बिजनेस भास्कर को लांच हुये तीन साल के करीब हो गये हैं। इन तीन सालों में बिजनेस भास्कर के कर्मियों को एक बार ही इंक्रीमेंट दिया गया है। पिछले चार माह से कर्मचारी बिजनेस भास्कर से इसलिये जुड़े हुये हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि शायद अप्रैल से उन्हें अच्छा खासा इंक्रीमेंट मिल जायेगा। यदि इंक्रीमेंट में अच्छी बढोतरी नहीं होती तो बिजनेस भास्कर के कई साथी दूसरे अखबारों में जाने के जुगाड़ में जुटे हुये हैं।
इसमें रिपोर्टर ही नहीं अन्य स्टाफ भी बिजनेस भास्कर का पल्लू छोडऩे को तैयार है। अखबार में पिछले तीन सालों से विज्ञापन के लिये प्रयास नहीं किये गये। अब प्रयास शुरु हुये हैं लेकिन अब देखना यह है कि कर्मचारियों को इसका कितना फायदा मिलता है। पहले ही बिजनेस भास्कर में रिपोर्टर स्टाफ आवश्यकता से आधा ही है। कर्मियों पर बढ़ता बोझ व इंक्रीमेंट न लगना बिजनेस भास्कर से उनकी दूरी बढ़ा रहा है। पंजाब व हरियाणा में तो कुछ जगहों पर बिजनेस भास्कर बंद भी हो चुका है। अब देखना यह है कि बिजनेस भास्कर इंक्रीमेंट बढ़ाकर कर्मियों को बचाता है या कर्मचारी खुद ही बिजनेस भास्कर छोड़ इसे बंद करेंगे। यशवंत जी शायद आपके जरिये ही भास्कर ग्रुप इस एडिशन के कर्मियों की कुछ सुन ले।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित












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March 31, 2011 at 7:52 pm
ranchi bhaskar wale bhi isi ke intzaar me hain. agar increment nahi hua to kai log brand badalne ki taiyari me hain.