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बेइज्जती सहने से अच्छा नौकरी छोड़ दी

: पवन द्विवेदी कई साथियों के साथ हिंदुस्तान छोड़कर राष्ट्रीय सहारा से जुड़े : हिंदुस्तान, इलाहाबाद के सीनियर रिपोर्टर पवन द्विवेदी के कान रोज-रोज यह सुनते हुए पक गए थे कि ‘‘क्या तुम्हें कोई नौकरी नहीं दे रहा है कि यहां हिंदुस्तान में पड़े हुए हो.’’ रोज-रोज यह सुनते-सुनते श्री द्विवेदी ने नौकरी छोड़ दी और अब राष्ट्रीय सहारा, इलाहाबाद के साथ हो लिए. पवन द्विवेदी को राष्ट्रीय सहारा, इलाहाबाद में सीनियर रिपोर्टर सह मुख्य रिपोर्टर की भूमिका दी गयी है. पवन के मुताबिक 20 जनवरी 2011 को इलाहाबाद में राष्ट्रीय सहारा को लांच करने की तैयारी है. पवन द्विवेदी ने बताया कि हिंदुस्तान की इलाहाबाद में जो हालत है उससे तो लगता है कि चार-छह और लोग सहारा से जुड़ जाएंगे.

: पवन द्विवेदी कई साथियों के साथ हिंदुस्तान छोड़कर राष्ट्रीय सहारा से जुड़े : हिंदुस्तान, इलाहाबाद के सीनियर रिपोर्टर पवन द्विवेदी के कान रोज-रोज यह सुनते हुए पक गए थे कि ‘‘क्या तुम्हें कोई नौकरी नहीं दे रहा है कि यहां हिंदुस्तान में पड़े हुए हो.’’ रोज-रोज यह सुनते-सुनते श्री द्विवेदी ने नौकरी छोड़ दी और अब राष्ट्रीय सहारा, इलाहाबाद के साथ हो लिए. पवन द्विवेदी को राष्ट्रीय सहारा, इलाहाबाद में सीनियर रिपोर्टर सह मुख्य रिपोर्टर की भूमिका दी गयी है. पवन के मुताबिक 20 जनवरी 2011 को इलाहाबाद में राष्ट्रीय सहारा को लांच करने की तैयारी है. पवन द्विवेदी ने बताया कि हिंदुस्तान की इलाहाबाद में जो हालत है उससे तो लगता है कि चार-छह और लोग सहारा से जुड़ जाएंगे.

बाकी समय बताएगा हिंदुस्तान इलाहाबाद में किस गति को प्राप्त होगा. खुद के बारे में पवन का कहना है- इलाहाबाद में किसी बच्चे से भी पूछ लीजिए, वह मेरे बारे में, मेरे कामकाज के बारे में, मेरी सक्रियता और मेरी कर्मठता के बारे में आपको सही सही रिपोर्ट दे देगा. हिंदुस्तान, इलाहाबाद छोड़ने के बारे में और वहां के माहौल के बारे में पवन ने जो कुछ कहा, वह इस प्रकार है-

‘‘संपादक के व्यवहार से तंग आकर मैंने तय कर लिया कि मैं हिंदुस्तान से इस्तीफा नहीं दूंगा और न वहां जाऊंगा और न कभी वहां नौकरी करूंगा. कब तक अपनी बेइज्जती सहता. सो नौकरी से ही हट जाना मुनासिब समझा. कुछ कान फूंकनेवाले पत्रकारों ने संपादक अनिल भास्कर का कान भर दिया था, सो नमस्ते करने में भलाई समझी. मुझे पता नहीं था कि हिंदुस्तान में इतना मुझे जलील किया जाएगा. वह तो सिर्फ मुकुल मिश्र का मुंह देखकर वहां रूका रहा. कभी डेस्क पर तो कभी कहीं और दौड़ाया जाता रहा. बेइज्जती सहने की भी एक सीमा होती है. आखिर अपनी बेइज्जती कब तक सहता. मेरे हिंदुस्तान छोड़ते ही नैनी जो सबसे बड़ा बिजनेस सेंटर है- हिंदुस्तान का पूरा का पूरा स्टाफ सहारा में चला गया है. एक तरह से हिंदुस्तान का कार्यालय ही बंद हो गया है. बहुत बड़ी बात मैं नहीं करता न ऐसी मेरी आदत ही है, पर कहना पड़ेगा मेरे एक आह्नान पर नैनी हिंदुस्तान के ब्यूरो प्रमुख नरेंद्र श्रीवास्तव सहित तीन रिपोर्टर, एक फोटोग्राफर और एक चपरासी सभी सहारा में चले गए हैं. जागरण झूंसी के श्रीनारायण कुलकर्णी भी सहारा में चले गए हैं. यही नहीं हिंदुस्तान की मीडिया मार्केटिंग के चार सक्रिय एक्जीक्यूटिव भी सहारा ज्वाइन कर चुके हैं.’’

ज्ञात हो कि पवन द्विवेदी ने 1999 में अमृत प्रभात से सक्रिय पत्रकारिता शुरू की. इसके बाद स्वतंत्र भारत और जनसत्ता एक्सप्रेस से जुड़े. मुकुल मिश्र ने पवन को हिंदुस्तान में बुला लिया जहां वे सीनियर रिपोर्टर रहे. हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स को इलाहाबाद में जमाने में पवन की भूमिका के बारे में हिंदुस्तान के लखनऊ आफिस के वरिष्ठों ने कई बार तारीफ की है. पवन हिंदुस्तान में प्रशासन, एडीए, शिक्षा बीट देखते थे. पवन का कहना है कि करीब 15 हजार कापियां उनकी खबरों की वजह से मार्केट में रन करती थी. यही नहीं, वे बिजनेस में भी हाथ बंटाते थे और उनके हटते ही लगभग 25 लाख का चूना हिंदुस्तान को लग चुका है और करीब 70-75 लाख का चूना इलाहाबाद में लग जाएगा. आखिर में पवन द्विवेदी कहते हैं- सच कहूं तो मेरा हिंदुस्तान में काफी अपमान हुआ है. संपादक अनिल भास्कर के जले कटे शब्द आज भी दिल में शूल की तरह चुभते हैं. ऐसा अपमान मैं जिंदगी में कभी नहीं भूल पाऊंगा. रोज-रोज छोटी-छोटी बातों पर मुझे बुलाकर जलील किया जाता था. साभार : पूर्वांचल दीप

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0 Comments

  1. naved khan

    January 2, 2011 at 12:50 pm

    sahi baat hai yensi nokri kis kaam ki jisme hamare jajbato ki kadr na ho.

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