प्रिय संपादक महोदय, मैं तहे दिल से आपका शुक्रगुजार हूँ जो आपने मेरी खबर को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया. इसी महीने की पांच तारीख को मुझ पर सोलन में कोर्ट परिसर के बाहर जानलेवा हमला हुआ था, जिसे आपने भड़ास4 मीडिया में भी शामिल किया था. इस घटना के बाद मेरी ज़िंदगी ही बदल गई है.
अभी तक मैं समाज के हर वर्ग का दुःख दर्द खबरों के माध्यम से आम जनता तक पहुंचता था, लेकिन आज मैं खुद उस बुरे दौर से गुज़र रहा हूँ. इस घटना के बाद शुरुआती दिनों में मुझे अपने सभी पत्रकार मित्रों और प्रदेश के तमाम पत्रकार संगठनों का भरपूर सहयोग भी मिला.. जिसके लिए मैं उन सभी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.. ये मामला विधानसभा में भी गूंजा जिसके बाद मुख्यमंत्री धूमल ने मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा भी दिलाया.. लेकिन सोलन बीजेपी के एक बड़े नेता लगातार मामले को दबाते आए हैं और पुलिस पर भी मामले को हल्का करने का दबाव बना रहे हैं.
यहीं कारण है की अभी तक पुलिस भी हमले में शामिल किसी भी मुख्य आरोपी को पकड़ नहीं रही है. इससे आरोपियों के हौंसले भी बुलंद हैं. वहीं स्थानीय नेता की शह मिलने पर तो आरोपी निश्चिन्त बैठे हुए हैं.. सब ने देखा कि मुझ पर सोलन कोर्ट परिसर के बाहर दौड़ा-दौड़ा कर लोहे की रॉड और बेसबाल के बैट से हमला किया गया.. सड़कों पर गाड़ियां रुक गईं, सैंकड़ों लोग इकट्ठे हो गए, सभी दुकानदार अपनी दुकानों से बाहर आ गए लेकिन सब तमाशा देखते रहे. मुझे गुंडों ने सड़क पर लेटा दिया और बुरी तरह से पीटा लेकिन किसी को भी मुझपर दया नहीं आई. ये हैं हमारा समाज और हमारी एकजुटता का सच.
पुलिस ने पांच हमलावरों को तो पकड़ा लेकिन इनमें से सिर्फ एक ऐसा असमाजिक तत्व था जिसने मुझ पर हमला किया था.. बाकी गुंडों को भी भगाने में भूमिका निभाई थी.. पुलिस उस नेता की शह पर काम कर रही है और केस को जानबूझकर कमज़ोर बना रही है.. सोलन में इन हमलावरों का काफी रसूक है और इन्हें बड़े नेताओं का भी संरक्षण मिल रहा है. एक भी ऐसा व्यक्ती सोलन में नहीं है जो इनके काले कारनामों को न जानता हो लेकिन डर के मारे ऑफ द रिकार्ड तो कई लोग मदद कर रहे हैं लेकिन कानूनी तौर पर सामने आने से सभी डर रहे हैं.
बीजेपी के उस बड़े नेता द्वारा मेरे अस्पताल पहुँचने से पहले ही डाक्टर को मेरा मेडिकल कमज़ोर करके बनाने के लिए फोन आ गया था.. पुलिस स्टेशन में भी यही हुआ और मेरे हर बयान और हर गतिविधि की ख़बरें भी आरोपियों तक किसी न किसी माध्यम से पहुँच रही थी. सच कहते हैं अपने पर भुगतने वाले कि क़ानून इन सफ़ेद पोशाक लोगों के लिए कोई मायने नहीं रखता.. क़ानून इनसे ऊपर नहीं है.. ये जैसे चाहें वैसे क़ानून का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.. कानून के रखवाले भी इन्हीं गुंडों का साथ देते रहे हैं.. यही वजह है की अब आम जनता का क़ानून से विश्वास लगभग खत्म हो रहा है.
आभारी
मोहित प्रेम शर्मा
ब्यूरो चीफ
साधना न्यूज़, हिमाचल प्रदेश












Jiwan Jyoti
April 11, 2011 at 7:05 pm
Mr. Mohit Ji,
Patrakarita K Es Daur Me Aap Jis Lamhe Ko Sehen Kar Rhe Hai, use Sirf aur Sirf aap hi samajh sakte hai. Apne Anubhav se mai Bus etna hi kahunga ki Aap ko Ye larai Akele Larne ki Jarurat Hai. Kyonki Bure Samay Me koi Bhi Aaapke Saath Nhi hoga. ye Baaten Mai Apne Anubhav se Bol Rha hoon. Esliye Meri Salah Me Aaap Khud ki Hifazat karte Hua Patrakarita ka Farz Pura Kare, Kyonki Jaan Hai to Jahan Hai. Khair Meri Duaan Aapke Saath hai.
Jiwan Jyoti
Bureau Chief
Sandhya Prahari
Patna, Bihar