बाद इनके खासमखास रहे हरीश फतेहचंदानी और राकेश व्यास भी निशाने पर हैं. इन लोगों के खिलाफ जांच कराई जाएगी. इधर, क्राइम ब्रांच महिपाल सिंह एवं मनोहर वर्मा की तलाश में कई ठिकानों को खंगाल रही है.
मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों की माने तो नेशनल ऑपरेशन हेड महिपाल सिंह रावत एवं नेशनल सेल्स हेड सचिन धूपड़ ने गुण्डों की भर्ती करके केबल ऑपरेटर एवं उपभोक्ताओं से अतिरिक्त वसूली शुरू कर दी थी. इस मामले का खुलासा होने तथा प्रबंधन की तरफ से इन लोगों को नोटिस दिए जाने के बाद इन्होंने एमडी-सीईओ जेएस कोहली एवं ज्वाइंट एमडी योगेश शाह को मामला रफा दफा करने तथा जान से मारने की धमकी भी दी, जिसके बाद प्रबंधन ने मामला दर्ज कराया.
गिरफ्तारी के बाद सचिन धूपड़ ने सीने में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस मामले में क्राइम ब्रांच अभी सचिन धूपड़ से पूछताछ नहीं कर पाई है. गौरतलब है कि डीजी केबल प्रबंधन ने करोड़ों का घोटाला सामने आने के बाद कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था तथा दस वरिष्ठों समेत 140 लोगों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इस मामले में महिपाल सिंह रावत एवं सचिन धूपड़ को मुख्य आरोपी बनाया गया है.











