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दुख-दर्द

अतुल माहेश्‍वरी का जाना पत्रकारिता की बड़ी क्षति

अमर उजाला के स्वामी अतुल माहेश्वरी के निधन को रुद्रपुर के पत्रकारों, साहित्यकारों ने बेहतर पत्रकारिता के लिए बड़ी क्षति बताया है। एक शोक सभा में पत्रकारिता में उनके योग्यदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अमर उजाला को सर्वप्रिय अखबार बनाया क्योंकि अमर उजाला में सभी विचारों को समान स्थान मिलता था। शोक व्यक्त करने वालों में कश्तूरी लाल तागरा, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष मा. प्रताप सिंह, लेखक-पत्रकार अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, समाजशास्त्र के प्रोफेसर सुभाष वर्मा, शैलेय, अरविंद सिंह, नरेश कुमार, प्रहलाद कार्की, बीसी सिंघल आदि शामिल रहे।

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0 Comments

  1. poonam

    January 4, 2011 at 3:47 pm

    अतुल जी पत्रकारिता के ऐसे ओजस्वी स्तंभ थे जिनका जाना अमर उजाला के लिए ही नहीं बल्कि हम सब पत्रकारों के लिए व्यक्तिगत छति है जो अपनी तेज-तर्रार छवि के साथ अमर उजाला में अपना भविष्य सदैव सुरक्षित देखते थे …… लेकिन अब लगता है कि पत्रकारिता का आसमान अतुलजी सरीखे ओजवान और दैदिप्तमान दीपक से महरूम हो गया है

  2. sughar singh

    January 4, 2011 at 2:24 pm

    written by sughar singh, January 04, 2011
    durbal ko na sataiye jaaki moti haay.mui khaal ki swaans te khaal bhasm ho jaaye
    ye kahawat atul maheswri par puri tarah fit bethti hai.ye bhi sahi hai ki chori ladka karta hai aur saja baap ko milti hai.atul maheshwari ne pure amar ujala ko hadpa devta jaise insaan ashok agrwaal ko bhi dhokha diya.ashok agrawaal ke sabhi karibiyo ko baahar ka raasta dikha diya.aaj unke ghar khusi ka maahol hoga .dinesh juyaal aur raajul maheshwri bhi is paap me barabar ke bhagidar hai .unko bhi amar ujala se nikaale gaye karmchariyon ki baddua jyaada samay tak jine nahi degi.
    rajul maheshwari aur dinesh juaal atul maaheswri ke kaatil hai .garibo ki haay atul maheswri ko le dubi
    sughar singh saifai etawah.09412408677.09457262323.9997902006.08923830001.08923830003.9027639292

  3. vipinvishnoi

    January 4, 2011 at 9:28 am

    श्री अतुल माहेश्वरी का इस तरह अचानक चले जाना एक पीड़ा दे गया । सच है जब पत्रकारिता पूरी तरह व्यवसायिक हो गई हो ऐसे में उसके उशूलों की बात बेमानी है। बावजूद इसके पत्रकारिता के सिद्धांतों को समझने व मानने वाले अतुलजी एक मिशाल रहे। पत्रकारिता का मर्म समझने वाले ऐसे व्यक्ति के बिछड़ने की पीड़ सभी पत्रकारों होगी। मेरी तरफ से अतुल जी को विनम्र श्रद्धांजलि।विपिन विश्नोई, पत्रकार, भोपाल

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