यूपी पुलिस में करप्शन के खिलाफ लड़ने वाला कांस्टेबल सुबोध यादव बर्खास्त

Subodh Yadav: पुलिस अधीक्षक, रेलवे, गोरखपुर अमिताभ यश के हस्ताक्षर से जारी हुआ बर्खास्तगी का पत्र : अन्ना के मंच से आईपीएस बृजलाल को भ्रष्टाचारी कहने वाले सुबोध यादव पर अंततः गिरा दी गई गाज : सुबोध यादव ने अंतिम दम तक करप्शन और तानाशाही के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया :

भड़ास4मीडिया के पाठकों के लिए सुबोध यादव का नाम अपरिचित नहीं है. इसलिए उनके बारे में ज्यादा न बताते हुए, उनके हश्र के बारे में सूचित किया जाता है कि इस जांबाज कांस्टेबल को माया सरकार के वरिष्ठ पुलिस अफसरों ने ‘शहीद’ कर दिया है. करप्शन और डिक्टेटरशिप के खिलाफ लड़ने वाले इस सिपाही को बर्खास्तगी का पत्र थमा दिया गया है. यह नेक काम किया है आईपीएस अमिताभ यश ने. अमिताभ यश इन दिनों पुलिस अधीक्षक रेलवे गोरखपुर के पद पर कार्यरत हैं और सुबोध इन्हीं के अधीन पदस्थ थे. भड़ास4मीडिया से बातचीत में सुबोध यादव ने ऐलान किया कि बर्खास्तगी से उन्हें न तो डराया जा सकता है और न ही झुकाया जा सकता है. करप्शन और डिक्टेटरशिप के खिलाफ उनकी लड़ाई अब और बड़े पैमाने पर लड़ी जाएगी.

…कांस्टेबल सुबोध यादव और उनके संघर्ष के बारे में ज्यादा जानने के लिए इन शीर्षकों पर क्लिक करें…

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6. बर्खास्त सिपाही सुबोध यादव ने अन्ना के मंच से लिया दो आईपीएस अफसरों का नाम

उल्लेखनीय है कि सुबोध यादव ने अन्ना हजारे के मंच से भाषण देते हुए यूपी पुलिस के सबसे भ्रष्ट अफसर के रूप में बृजलाल का नाम लिया था. इसके बाद यूपी पुलिस के सर्वेसर्वा और मायावती के खासमखास बृजलाल ने लगभग तय कर लिया कि उन्हें सुबोध यादव को बर्खास्त करके सबक सिखाना है और बदला लेना है. पर अपने धुन के धनी सुबोध यादव ने पुलिस वालों को अपने शोषण के खिलाफ संगठित करने और तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने का काम जारी रखा. सुबोध यादव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे द्वारा चलाए गए मुहिम से प्रभावित होकर अपना उपनाम अन्ना रख लिया है. वैसे, सुबोध यादव को खुद भी अपने बर्खास्त किए जाने की आशंका पहले से थी. इस बारे में एक खबर भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित की जा चुकी है जिसे उपर दिए गए शीर्षकों में तलाश सकते हैं. अब यहां नीचे अमिताभ यश के हस्ताक्षर से जारी सुबोध यादव की बर्खास्तगी के आदेश की प्रति का प्रकाशन किया जा रहा है…

Comments on “यूपी पुलिस में करप्शन के खिलाफ लड़ने वाला कांस्टेबल सुबोध यादव बर्खास्त

  • sach mai subodh ne mahan karya kiya hai. vo bhi up jaise rajya mai…unhe bahut bahut badhai…app apni ladai jari rakho, mere anna hum tumhare sath hai…up mai hee ahar bhrastachar khatm ho jaye to sayad desh ka sabse sundartam or samridh rajya ban jayeee….vah…mati ke lal…yug..yug jiyo…

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  • ………….आखिरकार सुबोध यादव को बर्खास्त कर ही दिया गया
    उत्तर प्रदेश पुलिस के कई भ्रष्टाचारी अफसरो की नाक मे दम करने वाले साहसी और वीर पुलिस जवान को आज उत्तर प्रदेश पुलिस ने बर्खास्त दिया है।
    राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर मे तैनात पुलिसकर्मी सुबोध यादव को आज बर्खास्त करने का खत गोरखपुर मे रिसीव करा दिया है अपनी बर्खास्तगी का खत मिलने के बाद सुबोध यादव ने टेलीफोन पर गोरखपुर से बताया कि उसे बर्खास्त करने का नोटिस दिया गया था जिसका जबाब उसने दाखिल कर दिया था गोरखपुर राजकीय रेलवे पुलिस के एसपी अभिताभ यश ने वैसे तो 24 सितंबर को ही बर्खास्त कर दिया था लेकिन उसे बर्खास्तगी का आदेश आज दोपहर डेढ बजे के करीब रिसीव करा दिया गया है अपनी बर्खास्तगी का आदेश मिलने के बाद सुबोध ने बताया कि वो अपनी गैर कानूनी बर्खास्तगी के खिलाफ अदालत जायेगे उम्मीद है कि अदालत हर हाल मे न्याय करेगी।
    अन्ना के मंच से खाकी वर्दी पहने उसने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। अपने महकमे के अधिकारियों के घोटालों पर जमकर बरसा था। सुबोध को भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चलाने की सजा मिली है बर्खास्तगी के रूप मे।
    1994 में देहरादून से आरक्षी के रूप में भर्ती हुए सुबोध यादव ने खाकी की शपथ लेने के साथ-साथ ईमानदारी की कसम खाई थी। मथुरा जीआरपी में तैनाती के दौरान उसने जब अपने इंस्पेक्टर के खिलाफ ड्यूटी लगाने में पैसा लेने पर आवाज उठाई, तो इंस्पेक्टर पर कार्रवाई हुई। मगर इनाम में इसे भी एक बैड एंट्री मिली।
    इसके बाद सुबोध की मुहिम थमने के बजाए तेज होती गई। उसके मुताबिक उसने अज्ञात शव व दाह संस्कार घोटाला, ताबूत घोटाला, वर्दी घोटाला, कम्प्यूटर खरीद घोटाला समेत दर्जनों घोटाले खोले। हर घोटाला खोलने की एवज में कभी निलम्बन तो कभी बैड एंट्री की सजा मिलती रही। अधिकारियों की नाराजगी बढ़ती गई। इसके बाद उसने यूपी पुलिस एसोसिएशन की स्थापना की। इससे अधिकारी बौखला गए। इटावा जीआरपी में तैनाती के बाद उसे निलम्बित कर दिया।
    24 अगस्त को वर्दी पहनकर रामलीला मैदान दिल्ली में अन्ना के मंच से सुबोध जमकर बोला। अपने बयान में एडीजी स्पेशल का नाम लेकर आरोप लगाए।
    हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश पुलिस ऐसोसिएशन के नाम से गठित किये गये संगठन ने राज्य के आला पुलिस अफसरों की नाम मे दम कर दिया था। पुलिस के आला अफसरों ने इस संगठन के गठन से पहले ही इस संगठन से जुड़ने जा रहे पुलिस अफसरों पर अनुशासनहीनता के नाम से कार्रवाई करनी शुरू कर दी थी और जैसे ही चंद पुलिसजन संगठन के पदाधिकारी बने तो फिर बड़ी कार्रवाईयों की शुरुआत कर दी गई।
    इसी संगठन के प्रवक्ता और प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध यादव को निलंबित तो पहले ही कर दिया गया था, अब बर्खास्त भी कर दिया गया है।
    अपने खिलाफ की गई इस कार्रवाई को पुलिस अमले का महाभ्रष्ट स्पेशल डीजीपी बृजलाल और रेलवे में एडीजे एके जैन के इशारे पर करना सुबोध बताते है।
    इससे पहले सुबोध को तब निलंबित कर दिया गया था जब यूपी पुलिस ऐसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र यादव का इटावा में उनका सर्मथकों की ओर से आगमन के दौरान जोशीला स्वागत कराया गया था। खुफिया रिर्पोटों के आधार पर सुबोध यादव को निलंबित कर दिया था। सुबोध यादव ने बताया कि साल 2011 के 15 जनवरी को यूपी पुलिस वेलफेयर ऐसोसिएशन के गठन की खबरें विभिन्न अखबारों में आना शुरू हो गई थी, मुझे संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष का पद दिया गया। इसी बीच 20 जनवरी को अपर पुलिस महानिदेशक रेलवे एके जैन ने मेरा ईएल अवकाश, जो 30 दिनी स्वीकृत था, को भी बिना किसी पूर्व सूचना दिये बीच में निरस्त कर जीआरपी गोरखपुर के लिये कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन बाद में मिले सरकारी दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि गोरखपुर के लिये तबादला कर दिया गया है, जब कि इस समय बीमारी के कारण मैंने ईएल अवकाश लेने के बाद घर पर रह कर उपचार करा रहा था।
    सुबोध को मात्र 24 घंटे के भीतर ही गोरखपुर जा कर आमद कराने का आदेश दिया गया जब कि शासनादेश है कि एक सप्ताह का वक्त आमद के लिये मिलता है, ऐसे में सुबोध के खिलाफ आईपीएस अफसरों का उत्पीड़नात्मक रवैया यहीं से परीलक्षित हो गया था। 3 फरवरी को राजकीय रेलवे पुलिस, गोरखपुर के एसपी अमिताभ यश की ओर से निलंबित कर दिया गया है। राजकीय रेलवे पुलिस गोरखपुर अनुभाग के एसपी अमिताभ यश की ओर से 22 मार्च को पत्र सख्यां एस-29/2011 सुबोध को गुण दोष पर विचार किये बिना तत्काल प्रभाव से बहाल कर दिया गया। 2 मार्च को एक बार फिर से सुबोध को निलंबित कर दिया गया था ।
    सुबोध को पुलिस सेवा मे 16 साल काम करते हुये हो गये हैं और अपने हक की बात कहना क्या बुरा है? सुबोध का आरोप है कि आईपीएस अफसरों की घोटालेबाजी को लेकर आरटीआई का इस्तेमाल करना और पुलिस संगठन में काम करना आईपीएस अफसरों को रास नहीं आया है।
    सुबोध यादव ने आरटीई डालकर ली जानकारी कि पुलिस विभाग में हर साल करोड़ों की धांधली का खुलासा हुआ है। यह रकम है लावारिस मुर्दों की, इसे भी विभाग के अफसर नहीं छोड़ रहे हैं। वे हर साल इस मद की रकम हड़प जाते हैं और खमियाजा भुगतते हैं दरोगा और सिपाही, जो इन लावारिस शवों का पोस्टमार्टम व अंतिम संस्कार कराने जाते हैं। बरसों से हो रही ज्यादती के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुबोध यादव ने आवाज उठाई है और उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह से उत्तर प्रदेश पुलिस के चार लाख अराजपत्रित पुलिस कर्मियों के लिए न्याय की मांग की है।
    उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता सुबोध यादव ने जनसूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया से जानकारी मांगी थी कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा क्या व्यवस्था मुकर्रर की गई है और इस मद में कितना धन दिये जाने का प्रावधान है. लम्बी टालमटोल के बाद पुलिस विभाग ने 5 जुलाई 2010 में एक पत्र और शासनादेश की छाया प्रति, जो प्रदेश के महामहिम राज्यपाल द्वारा जारी है, के द्वारा न सिर्फ उनकी शंकाओं का निवारण हुआ, बल्कि बेहद चौंकाने वाली जानकारी भी मिली. पुलिस मुख्यालय के जनसूचना अधिकारी अशोक कुमार अपर पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि शासनादेश संख्या स०- 1753/26-2-99-500(13)/99 दिनांक 16 जुलाई के तहत यह राशि 500 रुपये थी, यह व्यवस्था 17 नवम्बर 2008 से लागू की गयी थी, जिसे उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के साथ प्रदेश के वित्त विभाग ने भी मंजूरी दी थी।
    महंगाई दर में लगातार वृद्धि के कारण 17 नवम्बर 2008 के शासनादेश संख्या. डब्लू- 1733/ 6-पु-08-1500 (11) 98 टीसी -11 दिनांक 17 नवम्बर 2008 द्वारा 1500 रुपया कर दी गयी थी। आदेश में प्रदेश के महामहिम राज्यपाल ने खर्च का वर्गीकरण भी किया था, जिसके तहत 1500 रुपये में 200 रुपये कफन के 6 मीटर कपडे पर, 900 रुपये शव दहन की लकड़ी या कब्र की खुदाई पर और बाकी 400 रुपये शव को कब्रिस्तान या श्मशान ले जाने के किराये पर खर्च के लिए निर्धारित किये गये थे।
    इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सुबोध यादव ने बताया कि उन्होंने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को एक शिकायती प्रार्थना पत्र भेजा है, जिस में प्रदेश के 4 लाख पुलिसकर्मियों के साथ हो रही ज्यादती पर न्याय करने की मांग की है। इसी प्रार्थना पत्र में सुबोध यादव ने कहा है कि प्रदेश के पुलिस कर्मियों को नहीं पता है कि लावारिस शवों के अंतिम संस्कार के लिए शासन द्वारा 1500 रुपये प्रदत्त किये जाते हैं। थोड़े पुलिस कर्मियों को रुपये मिलने का तो पता है मगर यह पता नहीं है कि इस मद में कितना भुगतान निर्धारित है। इस रकम के लिए मोटी लिखा-पढ़ी और लम्बे इन्तजार आईपीएस अफसरों से स्थानान्तरण विभागीय कार्रवाई के डर से पुलिसकर्मीं शासन के रुपयों का लालच छोड़ देते हैं और अपनी जेब से रुपया खर्च कर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते हैं।
    पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिये गये सुबोध यादव अब भी अपने मिशन से पीछे हटने वाले नही है ऐसा सुबोध यादव कहते है उनका कहना है कि इस कार्यवाही के खिलाफ अब उनके सामने सिर्फ अदालत जाने के अलावा कोई दूसरा चारा नही है उनका कहना है कि उन्हे अदालत से हर हाल मे न्याय की उम्मीद है।

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  • Anirudh Mahato says:

    coruption ke Khilaph aawaz uthaney walon ka India me yahi hursh hoga.
    yanha kanoon ke rakchhak police hi Bhakchhak ban gayen hai, criminal ka sahyogi ban gayen, mahilaon ke sath maa-bahan ka nahi balki weshya jaisa byeohar kiya jata hai. to aise me kish par bishwas kiya ja sakta hai?

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