हिंदुस्तान, लखनऊ और पटना से एक-एक विकेट गिरा

हिंदुस्तान लखनऊ और पटना से दो मजबूत विकेट गिरने की खबर है. लखनऊ में संपादकीय विभाग में कार्यरत मनीष शर्मा के बारे में सूचना है कि वे संस्थान से इस्तीफा देने वाले हैं. उनके बारे में पुख्ता खबर है कि वे नई पारी की शुरुआत अमर उजाला, कानपुर में बतौर न्यूज एडिटर करने जा रहे हैं. मनीष हिंदुस्तान, लखनऊ में फिलहाल डिप्टी न्यूज एडिटर हैं. अभी तक उन्होंने इस्तीफा दिया नहीं है. माना जा रहा है कि अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो वे जल्द इस्तीफा देकर अमर उजाला ज्वाइन कर लेंगे.

उधर, हिंदुस्तान, पटना में विज्ञापन विभाग में कार्यरत डिप्टी जनरल मैनेजर पुनीत खंडेलिया के इस्तीफा देने की सूचना है. पुनीत ने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान से ही की, वर्ष 1993 में. तबसे वे हिंदुस्तान के साथ बने रहे. पुनीत के करीबी लोगों का कहना है कि वे बेहतर अपारचुनिटी मिलने के कारण हिंदुस्तान से अलग हुए हैं. वहीं, कुछ अन्य का कहना है कि नए दौर में कामकाज को लेकर पुनीत की कुछ लोगों से नहीं बन रही थी, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दिया.

उधर, दैनिक जागरण, नोएडा से विभाष सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया है. पंजाब केसरी, जम्मू आफिस से नितिशा ठाकुर के इस्तीफे की सूचना है. अमर उजाला, मुरादाबाद में बतौर रिपोर्टर कार्यरत सुशील कुमार ने इस्तीफा देकर दैनिक जागरण, मेरठ ज्वाइन किया है.

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Comments on “हिंदुस्तान, लखनऊ और पटना से एक-एक विकेट गिरा

  • मुसाफिर बैठा says:

    ‘विकेट गिरने की खबर’ वाक्यांश में जो भाव अन्तर्हित है उससे तो मीडिया संस्थानों के द्वारा ही विकेट चटकाने का भाव आता है, स्वेच्छा से कूच करने का नहीं.
    ‘हिंदुस्तान’ और ‘दैनिक जागरण’ दो बड़े प्रसार संख्या वाले स्थानीय दैनिक हैं, जागरण जहां हिंदुत्व और उच्च कही जाने वाली जातियों का पक्षपोषण करता है वहीं ‘हिंदुस्तान’ इस मामले में काफी हद तक नरम है, हाँ, सरकार का अन्धानुराग अभी सर्वाधिक हिंदुस्तान ही दिखलाता है. यह अखबार अथवा प्रायः दूसरे भी, अपने कर्मियों का श्रम शोषण जितना करता है उसके अनुपात में काफी कम पारिश्रमिक देता है. जबकि इन्हें कुछ भी लिखने को मजबूर किया जाता है. आजकल तो बिहार सरकार की चरण बंदगी के इर्द-गिर्द ही इस् पात्र का अधिकांश मुलाजिम अपनी मेधा का निवेश करता दीखता है.
    कहाँ तो कभी पीत पत्रकारिता की अवधारणा आई और अभी पद न्यूज का निर्लज्ज जमाना आ गया है.
    मुझे नहीं कयास कि क्यों ये बड़े पत्रकार अपने मालिकों के कोपभाजन बने हैं. कारण जो हो, नकारात्मक ही होगा, कोई दृष्टिपूर्ण कार्य के प्रति इनकी संलग्नता तो मूल में नहीं ही होगी, प्रबंधन का कोई स्वार्थ इनसे अब पूरा न होता होगा.
    अखबारें जन प्रहरी की भूमिका खाक निभा पाएंगे जब उसके पत्रकार ही निर्बल दृष्टिहीन और अधिकारहीन हैं.

    Reply
  • मुसाफिर बैठा says:

    ‘विकेट गिरने की खबर’ वाक्यांश में जो भाव अन्तर्हित है उससे तो मीडिया संस्थानों के द्वारा ही विकेट चटकाने का भाव आता है, स्वेच्छा से कूच करने का नहीं.
    ‘हिंदुस्तान’ और ‘दैनिक जागरण’ दो बड़े प्रसार संख्या वाले स्थानीय दैनिक हैं, जागरण जहां हिंदुत्व और उच्च कही जाने वाली जातियों का पक्षपोषण करता है वहीं ‘हिंदुस्तान’ इस मामले में काफी हद तक नरम है, हाँ, सरकार का अन्धानुराग अभी सर्वाधिक हिंदुस्तान ही दिखलाता है. यह अखबार अथवा प्रायः दूसरे भी, अपने कर्मियों का श्रम शोषण जितना करता है उसके अनुपात में काफी कम पारिश्रमिक देता है. जबकि इन्हें कुछ भी लिखने को मजबूर किया जाता है. आजकल तो बिहार सरकार की चरण बंदगी के इर्द-गिर्द ही इस् पात्र का अधिकांश मुलाजिम अपनी मेधा का निवेश करता दीखता है.
    कहाँ तो कभी पीत पत्रकारिता की अवधारणा आई और अभी पद न्यूज का निर्लज्ज जमाना आ गया है.
    मुझे नहीं कयास कि क्यों ये बड़े पत्रकार अपने मालिकों के कोपभाजन बने हैं. कारण जो हो, नकारात्मक ही होगा, कोई दृष्टिपूर्ण कार्य के प्रति इनकी संलग्नता तो मूल में नहीं ही होगी, प्रबंधन का कोई स्वार्थ इनसे अब पूरा न होता होगा.
    अखबारें जन प्रहरी की भूमिका खाक निभा पाएंगे जब उसके पत्रकार ही निर्बल दृष्टिहीन और अधिकारहीन हैं.

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  • मुसाफिर बैठा says:

    ‘विकेट गिरने की खबर’ वाक्यांश में जो भाव अन्तर्हित है उससे तो मीडिया संस्थानों के द्वारा ही विकेट चटकाने का भाव आता है, स्वेच्छा से कूच करने का नहीं.
    ‘हिंदुस्तान’ और ‘दैनिक जागरण’ दो बड़े प्रसार संख्या वाले स्थानीय दैनिक हैं, जागरण जहां हिंदुत्व और उच्च कही जाने वाली जातियों का पक्षपोषण करता है वहीं ‘हिंदुस्तान’ इस मामले में काफी हद तक नरम है, हाँ, सरकार का अन्धानुराग अभी सर्वाधिक हिंदुस्तान ही दिखलाता है. यह अखबार अथवा प्रायः दूसरे भी, अपने कर्मियों का श्रम शोषण जितना करता है उसके अनुपात में काफी कम पारिश्रमिक देता है. जबकि इन्हें कुछ भी लिखने को मजबूर किया जाता है. आजकल तो बिहार सरकार की चरण बंदगी के इर्द-गिर्द ही इस् पात्र का अधिकांश मुलाजिम अपनी मेधा का निवेश करता दीखता है.
    कहाँ तो कभी पीत पत्रकारिता की अवधारणा आई और अभी पद न्यूज का निर्लज्ज जमाना आ गया है.
    मुझे नहीं कयास कि क्यों ये बड़े पत्रकार अपने मालिकों के कोपभाजन बने हैं. कारण जो हो, नकारात्मक ही होगा, कोई दृष्टिपूर्ण कार्य के प्रति इनकी संलग्नता तो मूल में नहीं ही होगी, प्रबंधन का कोई स्वार्थ इनसे अब पूरा न होता होगा.
    अखबारें जन प्रहरी की भूमिका खाक निभा पाएंगे जब उसके पत्रकार ही निर्बल दृष्टिहीन और अधिकारहीन हैं.

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  • Bhai saheb,

    Hindustan main to pata nahin kya ho raha hai. Punit ke chodne ke bad lagta hai ki jaise bhgdar hi much gaye hai. Koi upay hi kam nahin aa raha hai. Jitne Hndustani Hindustan main dikhte hain us se jayada to Prabhat Khabar ke chakkar lagate najar aate hain. Shailja aur Dushyant Verma nain Hindustan to tata kah diya aur aise sune jata hai ki aane wale dinon main aue bahut se log line main hai.
    Bhagwan jane kya hogo?????

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  • Dear Sir,

    This is really ironic that almost all marketing staff apart from Unit Head of Hindustan Bhagalpur Unit has been brought from Allahabad. It is also heard that Commercial Head has also been brought from Allahabad. Even labour contractor is being brought from UP. Taxi contractor/agents/agencies/labours all are coming from UP in Hindustan Bihar.

    It seems that people who created Hindustan Bihar are nowhere in the picture and people who destroyed Hindustan UP are calling the shots. It is also heard that Captain of “Band Party” has been given ultimatum to make Hindustan UP to number one and that’s why all rejected but near & dear items are being supplied to Bihar.

    [b]God Save the Bihar[/b]

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