अपनी गाड़ी पर प्रेस लिख कर पुलिस पर धौंस जमाने वाले फर्जी पत्रकारों की अब खैर नही. असम पुलिस इन फर्जी पत्रकारों पर लगाम लगने के लिए कवायद शुरू कर दी है. राज्य सरकार के इस सम्बन्ध में आदेश मिलने के बाद पुलिस पता लगाने में जुट गई है कि कितने ऐसे लोग हैं जो येन केन प्रकारेन प्रेस कार्ड हासिल कर प्रेस के स्टीकर का बेजा इस्तेमाल कर रहे है.
असम पुलिस के एक अधिकारी का कहना है कि भारी संख्या में लोग प्रेस के स्टीकर का इस्तेमाल कर रहे हैं. पुलिस हमेशा भ्रम में रहती है कि कौन सही पत्रकार है और कौन फर्जी या गलत, क्योंकि यह संभव है कि उग्रवादी भी अपनी गाड़ी पर प्रेस लिख कर पुलिस कि नजरों में धूल झोंक कर निकाल जाये. इसलिए प्रेस सूचना विभाग से लिस्ट माँगी गई है. ताकि फर्जी पत्रकारों को प्रेस लिखने से रोका जाये. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ अखबार सस्ती लोकप्रियता के लिए रेबडि़यों कि तरह कार्ड बाँट रहे हैं और ऐसे लोग पुलिस पर हमेशा धौंस जमाने के साथ कई बार ग़लत कार्यों में प्रेस स्टीकर का फायदा उठाते हैं. इसलिए पुलिस इस बात कि व्यवस्था करने जा रही है कि सिर्फ कार्यरत पत्रकार ही अपनी गाड़ी पर प्रेस शब्द का इस्तेमाल कर सकें.
गुवाहाटी से नीरज झा की रिपोर्ट.












raj
June 18, 2011 at 12:03 pm
chalo ab kuch to rahat milegi in farzi patrkaro se .. uttrakhand me na kane police kab apni aakhen kholegi
Mukesh
June 18, 2011 at 2:50 pm
Bihar mein bhi farji patrakaro ka bol-bala hai. Bihar sarkaar ko kuchh karne ki jarurat hai. Dekhiye kab jagti hai. Sk mukesh.
GhanshyamKrishana
June 18, 2011 at 3:36 pm
u.p. mai bhe police ko action lena chahiye.
Abhishek singh
June 19, 2011 at 12:03 am
Iske liye to pure desh bhar me abhiyan chalna chahiye. Aajkal har tisri bike me press, ya police likha dikhta hai. In sab par lagam lagane ke liye state government ko ek abhiyan chala kar is par lagam lagani chaiye.
som dutt
June 19, 2011 at 8:04 am
bilkul sahi kaha app ne jammu main bhi aisi hi muhim chalai jaye
manish dubey
June 19, 2011 at 9:15 am
एक तो आजकल इतने साप्ताहिक अखबार हो गए हैं जो जगह जगह कुकुरमुत्तों की तरह उग आते हैं ! महीने पंद्रह दिन में किसी पे प्रेसर बनाने के लिए छाप दिया या किसी छुटभैये की शान में कशीदे काढने वाले ये अखबार और इनके रिपोर्टर ! ये तो देश भर में हैं और तो और कस्बाई व ग्रामीण छेत्रो में तो किसी रिश्तेदार को ध्यान में रखते हुए लोग प्रेस किन गरिमा लूटते है ! और पोलिसे तो रोकेगी ही प्रेस वालों को ताकि फर्जी लोगो को पकडे सख्ती दिखाए , सायद थोडा मानसिक प्रेसर बड़ों पर भी हो ! और रेहड़ी , ठेली लूटने वाले ये सरकार के सरकारी पत्तेचात कुछ नहीं कर सकते ! इस विषय पर मुझे लगता है , अगर इतना बड़ा मुद्दा है तो उपाय भी मीडिया को निकलना होगा !
g gulam
June 20, 2011 at 1:56 am
alam ye hai ki hal hi me ek sampadak ne apne mathat ko press ka card diya. wah logo se chitfant ya dusre tarah se udhar le leta hai .paisa magne par patrakar ka raun dikhata hai. puilish kes kar deta hai aur polish se pitbane me bhi piche nahi rahta