पशु तस्‍करी को लेकर विवाद, सीओ सिटी और पत्रकार हुए आमने-सामने

देवरिया। देवरिया जिले के मुख्यालय पर पत्रकारों की भारी तादाद है। लगभग सभी छोटे-बड़े अखबारों एवं टीवी चैनलों के असली एवं नकली पत्रकार यहां पाये जाते हैं। इनमें से कुछ पत्रकार अपने-अपने अखबारों की नौकरी करते हुए अपना व अपने परिवार का पेट पालते है। उन्हें समाज से कोई लेना देना नहीं होता है। वे तटस्थ भाव में सदैव बने रहतें हैं।

कुछ पत्रकार दिन भर अधिकारियों की चौखट पर अपनी दुम को रगड़ा करते हैं। उन्हें पत्रकारिता व पत्रकारों से कोई लेना देना नहीं होता है। बस अखबार का पट्टा गले में लटका कर कुत्तों की तरह से यहां-वहां अधिकारियों के आवास व कार्यालय को सूंघते फिरते है। लेकिन बीते शनिवार को एक ऐसी घटना घट गयी जिससे पुलिस प्रशासन एवं पत्रकारों के बीच यहां कोल्ड वार छिड़ गया है।

मामला है एक सामाजिक कार्यकर्ता बृजेश कुमार मिश्र का, जो पहले देवरिया जिला पंचायत में कर इन्सपेक्टर के पद पर तैनात थे। लेकिन वहां नेतागिरी करते थे। जिसके कारण उनका जिला पंचायत के अधिकारियों से जम नहीं पाया। उन्होंने जिला पंचायत से वीआरएस ले लिया। फिर वे समूचे उत्तर प्रदेश के जिला पंचायत के कर्मचारियों के अध्यक्ष बन गये और कर्मचारी नेता के रूप में पहचाने जाने लगे। कुछ दिनों पूर्व ये कांग्रेस पार्टी की तरफ से आरटीआई एक्ट के कार्यकर्ता बन कर समाज सेवा का काम करने लगे हैं।

इन्हीं बृजेश मिश्रा को शनिवार को कुछ लोगों से सूचना मिली कि कुछ पशु तस्कर ट्रकों से दुधारू गाय-भैसों का तस्करी करते हुए देवरिया जिले से बाराबंकी जिले की तरफ जा रहे हैं। सूचना मिलने पर श्री मिश्र अपने एकाध पत्रकार साथियों के साथ देवरिया शहर के सुभाष चौक पर जा खड़े हुए और करीब छह ट्रकों को, जिस पर पशु लदे थे, रोक लिया और पुलिस कप्तान डीके चौधरी को इसकी जानकारी दी। पुलिस कप्तान ने सीओ सिटी डीके पुरी को मौके पर भेजा। थोड़ी देर बाद वहां एसडीएम सदर अजय कान्त सैनी भी पहुंच गये।

बकौल श्री मिश्र सीओ सिटी को पशु तस्कर ने ट्रक छोड़ने के एवज में एक मोटी रकम दी और साथ ही किसी बसपा के नेता से बात करायी। जिसका परिणाम यह रहा कि सीओ सिटी ने ससम्मान पशु तस्कर को ट्रकों सहित छोड़ दिया और श्री मिश्र को कोतवाली थाने लाकर पहले उनका मोबाइल को अपने कब्जे में कर लिया तथा बाद में उनकी जम कर मां-बहन एक की तथा हाथ, लात, घूसों, थप्पड़ों से भी सेवा की। यही नहीं सीओ सिटी ने श्री मिश्र के साथ अपराधियों की तरह से बर्ताव किया तथा यह ताकीद की कि भविष्य में कभी भी किसी पशु तस्कर की ट्रक को रोकने की कोशिश न करना। इस बारे में श्री मिश्र का यह भी कहना है कि करीब दो घण्टे तक कोतवाली थाने में सीओ सिटी ने उनको प्रताड़ित किया तथा 26 हजार रुपया और कुछ जरूरी कागजात भी छिन लिया।

अगले दिन अर्थात रविवार को स्थानीय समाचार पत्रों ने पशु तस्करी की घटना के बारे में खबर छापी। कुछ ने फोटो भी छापे। सभी पत्रकारों ने श्री मिश्र की अपने-अपने अखबारों में प्रशंसा की थी। मगर किसी पत्रकार को यह पता नहीं था कि सुभाष चौक से जाने के बाद श्री मिश्र के साथ क्या हुआ। मात्र एक पत्रकार सहारा समय के संजय सिंह को छोड़कर। क्योंकि रात के करीब दस बजे उन्हों ने होटल रेनुका इन में एक पूर्व रिटायर्ड पुलिस अधिकारी बीबी सिंह के साथ डिनर लेते वक्त अपने मोबाइल फोन से ही पुलिस के तमाम आला अधिकारियों तक इस बिगड़ैल सीओ सिटी डीके पुरी की शिकायत कर दी थी।

खैर अगले दिन अर्थात रविवार को श्री मिश्र ने अपने अखबार साथियों जैसे हिन्दुस्तान के उमेश शुक्ल, जनमोर्चा के सुधाकर त्रिपाठी, अमृत प्रभात के राबी शुक्ला, आईबीएन सेवन के संदीप तिवारी, पीटीआई एवं नईदुनिया के पत्रकार ओपी श्रीवास्तव, स्वतंत्र भारत के तरूण मणि आदि के साथ बीती रात की घटना का जिक्र करते हुए अपना दुखड़ा रो-रो कर सुनाया तथा बताया कि पुलिस थाने में सीओ सिटी ने पत्रकारों को भी खूब गालियां दी है। उन्होंने टीवी चैनल सहारा समय के पत्रकार का नाम प्रमुखता से लिया। जंगल में आग की तरह से पत्रकारों के बीच यह खबर फैल गयी और थोड़ी ही देर में श्री मिश्र के नई कालोनी स्थित उनके आवास पर करीब दो दर्जन पत्रकार एकत्रित हो गये। उसी दौरान श्री मिश्र ने एक प्रेस वार्ता कर सीओ सिटी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और मांग पूरी ने होने पर आमरण अनशन करने की चेतावनी दी।

सबसे मजेदार बात यह हुयी कि जिस समय श्री मिश्र पत्रकारों के साथ अपने आवास पर वार्ता कर रहे थे उसी समय थाना कोतवाली के जांबाज कोतवाल विजय शंकर तिवारी मय हमराहियों के साथ सरकारी जीप पर सवार होकर पत्रकारों के बीच पहुंच गये उनके साथ कुछ दरोगा और सिपाही भी थे। वे सीओ सिटी के हिमायती बनकर श्री मिश्र को पत्रकारों के सामने ही मैनेज करने में लग गये। जिससे वहां उपस्थित पत्रकारों में कोतवाल की भूमिका को लेकर नाराजगी फैल गयी। यहां तक कि कुछ पत्रकारों के साथ कोतवाल के साथ नोंक झोक भी हो गयी। बहरहाल कोतवाल साहब पत्रकार वार्ता से अपमानित होकर चले गये। कोतवाल के जाने के बाद पत्रकारों ने अगले दिन अर्थात सोमवार को मणडलायुक्त और आईजी गोरखपुर से मिलकर मनबढ़ सीओ सिटी डीके पुरी को देवरिया से हटाने के लिए बातचीत करने तथा मिलने की रणनीति बनायी।

लेकिन जैसा कि कहा जाता है हर वर्ग में और हर समय एक जयचन्द जरूर हुआ करते हैं। यहां भी ऐसा ही हुआ। कुछ जयचन्द टाइप के पत्रकारों को इस बात की भनक लग गयी कि कुछ पत्रकार गोरखपुर जाकर आईजी और कमिश्नर से इस मामले में मिलने वाले है। वे जयचन्दी पत्रकार सोमवार की अल सुबह सीओ सिटी डीके पुरी के आवास पर पहुंच गये और इस बात का ठेका ले लिया कि वह नाराज पत्रकारों तथा बृजेश मिश्र को मना लेंगे तथा मामले को निपटा देंगे। जयचंदी पत्रकारों ने एक योजना के तहत पीडब्ल्‍यूडी के डाक बंगले में सीओ सिटी को बुलवा लिया तथा कुछ दूसरे पत्रकारों के साथ उनकी समझौता वार्ता भी करा दिया।

उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए नवागत जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्‍कर यशोद एवं पुलिस अधीक्षक ने सीओ सिटी डीके पुरी की क्लास ली है तथा डीके पुरी को दो दिन के अवकाश पर भेज दिया है। इस मामले में एसडीएम सदर अजय कान्त सैनी का भी मानना है कि उस दिन सीओ सिटी ने श्री मिश्र को थाने में ले जाकर गलत काम किया। कोतवाली थाने के मातहत पुलिस कर्मियों ने भी सीओ सिटी श्री पुरी के कार्यप्रणाली की निन्दा की और पूर्व के सीओ सिटी राजकुमार मिश्र की यादों को ताजा की।

बकौल श्री मिश्र देवरिया के कुछ पत्रकार तो पुलिस से उसकी हत्या भी करवा सकते हैं। इस लिए उन्हों ने अपने साथ हुए हादसे की शिकायत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवरिया के न्यायालय में आईपीसी की धारा 156 (3) में करते हुए न्याय पाने की प्रत्याशा में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। लेकिन पत्रकार बनाम पुलिस की इस लड़ाई में जहां अधिकांश पत्रकार सीओ सिटी के व्यवहार से अत्यन्त दुखी हैं वहीं कुछ जयचन्द टाइपिया पत्रकार पुलिस से अपनी हमदर्दी जताकर पत्रकारिता की पीठ में छूरा घोंपने का काम कर रहे है। वे श्री मिश्र द्वारा पशु तस्करी के ट्रकों को रोकने की ही गलत ठहराते हुए श्री मिश्र एवं पत्रकारों को दोषी तथा सीओ सिटी को उचित ठहराते हुए पत्रकारों को ही गालियां दे रहे हैं।

Comments on “पशु तस्‍करी को लेकर विवाद, सीओ सिटी और पत्रकार हुए आमने-सामने

  • R.Chaudhary says:

    deoria me ek TPT sahab hain jo apne ko sab electronic media ke patrakaron ka guru kahte hain, id dino pure jile ke sabse bade dalal type ke patrakar wahi hai, bhale hi unko kuch likhna padhna aur news sense ke naam par kuch na ata ho par hekadi kabhi kam nahi hoti. apne ek mitra ke sahyog se unko desh ke 2 bade news channelo me kaam karne ka mauka mila par aaj wah usi ko gali dete hain. pahle wale channel se isi dalali ke karan unko nikal diya gaya aur ab dusre se bhi hataye jane ki baari hai. unke kuch sahyogi, jinke sahare TPT bhai ki patrakarita chalti thi, aaj jab unse work me aage nikal gaye aur achha banner mil gaya, aur unko khabro me maat dene lage to TPT bhai ne ab un patrakaro ko nicha dikhane ke liye is tarah ki harkete suru kar di hai.. TPT bhai se ek gujarish hai ki ab jaychandi ko chodo aur kuch kaam karke dikhao warna ek din agar un hi halat rahe to koi puchne wala bhi nahi rahega.

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