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पत्रकार तो नोटो का जुगाड़ है!

मध्यप्रदेश के राजस्व, धर्मस्व एवं पुनर्वास मंत्री करण सिंह वर्मा ने हरदा जिले में 5 जनवरी की रात 11 बजकर 35 मिनट पर राजस्व अधिकारियों की बैठक ली। यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली। दिन में होने वाली बैठक एक ट्रेन के बिलंब से आने के कारण देर रात में हुई। राजस्वमंत्री द्वारा देर रात में बैठक लेने का निर्णय समझ से परे रहा। पत्रकारों ने जब मंत्री जी से देर रात बैठक लेने का कारण पूछा तो वह भड़क उठे। पत्रकारों से सवाल जबाव के दौरान उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि पत्रकार तो नोटों का जुगाड़ है। यह सुनते ही पत्रकार नाराज हो गए, मौके की स्थिति को देखते ही मंत्री जी ने तत्काल अपना बयान बदला और कहा कि पत्रकारों को वह अपना मित्र मानते हैं।

मध्यप्रदेश के राजस्व, धर्मस्व एवं पुनर्वास मंत्री करण सिंह वर्मा ने हरदा जिले में 5 जनवरी की रात 11 बजकर 35 मिनट पर राजस्व अधिकारियों की बैठक ली। यह बैठक करीब 40 मिनट तक चली। दिन में होने वाली बैठक एक ट्रेन के बिलंब से आने के कारण देर रात में हुई। राजस्वमंत्री द्वारा देर रात में बैठक लेने का निर्णय समझ से परे रहा। पत्रकारों ने जब मंत्री जी से देर रात बैठक लेने का कारण पूछा तो वह भड़क उठे। पत्रकारों से सवाल जबाव के दौरान उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि पत्रकार तो नोटों का जुगाड़ है। यह सुनते ही पत्रकार नाराज हो गए, मौके की स्थिति को देखते ही मंत्री जी ने तत्काल अपना बयान बदला और कहा कि पत्रकारों को वह अपना मित्र मानते हैं।

कई सवाल खड़े हुए : देर से आने का कारण भी समझ में नहीं आया, बल्कि कई सवाल भी खड़े हुए। पहला सवाल की हरदा आने के लिए भोपाल से महज 3 घंटे का समय लगता है, ऐसे में मंत्री जी कार से क्यों नहीं आए? दूसरा सवाल जब पठानकोट एक्सप्रेस बिलंब से आने की सूचना पूर्व में ही मिल चुकी थी, तो दूसरी ट्रेन से क्यों नहीं आए? तीसरा सवाल जब पूरे देश में कड़ाके की ठंड थी, तब रात में बैठक लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी? मंत्री जी के बयान की जिले भर के पत्रकारों ने कड़े शब्दों में निंदा की है। श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि मंत्री श्री वर्मा ने सम्पूर्ण पत्रकारों का अपमान किया है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.

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0 Comments

  1. yashovardhan nayak

    January 10, 2011 at 11:28 am

    हरदा जिले के एक पूर्व मंत्री है,कमल पटेल वे जेल से बचने के कई जतन करते रहे, इसी तरह के बडबोले थे. मंत्री जी आप पत्रकारों को वो फार्मूला तो बताओ जिससे एक विधायक चुने जाने के बाद सीधा लखपति हो जाता है. साईकिल से सीधा सफारी(टाटा की गाड़ी) पर आ जाता है. मंत्री बनने पर तो वारे-न्यारे हो जाते है. पत्रकार तो खुद आत्मनिरीक्षण कर रहे है,पेड़ न्यूज और पलेर पत्रकारिता कैसे रोकी जाये? पर मंत्री जी आप उस समय खामोश रहे ,जब विधायको ने सुर में रहकर वेतन-भत्ते मनमाने ढ़ंग से विधानसभा में पारित करा लिए. आप शिवराज जी को सलाह दो कि वे नीतीश कुमार की तरह “विधायक-निधि को ख़त्म करे”. क्योकि यह निधि ही “ले कमीशन और दे कमीशन संस्कृति” कि जनक है. यशोवर्धन नायक टीकमगढ़ (मध्य-प्रदेश)

  2. indra kumar shukla

    January 7, 2011 at 3:38 pm

    मंत्री जी का कहना सच था दरअसल मंत्री जी कह रहे थे “राजस्व मीटिंग तो नोटों की जुगाड़ है” परन्तु पत्रकारों ने गलत सुन लिया ! इसमें मंत्री जी गलत कहा है ! इन्द्र कुमार शुक्ला संपादक वेब न्यूज़ ऑफ़ इंडिया भोपाल [म.प्र .]

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