विधायक हत्याकांड : पत्रकार को पुलिस ने उठाया

: क्या अपनी बेटी पर दरिंदों की नजर पड़ने से बौखला गईं थीं रुपम पाठक? : बिहार के पूर्णिया जिले से खबर है कि रूपम पाठक ने जिस भाजपा विधायक की चाकू घोंप कर हत्या की, उस हत्या की जांच के सिलसिले में बिहार पुलिस ने अचानक जिले के एक वरिष्ठ पत्रकार को घर से रात के अंधेरे में चुपचाप उठा लिया. जिले के एक स्थानीय अंग्रेजी अखबार के प्रकाशक और संपादक नवलेश पाठक के कई घंटों तक घर से गायब रहने के बाद जब पत्नी को पता चला कि उनके पति का पुलिस वालों ने अपहरण कर लिया है तो उन्होंने मीडिया वालों से गुहार लगाई.

सहारा समय बिहार-झारखंड पर इस बाबत खबर प्रसारित हुई. मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस वालों ने नवलेश पाठक की बात उनकी पत्नी से फोन पर कराई. तब जाकर उनकी पत्नी की जान में जान आई लेकिन नवलेश पाठक की पत्नी का कहना है कि पुलिस बिना गिरफ्तारी वारंट कैसे उनके पति को घर से चुपचाप उठा सकती है. ऐसा व्यवहार तो किसी आम आदमी के साथ नहीं किया जा सकता, उनके पति तो पत्रकार हैं. उल्लेखनीय है कि पूर्णिया जिले की मेनस्ट्रीम मीडिया का भाजपा विधायक राज किशोर केशरी और – स्कूल शिक्षिका रुपम पाठक प्रकरण में बहुत खराब रोल रहा.

रुपम पाठक ने जब विधायक राज किशोर केशरी पर बलात्कार का आरोप लगाया तो बड़े अखबार वाले खबर को ही पी गए. रुपम पाठक दर-दर भटकती रहीं, पर उनकी आवाज कही नहीं सुनी गई. सूत्रों का कहना है कि रुपम पाठक विधायक के खिलाफ तब आक्रामक हुईं जब उन्हें पता चला कि दरिंदे उनकी (रुपम की) बेटी को अपने आकाओं तक सप्लाई करने का इरादा बना रहे हैं और इस काम की खातिर उनकी बेटी पर तगड़ी नजर रखे हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक ऐसी भनक लगने और प्रमाण मिलने के बाद रुपम बौखला गईं. उन्होंने विधायक को सबक सिखाना चाहा. उन्होंने मीडिया, पुलिस, बड़े नेताओं… सबके यहां विधायक राज किशोर केशरी के खिलाफ शिकायत की. पर कहीं कुछ नहीं हुआ. लकवाग्रस्त सिस्टम में कुछ होना भी न था. रुपम को जब लगा कि वे अपने अपमान का बदला नहीं ले पा रही हैं और हवस के दरिंदों के नापाक इरादों को नहीं रोक पा रही हैं तो उन्होंने वो करने का फैसला ले लिया जो अभी तक आमतौर पर फिल्मों में दिखा करता था. फिल्म ‘प्रतिघात’ की तर्ज पर रुपम पाठक ने विधायक को उनके घर में घुसकर चाकू से मार डाला.

रुपम पाठक जब अकेली न्याय के लिए लड़ रहीं थीं तो पूर्णिया के एक छोटे से अंग्रेजी अखबार ने उनका साथ दिया. स्थानीय अंग्रेजी अखबार में नवलेश पाठक ने रुपम की पूरी कहानी और उनके आरोपों को सिलसिलेवार ढंग से प्रकाशित किया. नवलेश ने जब ये स्टोरी प्रकाशित की तो धीरे-धीरे रुपम प्रकरण की चर्चा दूसरे जगहों तक पहुंचने लगी और केशरी-रुपम प्रकरण चर्चा का विषय बनने लगा. पुलिस ने जब कोई मदद नहीं की, मीडिया ने जब कोई साथ नहीं दिया, तो निराश व फ्रस्ट्रेट रुपम ने खुद न्याय करने का फैसला ले लिया.

राज किशोर केशरी का रुपम द्वारा मर्डर किए जाने के तुरंत बाद पटना में बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी प्रेस कांफ्रेंस करके तुरंत कह देते हैं कि महिला रुपम खराब है, महिला विधायक को ब्लैकमेल कर रही थी आदि आदि. सुशील मोदी के बयान को पुलिस ने अपने लिए संकेत संदेश समझा और झट से पूर्णिया के पत्रकार नवलेश पाठक को उठा लिया क्योंकि नवलेश ने रुपम की पूरी कहानी, संघर्ष और लड़ाई को अपने अखबार में साहस के साथ प्रकाशित किया था. देखिए, इस प्रकरण की जांच में क्या नतीजा निकलता है लेकिन आमतौर ऐसे हाईप्रोफाइल मर्डर केसों में असली बात सामने नहीं आ पाती क्योंकि असली बात सामने आ गई तो एक नहीं, सत्ता में बैठे ढेर सारे सुहावन से दिखने वाले चेहरे बेनकाब होकर लिजलिजे और घृणित नजर आने लगेंगे. वैसे भी, आजकल नेताओं और अफसरों से जिसने पंगा लिया, उसकी खैर नहीं.

यकीन न हो तो अपने यूपी को ही देख लीजिए. बांदा में विधायक पर जिस लड़की ने दुराचार का आरोप लगाया, वही लड़की विधायक के यहां चोरी के आरोप में जेल में बंद है और विधायक कहानियां बनाता घूम रहा है. बांदा का एसपी जेल में बैठकर पीड़ित लड़की पर दबाव बना रहा है. ऐसे भ्रष्टतम बिहारी-यूपी माहौल में आप कैसे कल्पना कर सकते हैं कि कामन लोगों को इंसाफ मिलेगा. इंसाफ तो अब सत्ता में बैठे दलालों, नेताओं, अफसरों आदि की रखैल है.

Comments on “विधायक हत्याकांड : पत्रकार को पुलिस ने उठाया

  • Lokenath Tiwary Kolkata says:

    The Bhadas should lead in this episode as Torch bearer & we should compell the Bihar govt. to be transparent and investigate the truth of slain MLA.
    The journalist Navlesh Pathak should be released immediately without delay.

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  • Lokenath Tiwary Kolkata says:

    जब सभी चाटुकार और भ्रष्ट हो गए हैं और मीडिया भी बिना गांड गरदन की हो गई है तो इस तरह की फटना तो घटेगी ही।
    यह घटना सावधान करती है, उन तथाकथित समाज के ठेकेदारों (प्रशासन, मीटिया) को जिन से आम जनता मदद की गुहार करती है, कि संभल जाओ, वरना दलालों व सुअरों की मौत मरोगे…
    हां भड़ास भी उसी जमात में शामिल हो जाए तो कोई नई बात नहीं..लेकिन ऐसी आशा नहीं है….हम तो रूपम जैसों को सलाम करते हैं….

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  • Is prakaran me media aur budhijivi varg ko vaise he sakriya hone ki avashyakta hai jaise vo Jessica lal, priyadarshini Matto jaise hatyakandon me sakriya hui thi. Isi dabav me peedita ko nyaya mil sakta hai anyatha is lule langde system se koi ummeed nahi ki ja sakti.

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  • Madhepura Times says:

    जांच साफ़ सुथरे ढंग से हो पायेगा,इसमें संदेह तो है ही.
    [url]www.madhepuratimes.com[/url]

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  • girish kesharwani raipur says:

    bihar ki ghana badbudar sadi hui system ka ek namuna hai. bhavishy me har pidit paksh nyay n milne ki sthiti me rupam ke hi nakshe kadam par chalne ko vivash hoga |

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  • SANJEEV SHARMA says:

    एक पत्रकार को सच लिखने की कीमत तो चुकानी ही पड़ेगी …..पत्रकार ने जो स्क्रिप्ट लिखी वो तो सबने पढ़ ली होगी लेकिन एक स्क्रिप्ट अब यहाँ की पुलिस लिखेगी …जब तक पत्रकार बंदु इन नेताओ की चाटुकारिता …पुलिस की चापलूसी बंद नहीं करते तब तक पुलिस इस तरह की स्क्रिप्ट लिखती रहेगी …. अब भी मौका है हम सबको एक साथ खड़े हो कर यह बताना होगा की कलम पर हमला करने से सच मरता नहीं बल्कि और तीखा हो जाता है…… अगर पुलिस अपने मिशन – कामयाब हो गयी तो …अगले सच लिखने की कीमत चुकाने के लिए आपको त्यार रहना होगा …….. आपका संजीव
    http://www.voiceofpress.com

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  • राजेश मंडल says:

    इस मां को सलाम है। बीजेपी और नीतिश अपने इस नेता के गुनाहों को स्वीकार लें तो जनता की नजरों में उसकी इज्जत बढ़ेगी ,घटेगी नहीं।

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  • किशोर राजपाल says:

    :'( साहसी रिपोर्ट के लिए भड़ास के प्रति आभार व्यक्त करता हूं. और नेता-कमीन पत्रकारों को लानत मलानत और बददुआएं ऐसी कि सालों का उठना बंद हो जाए.

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  • “jab kabhi bhi jannato to neelam kiya jaiga sirf aurat ko hi badnaam kiya jaiga”ladna her kisi ke bas ki baat nahi jo ladte hein aker pagal ya deewane kah ker hasi ka to kabhi nafrat ka paater bante hein itna hi nahi kai baar unhen apno ki khatir chup rahna padta hai ,zulm ke khilaf ladna bahot log chahte hein mgr unka saath dene wale kitne hein,logo se ummid kerna bewkofi hai sab bahot busy hein apne kaam or zindgi me ,yahi kahungi jise chot lage wo chhillaye, madad wo rab kerta hai,akser dusro ki zindgi se khelne wale ye bhul jate hein jab kisi ka derd hadse guzer jaiga to tumhe duniya ka koi kona nahi milega khudko chhupane ke liye wahi haal hoga jo bechare nerk wasi vidhayak ka hua,indian leaders ki hakiakat desh ka konsa aisa sakhs hai jo nahi janta, ab rupam pathak ne jo kiya uske pichhe ki sachchai to rupam or raj kishori kaisri hi janta tha,akser neta apne kisi bhi sathi ki hatya ko rajnetik hatya kah ker uski kaali kertut per parda daalte nazar aate hein wajah saaf hai unka khudka daaman konsa saaf hai,kai baar be kusur bhi mare jate hein mgr jab talaw ka pani hi ganda or zehrila ho to kaise yakin kerlen ki ye machhali zehrili nahi thi.

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  • मदन कुमार तिवारी says:

    सुशील मोदी ने तो बडे अखबारों को जाने – अंजाने कठघरे में खडा हीं कर दिया । ह्त्या के तुरंत बाद उनका बयान था की एक छोटा अखबार को छोडकर किसी बडे अखबार ने बलात्कार वाली रिपोर्ट नही छापी। मैं जब बडे चमचे अखबार और चटुकार पत्रकारों के बारे में , तथा नीतीश के भ्रष्टाचारी शासन के विषय में टिप्पणी करता था तो इसी भाडास पर गाली भी सुनता था। अब कहां है गाली देने वाले बंधु । अभी ईवीएम के जिन्न वाला मामला भी खुलेगा , तब पता चलेगा कैसे इतनी सीटे हासिल हुई।

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  • समदर्शी प्रियम says:

    पता नहीं ख़बर में कितनी स्तयता है ?
    आज तो हर ख़बर को तोङ मरोङ कर भी पेश किया जा रहा है !
    वैसे शासक कल भी शासक हीं था और आज भी !
    बस देश , काल और समय मे बदलाव आया है!

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