मीनाक्षी मैडम की जय-जय

आजकल दैनिक जागरण वाली मीनाक्षी मैडम की जय जय है. पहले पन्ने पर उनकी तीन-तीन बाइलाइन छप रही है. ऐसे भाग्यशाली पत्रकार कितने हैं जो पहले पन्ने पर एक ही दिन में तीन तीन बाइलाइन पा जाएं. पर जब जिस पर खुदा मेहरबान होता है तो उसकी किस्मत ऐसी ही होती है. मीनाक्षी मैडम चंडीगढ़ में बैठती हैं और पूरे पंजाब हरियाणा पर राज करती हैं. काफी पुराने दिनों से दैनिक जागरण से इनका नाता है.

इनकी निष्ठा आदि को देखते हुए जागरण प्रबंधन ने इन्हें राष्ट्रपति के साथ विदेश दौरे पर भेज दिया. दूसरे, जब राष्ट्रपति महिला हों तो उनके साथ महिला रिपोर्टर को भेजना ज्यादा लाजिकल और उचित फैसला है. दैनिक जागरण, पंजाब में कार्यरत कर्मी मीनाक्षी को विदेश भेजे जाने के जागरण प्रबंधन के फैसले पर चर्चा नहीं कर रहे हैं. ये कर्मी आजकल दैनिक जागरण, पंजाब में पहले पन्ने पर मैडम की तीन तीन बाइलाइन छपने से दांतों तले उंगलियां या उंगलियां तले दांत, जो भी समझ लीजिए, दबा रहे हैं.

अभी तक चलन यह रहा है कि कोई रिपोर्टर विदेश से खबरें भेजता है तो उसकी सबसे प्रमुख खबर पर बाइलाइन देकर, अन्य खबरों के साथ उसके पद का जिक्र कर दिया जाता है. पर मीनाक्षी जी पर यह कृपा कई लोगों को पच नहीं रही है. हालांकि न्यूज चैनलों की रिपोर्टिंग को देखते हुए अखबार वाले अपने यहां अपने रिपोर्टरों को ज्यादा तवज्जो, एक्सपोजर, सम्मान दे रहे हैं तो इसे पाजिटिव सेंस में लेना चाहिए पर अखबार वालों की आदत ठहरी टांग खिंचाई की सो मौका मिलते ही शुरू हो जाते हैं. कुछ न सही तो यही सही कि मैडम को तीन-तीन बाइलाइन क्यों और बाकियों को एक भी बाइलाइन पाने के लिए क्यों नाक रगड़ना पड़े?

Comments on “मीनाक्षी मैडम की जय-जय

  • ager koi mehnat kar raha hai to kisi ko jalan kyu hoti hai samaz may nai aata haad ho gai hai
    aap ki lakhni may itna dum nai to agley ke barey may aisa kahney ka aap ko haq nai mehnat karo aur aap 5 by line le lo problem kya hai bhai aap ko keep it up madum i wish aap inki bato par dhyan na de kar ak din issay bhe accha kaam karegi har kisi ko mauka nai milta pm ke sath ghoomney ka ya yahi jalan hai dont very

    Reply
  • rakesh sharma says:

    मीनाक्षी जी पर कमेंट से पहले उनके संघर्ष को नजर अंदाज ना करें

    जिस तरह की यह बेहूदा जानकारी कानाफूसी कालम में देखी वह काफी अफसोसजनक है। मीनाक्षी जी पिछले दो दशक से दैनिक जागरण के साथ जुड़ी हुई हैं। उन जैसे गिने-चुने लोगों की वजह से ही आज दैनिक जागरण इस मुकाम तक पहुंच पाया है। इस तरह अधकचरा जानकारी से लोगों को ज्ञान बांटने से पहले किसी व्यकि्त के चरित्र के बारे में खुद अपना ज्ञान बढ़ाने पर भी लेखक महोदय को ध्यान देना चाहिए।
    किसी भी संस्थान में व्यक्ति को अपने पांव जमाने के लिए जरूरी होता है, प्रबंधन का विश्वास जीतना। व्यक्ति आम तौर पर अपने परिजनों पर तो गलत होने पर भी भरोसा कर लेता है, लेकिन अपने कर्मचारी को कई तरह की कसौटी पर कसने के बाद ही उसे कोई जिम्मेदारी देता है। प्रबंधन की नजर में खुद को बेहतर साबित करने के लिए सबसे अधिक जरूरी होता है अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन करना। मैं ज्यादा ज्ञानवान तो नहीं हूं, लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि नौकरी करने वाले व्यक्ति को तब तक कोई मुकाम हासिल नहीं होता जब तक मालिक को यह विश्वास नहीं होता कि उसके कर्मचारी में अपना सर्वस्व भी उसके लिए सहर्ष न्यौछावर करने का जज्बा है।
    प्रबंधन की किसी ना किसी कसौटी पर उनके योगदान को अहम माना गया होगा तभी तो दो दशक से वे अपने पद पर टिक पाई हैं और आज एक सम्मानित मुकाम हासिल कर पाई हैं। आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दूं कि उनके दैनिक जागरण में आने के समय ना तो चंडीगढ़ कार्यालय का यह स्वरूप था और ना ही आज जैसी मजबूत स्थिति दैनिक जागरण की थी।
    दैनिक जागरण के मजबूत स्तंभ माने जाने वाले स्वर्गीय संपादक नरेंद्र मोहन जी के सान्निध्य में जब हरियाणा की ओर अखबार ने कदम बढ़ाए थे तो मीनाक्षी जी ने ही प्रबंधन के सभी दायित्व अपने कंधों पर संभाले थे। इसी कारण वे उस समय में माननीय नरेंद्र मोहन जी का विश्वास हासिल करने में कामयाब हुई थीं और अखबार ने हरियाणा के साथ ही पंजाब में भी सफलता के नए आयाम स्थापित किए।
    दूसरी महत्वपूर्ण बात यह भी है कि उन्होंने अखबार प्रबंधन में दो पीढ़ियोंका विश्वास हासिल करने में कामयाबी हासिल की। नरेंद्र मोहन जी के बाद माननीय संजय गुप्ता जी भी उन्हें पूरा सम्मान देते हैं और उनमें विश्वास जताते हैं, यही कारण है कि आज वे अखबार में एक मजबूत स्थित में हैं।
    मैं अपने छोटे से कार्यकाल के अनुभव से आधार पर कहता हूं कि समाचार संकलन के अलावा कई और जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में ही जिला स्तर पर एक मुख्य संवाददाता का हौसला जबाव दे देता है। मालिक के नफा-नुकसान का ध्यान रखने का काम भी आम कर्मचारी सिर्फ औपचारिकताओं तक ही पूरा कर पाता है। वर्ष 2009 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान अकेले मीनाक्षी जी के बूते ही कंपनी के कर्ता-धर्ताओं को तगड़ा आर्थिक लाभ मिल पाया था। दोस्तों ऐसे कामों के लिए क्या-क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं, इस हकीकत से रूबरू होंगे तो आत्मा तक कांप जाएगी। इसके बावजूद उन्होंने अपने दायित्व का बहुत बखूबी निर्वहन किया जिसके लिए वे बधाई की पात्र हैं। मैं आज तक नहीं भूला हूं कि प्रबंधन को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरह से मोर्चा संभाला था उससे खुद को तोप समझने वाले एक साहब की तो पूरी तरह से घिग्गी बंध गई थी और उन्होंने अपनी खीज मुझ पर निकाली थी। अंदरखाने राजनीति करने वाले ये महाशय मीनाक्षी जी के सामने तो पाने भरने तक को तैयार रहते थे, लेकिन पीठ फेरने पर वार करने से नहीं चूकते थे। इस तरह की परिस्थितियों का उन्हें जीवन में कितनी बार सामना करना पड़ा होगा यह आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं।
    इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आम तौर पर महिला सशक्तीकरण की बात तो बहुत से मंचों पर सुनाई देते हैं और बुद्धिजीवी चीख-चीखकर अपने मत भी व्यक्त करते हैं। इसके बावजूद किसी भी सशक्त महिला की कामयाबी कोई पचा नहीं पाता। यही कारण है कि अपने बूते इस मुकाम तक पहुंचने के बावजूद भी मीनाक्षी जी के बारे में अनाप-शनाप लिखकर कुछ लोग उनकी उपलब्धियों पर विवाद बनाने से चूक नहीं रहे हैं। बेहतर होगा कि ऐसी सशक्त महिला से आने वाली पीढ़ियां सबक लें और उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करें। जहां तक मेरी जानकारी है पत्रकारिता में मेरी तरह ही मीनाक्षी जी का भी कोई पूर्व सरोकार नहीं था। अपनी मेहनत के बूते ही वे मेरा आदमी-तेरा आदमी(माता) की संस्कृति वाले समाज में अपना मुकाम स्थापित करने में कामयाब हुई हैं। ऐसे में कुछ नकारा लोग सिर्फ बायलाईन को ही मुद्दा बनाएं उससे जरूरी हैं कि वे उनके बारे में पहले पूरी जानकारी हासिल कर लें। मेरी लेखक महोदय से भी विनती है कि मेरी इन बातों को अन्यथा ना लें, मैं किसी भी तरह से आज इस लेख के द्वारा मीनाक्षी जी का कृपापात्र बनने की फिराक में नहीं हूं। मेरी विनती सिर्फ इतनी है कि लेखक महोदय यदि सही तौर पर किसी भी दुर्भावना से ग्रस्त नहीं हैं तो उनके जीवन के संघर्ष को गहराई से नापने की कोशिश करें। मीनाक्षी जी ने अपने लिए जीवन में कभी कुछ सोचा नहीं है और ना ही उनके पास ऐसा कुछ है जिसके लिए उन्हें स्वार्थी बनने और कुछ सोचने की जरूरत हो। अपने आसपास रहने वाले लोगों की जिस तरह से वे मदद करती हैं उससे कोई भी भावुक और द्रवित होकर उनके प्रति सार्वजनिक ना सही मन ही मन तो अपने विचार प्रकट कर सकता है। बाकी आपने यह मंच उपलब्ध कराया है और में अपने विचार प्रकट कर पाया हूं उसके लिए आपका भी बहुत-बहुत आभार।

    राकेश शर्मा,
    कुरुक्षेत्र

    Reply
  • satyendra narayan sharma says:

    ager koi apne repoter ko 2 ya 8 byline deta hai to kishi ka kya jaa raha hai. Minakshi ji ko president ke saath jaane ko mila saayed ishi se katipay logo ko boukhalahat hai.
    satyendra
    bettiah, bihar

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *