शासन के दलालों को नहीं भा रहे हैं सच खोलने वाले पत्रकार

: लखनऊ की घटना के विरोध में प्रदर्शन :  उत्तर प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था के खिलाफ सरकार सच सुनने के लिये किसी भी कीमत पर तैयार नही है। प्रदेश की राजधानी में दो सीएमओ की हत्या फिर हत्या में मुख्य आरोपी की जेल में हत्या के खबरों के पीछे की सच्‍चाई बताने वाले आईबीएन7 के पत्रकारों पुलिसवालों के हमला तानाशाही का नमूना है। इस हमले का पूरे प्रदेश में विरोध हो रहा है। जगह- जगह लोग यूपी सरकार और पुलिस के रवैये की निंदा कर रहे हैं।

शाहजहांपुर के पत्रकारों ने इस घटना का विरोध करते हुए राज्‍यपाल के नाम एक ज्ञापन सिटी मजिस्‍ट्रेट के माध्‍यम से भेजा। मीटिग में शाहजहांपुर के सभी पत्रकारों ने भाग लिया।  मीटिग में सभी ने कल की घटना पर गहरा रोष प्रकट किया और एकजुट होकर कलेक्‍ट्रेट पहुंचे। वहां जमकर सरकार विरोधी नारेबाजी की। पत्रकारों ने मांग की कि शलभ मणि त्रिपाठी के साथ हुई घटना की न्यायिक जांच कराई जाये साथ ही दोषी पुलिस अधिकारियों को जेल भेजा जाये। पत्रकारो की सुऱक्षा के लिये कानून बनाने की मांग भी की।

मीटिंग में वरिष्ठ पत्रकार सुनील अग्निहोत्री, डा. आफताब अख्तर, इरफान खॉ, आरिफ सिद्वीकी, संजीव गुप्ता, शैलेन्द्र वाजपेई, आनन्द मोहन पाण्‍डेय, राजबहादुर सिंह, दीप श्रीवास्तव, ऋषि श्रीवास्तव, सौरभ दीक्षित, रीतेश माथुर, संजय श्रीवास्तव, सरदार शर्मा, अम्भुज मिश्रा, विनय पांडे, सुदीप शुक्ला, महामूद खॉ, सुशील शुक्ला, पंकज गुप्ता, राजेश कुमार, प्रमोद पांडे, नन्हे राठौर, आलेनवी,राशिद शान मोहम्मद, स्वदेश शुक्ला, अवनीश मिश्रा,  सुधांशु श्रीवास्तव समेत कई लोग उपस्थित रहे।

इसी क्रम में गाजीपुर के पत्रकारों ने भी इस घटना की निंदा की। पत्रकारों ने कहा कि शलभमणि एवं मनोज राजन लाठी-डंडे से पीटकर घायल करने की घटना ने पूरे प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगा दिया है।  गाजीपुर पत्रकार एसोसिएशन व जनपद के अन्य पत्रकारों ने इस घटना की कड़ी निन्दा करते हुए जिला मुख्यालय पर हाथों मे काली पट्टी बांधका जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया तथा उत्तर प्रदेश की सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार कार्तिक कुमार चटर्जी ने कहा कि कलम से लेकर कम्प्युटर तक के इस युग में पत्रकारिता का स्थान संविधान के चौथे स्तम्भ के रूप में माना गया है, उसके साथ इस तरह का व्‍यवहार निंदनीय है। पत्रकार राजेश दुबे ने हमले की निन्दा करते हुए कहा कि जेडे हत्याकाण्ड सहित पूरे देश में जिस तरह से मनमाने ढंग से सरकार पत्रकारों का उत्पीड़न कर रही है, वह कहीं न कहीं उनकी उस तानाशाही नीति को स्पष्ट दर्शाती है। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएमओ डा. सचान हत्याकाण्ड से जुड़ा है। यह सुनियोजित हत्या सत्ताधारी सफेदपोशों के इशारे पर किया गया है।  संगठन के महामंत्री अनिल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की।

इस दौरान अनिल उपाध्याय, मोहन तिवारी, अनिल कुमार, उधम सिंह, बबलू राय, आशीष सिंह, विनोद, मनीष मिश्रा, सूर्यवीर सिंह, राजेश खरवार, संजीव, अखिलेश, शशिकान्त, बेदू, आरिफ, राजेश, प्रवीन, आशीष शुक्ला, अशोक श्रीवास्तव, श्याम सिन्हा, कन्हैया, नवीन, विनय कुमार सिंह, संजय चौरसिया, दानिश उपस्थित थे। अन्त में राज्यपाल को कार्यक्रम के अध्यक्ष कार्तिक कुमार चटर्जी ने जिलाधिकारी के माध्यम से पत्रक सौपा।

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Comments on “शासन के दलालों को नहीं भा रहे हैं सच खोलने वाले पत्रकार

  • भाईयो ……माया से मांग करो की महारास्ट्रा के तर्ज पर पत्रकारो के सुरछा कानून लाये…. यहाँ ये पास भी हो जायगा ….कोई भी विरोध नहीं होगा …..!माया बहुमत में जो है …!

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  • Krishna Murari Pandey 094314 48840 says:

    Uttar Pradesh Nahi Janaab, UDAND PRADESH Khiye. Apni Dal Galane Ke Liye to Saasan Ke Dalal Apni Maa-Bahan Bhi chu…..waa lenge…………

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