देश कश्मीरियों के दर्द को समझे : महबूबा मुफ्ती

: आल पार्टी डेलीगेशन के घाटी में जाने से हालात बेहतर होंगे : उमर अब्दुल्ला सुशासन देने में नाकामयाब रहे : नई दिल्ली- पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि कश्मीर में मार्शल ला जैसे हालात बने हुए हैं। वहां पर सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। मुल्क को कश्मीरियों के दर्द को समझना होगा। कश्मीर विधान सभा में विपक्ष की नेता महबूबा मुफ्ती ने अनुराधा प्रसाद के साथ न्यूज 24 चैनल के चर्चित कार्यक्रम ‘आमने-सामने’ के लिए दिए गए साक्षात्कार में कहा कि कश्मीरियों के जख्मों पर मरहम लगाने की जरूरत है।

महबूबा मुफ्ती, जिनकी छवि जुझारू नेता की है, की आंखों से आसुंओं की अविरल धारा बहने लगी, जब वे उस अभागे पिता के दर्द को सुना रही थीं जिसके पुत्र की पुलिस गोलीबारी में मौत हो गई थी। भीगी आंखों को पोछते हुए वह बताने लगीं, ‘जब वह शख्स अपने पुत्र को अंतिम संस्कार के लिए लेकर जा रहा था तब उस बच्चे के मुंह में टॉफी थी। देश को कश्मीरियों की तकलीफों को महसूस करना होगा। उनके दर्द को अपना समझना होगा। उनका दर्द और हमारा दर्द अलग-अलग नहीं हो सकता।’

उन्होंने उस घटना की याद दिलाया, जब कानपुर में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के दौरे के दौरान पुलिस की तरफ से सड़कों पर लगाए गए अवरोधों के कारण एक बीमार व्यक्ति की जान चली गई थी, क्योंकि उसे वक्त पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका था। उस घटना की जांच करने की जिम्मेदारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कानपुर से सांसद श्रीप्रकाश जायसवाल को सौंपी थी।

उन्‍होंने सवाल किया, ‘कानपुर वाली घटना पर तो इतनी संवेदनशीलता पर कश्मीर को लेकर कोई भावना क्‍यों नहीं।’  क्या वे मानती हैं कि आल पार्टी डेलीगेशन के कश्मीर में जाने और वहां के सूरते-हाल को जानने के बाद वहां पर हालातों को सुधारने में मदद मिलेगी? महबूबा ने कहा, ‘बेशक। मैं मानती हूं कि यह एक बेहतर शुरूआत है। डेलीगेशन के कुछ सदस्यों का पृथकतावादियों से मिलना अपने आप में बहुत सकारात्मक माना जा सकता है। इस प्रक्रिया को जारी रखने की जरूरत है।’

डेलीगेशन के कुछ सदस्यों के पृथकतावादियों से मुलाकात करने के कारण पैदा हुए विवाद पर पूछे गए एक सवाल पर महबूबा मुफ्ती का कहना था कि जब राज्य की जनता सरकारी नीतियों से खफा होती है, तब पृथकतावादियों को भी सख्त रवैया अपनाना पड़ता है। वे मानती हैं कि पृथकतावादियों से बात करने में कतई कोई बुराई नहीं है। ‘मैं तो मानती हूं कि आल पार्टी डेलीगेशन के कश्मीर में जाने से फायदा ही होगा।’

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का समर्थन करने की अपील पर कुछ तल्ख अंदाज में महबूबा मुफ्ती कहने लगीं, ‘राहुल गांधी ही नहीं बल्कि पूरा मुल्क उमर साहब का साथ दे रहा है, पर वे कश्मीर को बेहतर सरकार और सुशासन देने में नाकामयाब रहे हैं। वे सूबे के अवाम से दूर हो गए हैं।’ घाटी के मौजूदा हालातों के लिए उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस की मिली जुली सरकार पर हल्ला बोलते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हमारी सरकार की तरफ से किए गए बेहतर काम को आगे नहीं बढ़ा सके।

हमारी सरकार ने जनता के दुख-दर्द सुनने शुरू किए थे। उनके मसलों को हल करना चालू किया था। उस दौर में सुरक्षा बल भी सीमाओं में रहकर काम कर रहे थे। हमारी सरकार की तरफ से बेहतर बनाए गए माहौल के चलते ही 2008 के राज्य विधान सभा के चुनावों में 60 फीसदी अवाम ने मतदान किया था। क्या कश्मीर में कांग्रेस-पीडीपी की मिली-जुली सरकार बनाने की कवायद जारी है ? महबूबा ने कहा, ‘मैं मानती हूं कि कश्मीर में सत्ता के हस्तांतरण से बात नहीं बनेगी। हालात बहुत बिगड़ चुके हैं। हालांकि मेरा कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी जी से बहुत मधुर रिश्ते हैं, पर इन खबरों में दूर-दूर तक कोई सच्चाई नहीं है कि कश्मीर में पीडीपी-कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनाने की प्रक्रिया चल रही है।’

और आखिर में एक सवाल के जवाब में कश्मीर की इस प्रखर नेता ने रहस्योदघाटन किया कि उनका सियासत के मैदान में आने का कोई इरादा नहीं था। उन्हें हालातों के चलते राजनीति में आना पड़ा। ‘उनकी पार्टी को साल 1996 के विधान सभा चुनावों में बिजवरा सीट के लिए कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिल रहा था, तब मेरे नाम को आगे कर दिया गया। बस, इस तरह से मैं आ गई राजनीति में।’   प्रेस विज्ञप्ति

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Comments on “देश कश्मीरियों के दर्द को समझे : महबूबा मुफ्ती

  • महबूबा तो रंडी है। इसका कोई ईमान धर्म थोड़ी है। खुद यह और इसके बाप की पार्टी अलगाववादियों को सर्वाधिक प्रोत्साहन दे रही है। इसके रोने में ढोंग है। एक बच्चा मर गया तो यह कुतिया रोती है। आतंकवादी रोज हमले करते हैं, पाकपरस्तों के हमले में रोज देश के ही बच्चे मरते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ये बच्चे बड़े हैं, देश की सुरक्षा की शपथ लेकर मर रहे हैं। देश की अस्मिता को बचाने के लिए मर रहे हैं, इसे बिखरने से रोकने की कवायद में मर रहे हैं। मारने और मरवाने वाले इसके वे ही आतंकी खसम हैं, जिन्हें इस एक दोकौड़ी की देशघाती की जान बचाने के बदले में कभी रिहा किया गया था। यह खुद पाकपरस्त है, देश के टुकड़े चाहती है। आतंकी इसके घरपर दावत करते हैं। अलगाववादियों की यह सबसे प्रखर प्रवक्ता है। यह तो देशद्रोही है, राजनीति में इस जैसी ओछी औरतें सफल रहती हैं, इसलिए आती हैं। यह सत्ता में आई भी थी, तो अलगाववादियों के सहयोग से ही। इसका जो भरोसा करे, वो परले सिरे का मूर्ख। और जो इसके आंसुओं पर जाएगा, वह जल्द ही धोखा खाएगा। इसको तो पाकिस्तानियों ने यह नौटंकी करने को कही होगी, तो रो रही है।

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  • rajesh kumar says:

    i fully agree with what ajay has written….i fail to understand why indian news channels interview separatists like mehbooba mufti in first place…..hope anuradha prasad will mind the choice of her guests in future

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