पहले हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने पर उच्च वेतनमान पर नौकरी पाना बहुत आसान नहीं था, खासकर प्रबंधन व आईटी क्षेत्रों में गरीब विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा न प्राप्त कर पाने के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियों में मोटी तनख्वाह पर रोजगार पाने में असमर्थ हो जाते थे, लेकिन अब हिंदी के बूते मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी अपना लक्ष्य पूरा कर सकेंगे, क्योंकि हिंदी भाषा को ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में समृद्ध करने तथा रोजगारोन्मुख बनाने के उद्देश्य से स्थापित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), वर्धा ने पहली बार दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से मैनेजमेंट के क्षेत्र में मास्टर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (एमबीए), बैचलर ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (बीबीए), पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट (पीजीडीबीएम), डिप्लोमा इन बिजनेस मैनेजमेंट (डीबीएम) की पढ़ाई शुरू की है.
एमबीए व बीबीए जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम को हिंदी माध्यम से चलाए जाने के संदर्भ में विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय कहते हैं कि इससे पहले प्रबंधन जैसे व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को हिंदी में चलाया जाना एक मिथक के रूप में लिया जाता था, लेकिन इस विश्वविद्यालय ने जोखिम उठाकर यह साबित कर दिखाया कि प्रबंधन पाठ्यक्रम हिंदी माध्यम से भी चलाए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में से एक है. अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियां हिंदी के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहती हैं. हिंदी माध्यम से एमबीएम करने पर तुरंत ही रोजगार मिलेगा क्योंकि हिंदी अधिकांश उपभोक्ताओं की भाषा है. यहां से एमबीए करने वाले किसी भी कंपनी में बेहतर ढंग से काम कर सकेंगे.
दूरस्थ शिक्षा केन्द्र के निदेशक व प्रतिकुलपति प्रो. ए अरविंदाक्षन का कहना है कि दरअसल यह संस्थान उन सभी व्यक्तियों के लिए रोजगारपरक शिक्षा प्राप्ति का एक बेहतर अवसर प्रदान कर सकेगा जो चाहत रखते हुए भी किसी कारण से प्रबंधन की पढ़ाई नही कर सकते हैं. प्रबंधन पाठ्यक्रमों के संयोजक डा. एमएम मंगोडी ने बताया कि हिंदी माध्यम से और खासकर घर बैठे एमबीए की पढ़ाई कराने की मंशा को लोग खूब सराह रहे हैं, यही कारण है कि गत वर्ष गरीब और हाशिए के लोग भी एमबीए की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लिया.
दरअसल यहां विद्यार्थियों को प्रबंधन के सिद्धांत के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान से भी रू-ब-रू कराया जाता है ताकि प्रबंधन पाठ्यक्रमों में दक्षता एवं विश्वास एक साथ पैदा हो सके. विपणन प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, उत्पादन एवं परिचालन प्रबंधन, व्यवसायिक वातावरण, व्यवसायिक नीतियां एवं रणनीतिक प्रबंधन, प्रबंधन सूचना प्रणाली एवं संगणक अनुप्रयोग, व्यावसायिक नियामक प्रारूप तथा वैकल्पिक के रूप में विपणन, मानव संसाधन प्रबंधन एवं बीमा, वित्तीय प्रबंधन आदि विषयों को एमबीए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है. नामांकन के लिए उम्र सीमा निर्धारित नहीं है.
सुधाकर बघेल स्वीकारते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से नौकरी करनी पड़ी, कंपनी के मित्र कहते थे कि आपको एमबीए की डिग्री कर लेनी चाहिए पर अंग्रेजी अच्छी न होने के कारण यह मेरे लिए एक सपना था जिसे हिंदी विश्वविद्यालय ने पूरा किया. निश्चित रूप से हम नौकरी करते हुए एमबीए की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं.
प्रवेश हेतु आवेदन कैसे प्राप्त करें : प्रवेश हेतु आवेदन पत्र वेबसाइट www.hindivishwa.org से डाउनलोड कर आवेदन पत्र के साथ राष्ट्रीयकृत बैंक से तीन सौ रूपये का डीडी निदेशक, दूरस्थ शिक्षा केन्द्र, म.गा.अ.हि.वि.वि. के नाम से जो वर्धा में भुगतान हो, भेजना होगा. बैंक डिमांड ड्राफ्ट के पीछे नाम, पता व पाठ्यक्रम का नाम लिखकर निदेशक, दूरस्थ शिक्षा केन्द्र महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, गांधी हिल्स, वर्धा (महाराष्ट्र) के पते पर भेजना होगा. इसे स्वयं या डाक से 350 रूपये का डीडी देकर प्राप्त किया जा सकता है.
प्रवेश हेतु पात्रता : एमबीए तथा पीजीडीबीएम हेतु किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक. बीबीए तथा डीबीएम हेतु 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए.
अध्ययन शुल्क : अध्ययन शुल्क बहुत ही कम है.
प्रवेश प्रक्रिया : एमबीए व पीजीडीबीएम में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा देनी होती है तथा अन्य पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश दिया जाता है.
विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं : दूरस्थ केन्द्र के दिल्ली, लखनऊ, इलाहाबाद सहित देशभर में करीब 250 अध्ययन केंद्र हैं. अध्ययन केन्द्र में विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ्ा इंटरनेट युक्त संगणक केंद्र आदि की सुविधाएं प्रदान की जाती है. विद्यार्थियों को नामांकन के उपरांत अध्ययन सामग्री उनके घर पर भेजी जाएगी. परीक्षार्थी के निकटवर्ती अध्ययन केन्द्र में परीक्षा ली जाएगी. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए उनके जनपद के समाज कल्याण अधिकारियों से छात्रवृत्ति प्राप्त करने का अवसर भी है.
विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा अंतर्गत एमबीए, बीबीए आदि पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु नामांकन प्रक्रिया शुरू है. अंतिम तिथि 28 फरवरी तथा विलम्ब शुल्क सहित 30 मार्च 2011 तक है. पाठ्यक्रमों की विस्तृत जानकारी हेतु विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.hindivishwa.org पर लॉग-आन किया जा सकता है. साथ ही संयोजक, एमबीए व बीबीए पाठ्यक्रम, दूरस्थ शिक्षा केन्द्र, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, गांधी हिल्स, वर्धा (महाराष्ट्र) व दूरभाष वर्धा 07152 – 232957, 251613, नई दिल्ली 011 – 41613875, इलाहाबाद 0532 – 2424442 तथा लखनऊ 0522 – 2335667 पर संपर्क किया जा सकता है. प्रेस विज्ञप्ति
अमित बिश्वास महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में पब्लिसिटी आफिसर तथा रिसर्च स्कॉलर हैं.












raja jani
December 24, 2010 at 10:48 am
hindi bhashi students k liye acchhi khabr hai