दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक चुप नहीं बैठेंगे लखनऊ के पत्रकार

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के आह्वान पर आज यहाँ राजधानी लखनऊ के सैकड़ों पत्रकारों एवं मीडियाकर्मियों ने पुलिस ज्यादतियों के विरोध में एकजुटता प्रदर्शित करने तथा उनको समुचित सुरक्षा देने के लिए आवश्यक कानून बनाने की माँग को लेकर यूपी प्रेस क्लब से गाँधी प्रतिमा हजरतगंज तक शान्तिपूर्ण मौन विरोध जुलूस निकाला जो गाँधी प्रतिमा पर पहुँच कर विशाल सभा में बदल गया।

सभा में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के मार्ग में आने वाली बाधाओं व चुनौतियों का डटकर मुकाबला करने का संकल्प लिया गया। जुलूस का नेतृत्व समिति की प्रोफशनल अफेयर्स कमेटी के संयोजक शरत प्रधान, उपाध्यक्ष मुदित माथुर, महासचिव डा.योगेश मिश्र, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र शुक्ल, कार्यकारिणी के सदस्य, दिलीप सिन्हा, रूचि कुमार, नीरज श्रीवास्तव, सुरेन्द्र सिंह, निजाम अंसारी, उप्र प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष रामदत्त त्रिपाठी, उप्र जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री सर्वेश कुमार सिंह, अजय कुमार, लखनऊ जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मिश्र,  इलेक्ट्रॉनिक चैनल के वरिष्ठ पत्रकार सत्यवीर सिंह ने किया।

गाँधी प्रतिमा परिसर में सभा को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान ने कहा कि लखनऊ के पत्रकारों ने जिस प्रकार से एकजुटता का परिचय दिया उसी का नतीजा था कि रात 2 बजे गृह विभाग खुलवा कर आईबीएन-7 के शलभमणि त्रिपाठी तथा मनोज राजन त्रिपाठी के साथ गत 26 जून को हजरतगंज में अभद्रता एवं दुर्व्यवहार करने के दोषी एसपी सिटी (पूर्वी) बीपी अशोक तथा सर्किल अफसर अनूप कुमार का तत्परता के साथ निलम्बन आदेश रातों रात जारी हुआ और इन पत्रकारों के विरूद्ध झूठे मामले में फँसाने की कोशिश के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। हमें इस एकता को बरकरार रखना है और इस बात का ख्याल रखना है कि कभी किसी छोटे अखबार के पत्रकार के साथ ऐसी घटना घटे तो भी हम सब इसी एकता और जज़्बे के साथ विरोध करने को आगे आएं।

उपाध्यक्ष मुदित माथुर तथा उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सदस्य दिलीप कुमार सिन्हा ने सभी पत्रकारों से एकजुटता बनाए रखने की अपील की ताकि पत्रकारों को समाचार संकलन के लिए ज़रूरी महौल व सुविधाओं के लिए सरकार पर दबाव बने और वेजबोर्ड जैसे मुद्दों पर भी संगठित संघर्ष की रणनीति बन सके। सभा में टाइम्स ऑफ इन्डिया के संवाददाता को मिली धमकियों पर भी सरकार से तत्परता के साथ कार्रवाई करने की मांग की गयी। समिति के सचिव योगेश मिश्र ने सभा में उपस्थित समस्त पत्रकारों व मीडियाकर्मियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आईबीएन-7 के ब्यूरोचीफ ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप सबके स्नेह और सहयोग की वजह से गुनाहगार पुलिस अफसरों को सजा मिली है। खुशी की बात है कि तेज बरसात में निकले जुलूस में सम्मिलित होकर आप सबने एकजुट हो कर मेरा हौसला बढ़ाया। बीबीसी के रामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि यूपी प्रेस क्लब में एकत्र हम सभी पत्रकार आईबीएन-7  के ब्यूरोचीफ शलभ मणि त्रिपाठी और मनोज राजन त्रिपाठी एवं उनके सहयोगियों के साथ रविवार की रात हजरतगंज में पुलिस के दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किये गए दुर्व्यवहार, मारपीट और अवैध हिरासत की घटना से आहत हैं। इस अमानवीय घटना ने हम सभी पत्रकारों को झकझोर दिया है। हमें इस बात का संतोष है कि शासन ने इस मामले में दोषी दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और थाने में रपट लिख ली गयी है। लेकिन यह मात्र प्रारंभिक कदम है। हम सब यह भी जानते हैं कि निलंबन कोई दंड नही है।

उन्‍होंने कहा कि दंड के लिए विभागीय जांच के बाद ही कार्यवाही हो सकती है। इसी तरह रपट पर आगे की कार्यवाही पुलिस विवेचना पर निर्भर करती है। इसलिए हम सब संकल्प लेते हैं कि इस मामले में वैधानिक तरीके से सभी कार्यवाही पूरी होने और दोषियों को समुचित सजा दिलाने के लिए हम अपनी सजगता और एकजुटता बनाए रखेंगे। यही आज के जुलूस और प्रदर्शन का हम सब पत्रकार बन्धुओं का मुख्य उद्देश्य है। इस मौके पर हम यह भी रेखांकित करना चाहते हैं कि पिछले कुछ सालों से उत्तर प्रदेश और राजधानी लखनऊ में समाचार संकलन और प्रकाशन – प्रसारण में तरह- तरह की परोक्ष और अपरोक्ष रुकावटें डाली जा रही हैं। यह एक स्वस्थ लोकतान्त्रिक समाज व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। हम उम्मीद करते हैं कि व्यवस्था संचालन करने वाले लोग इस बात की गंभीरता को महसूस करेंगे और भविष्य में इन रुकावटों से बाज आयेंगे।

दूसरी तरफ देहरादून के पत्रकारों ने भी लखनउ में आईबीएन-7 न्यूज चैनल के यूपी हेड शलभमणि त्रिपाठी व मनोज राजन त्रिपाठी पर हुए पुलिसिया हमले के निंदा करते हुए विभिन्न पत्रकार संगठनों ने देहरादून स्थित मीडिया सेंटर में बैठक की। बैठक में सभी पत्रकारों ने शलभमणि त्रिपाठी व मनोज राजन त्रिपाठी पर हुए हमले की घोर भर्त्सना करते हुए हमले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। ताकि इस घटना के लिए परदे के पीछे शामिल लोगों को बेनकाब किया जा सके। बैठक में पत्रकारों पर आए दिन हो रहे हमलों पर चिंता जताते हुए कहा कि पत्रकारों का उत्पीड़न अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस संबध में एक एक्शन कमेटी बनायी जायेगी जो पत्रकार उत्पीड़न के मामलों पर त्वरित कार्रवाई कर सके।

बैठक में पत्रकार संजीव शर्मा, विश्वजीत नेगी, गिरीश पंत, विनोद कुमार, नरेश तोमर, कमल शर्मा, अतुल चौहान, वीरेंद्र नेगी, किशोर अरोड़ा, राजेंद्र सिंह नेगी, राकेश जेटली, प्रदीप रावत, ऋषि शुक्ला, एसएम आसिम, किशोर रावत, अधीर यादव, अनिल वर्मा, सोमपाल, कैलाश जोशी, राजेश वर्मा, अफजाल अहमद, इलियास अहमद, ठाकुर सुक्खन सिंह, रितेश फरस्वाण, दिलीप सिंह बिष्ट, अजय कुमार, दरबान सिंह रावत आदि उपस्थित थे।

वहीं झांसी में आईबीएन-7 के पत्रकारों पर हुए पुलिसिया हमले के विरोध में झाँसी के पत्रकारों ने डीएम कार्यालय परिसर में धरना देकर एसडीएम को प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिस में कहा गया कि हमलावर पुलिस कर्मियों के विरुद्ध धारा 363,366, रिपोर्ट में बढ़ाई जाए और शीघ्र ही आरोपी पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए। धरने के दौरान जागरण के पत्रकार रामकुमार साहू ने कहा कि पुलिसिया उत्पीड़न बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा इंडिया टीवी के झाँसी सहयोगी पत्रकार नंदकिशोर ने कहा कि जब से मायावती की सरकार प्रदेश में बनी तभी से प्रशासनिक अधिकारी पत्रकारों का शोषण करने में जुटे हैं। प्रसाशन की ऐसी मानसिकता किसी तानाशाह से कम नहीं है। ऐसी सरकार के विरुद्ध और ओछी मानसिकता वाले अधिकारियों के विरुद्ध पत्रकारों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

आईबीएन- 7 के पत्रकार शकील अली हाश्मी ने कहा कि इस घटना से प्रदेश सरकार की नीयत और नीति उजागर हो चुकी है। यह सरकार प्रदेश की जनता का पुलिस के दौरा दमन करवाने से पीछे नहीं हटती। भट्टा परसौल का लाठीचार्ज एक उदाहरण है। माया शासन में हो रहे गंभीर अपराधों को दिखाए जाने और उजागर किये जा रहे खुलासों से बौखलाई प्रदेश सरकार ने पुलिस से पत्रकारों पर जो हमला करवाया वो बहुत ही निंदनीय है। इस मौके पर स्टार न्यूज़ के पत्रकार चंद्रकांत यादव, इंडिया टीवी के पत्रकार सुशील चौबे, जी न्यूज़ उत्तर प्रदेश के अब्दुल सत्तार, हिन्दुस्तान के पत्रकार राकेश यादव, जनता यूनियन के सम्पादक शैलेन्द्र गौड़, दैनिक जागरण के पत्रकार दीपक चंदेल, आज के पत्रकार श्‍लोक यादव, ईटीवी के लक्ष्मी नारायण शर्मा, एनडीटीवी से विनोद कुमार गौतम, जनसंदेश से अमित वर्मा, पी 7 से अनिल कुमार तिवारी, न्यूज़ 24 से असद खान के अलावा दर्जनों पत्रकारों ने डीएम कार्यालय पर धरना दिया और सभी ने उत्तर प्रदेश सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की ।

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Comments on “दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने तक चुप नहीं बैठेंगे लखनऊ के पत्रकार

  • santosh kushwaha says:

    yaar yaswant bhai farji khabre lagakar kya ab kaam chalaoge kal main khud pradarshan me tha, muskil se 50-60 loge hi the, aur aap jo likh rahe ho ki sabhee logo ne bhasad diya bilkul jhoot hai, waha kul 2 min. sarad bole, salabh to waha se chup-chap khishak liye is pradarshan mian sahi pucho to chote news paper ke hi patrakar the, bhai khabar likhne se pahle sach ko jaan liya karo. varna wevsite ki bachi-khuchi ijjat bhi chali jayegi

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