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अमर उजाला से विदा किए गए अरविंद मोहन

पिछले साल मार्च महीने में अमर उजाला में एग्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर ज्वाइन करने वाले अरविंद मोहन के बारे में खबर है कि उनका संस्थान से नाता समाप्त हो चुका है. सूत्रों के मुताबिक अमर उजाला प्रबंधन से अनबन के कारण अरविंद मोहन को जाना पड़ा. ग्रुप के सभी वरिष्ठ लोगों को सूचित कर दिया गया है कि अरविंद मोहन अब संस्थान के हिस्से नहीं हैं, इसलिए उनसे अब कामकाज के लिहाज से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं रखा जाए.

पिछले साल मार्च महीने में अमर उजाला में एग्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर ज्वाइन करने वाले अरविंद मोहन के बारे में खबर है कि उनका संस्थान से नाता समाप्त हो चुका है. सूत्रों के मुताबिक अमर उजाला प्रबंधन से अनबन के कारण अरविंद मोहन को जाना पड़ा. ग्रुप के सभी वरिष्ठ लोगों को सूचित कर दिया गया है कि अरविंद मोहन अब संस्थान के हिस्से नहीं हैं, इसलिए उनसे अब कामकाज के लिहाज से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं रखा जाए.

कुछ लोगों का कहना है कि अरविंद मोहन के कामकाज को लेकर प्रबंधन संतुष्ट नहीं था. वहीं कुछ का कहना है कि यशवंत व्यास से मतभेद के कारण अरविंद मोहन को जाना पड़ा. इस बारे में जब भड़ास4मीडिया ने अरविंद मोहन से बात की तो उन्होंने अमर उजाला से इस्तीफे की खबर को गलत बताया और उनका कहना था कि वे अब भी अमर उजाला के साथ हैं. पर सूत्र कहते हैं कि करीब महीने भर से अरविंद मोहन नोटिस पीरियड पर चल रहे थे और अब फाइनली उनकी विदाई हो गई है.  अरविंद मोहन 30 वर्षों से मीडिया में है. हिंदुस्तान, इंडिया टुडे, जनसत्ता सरीखी पत्र-पत्रिकाओं में काम कर चुके अरविंद मोहन जागरण के मीडिया स्कूल में भी पढ़ाते रहे हैं.

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0 Comments

  1. santosh singh

    May 18, 2011 at 4:55 pm

    आज देश में अरबिंद मोहन जैसे कितने पत्रकार हैं ….??? दस भी बड़ी मुश्किल से मिलेंगे….उनके साथ भी दलाल टाइप के लोग राजनीति करने से बाज नहीं आये….???
    ये पत्रकारिता का दुर्भाग्य ही है ….अरबिंद मोहन किशी संस्था के मोहताज नहीं …वो खुद में एक संस्था हैं….!!!!!!!!!!

  2. एक पत्रकार

    May 18, 2011 at 4:21 am

    बेशक किसी ना किसी की वजह से ही तो जाना पड़ा होगा। लेकिन लगता है कि अब राजुल जी ने अभियान शुरु कर दिया है। चलो देर आयद दुरुस्त आयद।

  3. anil pande

    May 18, 2011 at 8:00 am

    यशवंत व्यास की भी विदाई होगी . CEO राजुल ने KHOJ शुरु कर दी है.

    NA KOI RAHA HAI, NA KOI RAHEGA !

  4. दीपक

    May 18, 2011 at 10:44 am

    अरविंद मोहन अगर संस्थान से विदा किए गए हैं तो यह संस्थान का दुर्भाग्य है। राजुल माहेश्वरी न तो दूर द्रष्टा हैं और न ही अच्छे प्रोफेशनल क्योंकि उऩका कदम यही साबित करता है। इस संस्थान से पिछले साल कई वरिष्ठ पत्रकार जुड़े और उन्होंने संस्थान को बेहतर बनाने की कोशिश की। लेकिन जिन वायदों के साथ यशवंत व्यास और अजय उपाध्याय आए उसमें वो पूर्ण तौर पर असफल रहे। जिस व्यक्ति ने पिछले एक साल तक उक्त लगातार संपादकीय लिखा हो और वो भी विभिन्न मुद्दों पर उसको संस्थान कैसे विदा कर सकता है। अरविंद जी पिछले ३० सालों से पत्रकारिता में हैं और तकरीबन उतने ही सालों से विभिन्न अखबारों के लिए संपादकीय लिख रहे हैं। अमर उजाला में बैठे यशवंत व्यास औऱ अजय उपाध्याय ने कितनी खबर और कितने संपादकीय लिखे हैं अपने जीवन में जो यह राजुल माहेश्वरी को समझा रहे हैं कि अरविंद जी को विदाई दी जाए। वैसे फिलहाल अरविंद जी बने हुए हैं। दीपक

  5. trimpoo@g

    May 18, 2011 at 7:32 pm

    Rajul ji me Atul Maheshvari ji se tulna nahi kee ja sakti,dono ke kaam ka trika alag hai, par Rajul ji agar Yashwant Vyas aur Ajay Uppadhya se nijaat paane kee soch rahe hain, to apne bade bhai ki galti ko sudharne kee disha me mahatvpooran kadam hoga. Sudhir Aggarwal ne to Yashwant Vyas se noijaat paa li, par Amar Ujjala ne bina vajah hi musibat moll li, news ke naam par kuchh nahi jaante,samajhdar patrkaron se door bhagte hain……….hindi patarkirta ka durbhagya hai ko bandar malai chat rahe hain…….Ajay Uppadhya se to phir bhi loi umeed ki ja sakti hai, vah tap kar hi kundan bane hain, jagran ke bureau to trashne aur hindi ka behtreen bureau banane ka shrey Ajay Uppadhya ko hi jata hai……..par yaswant vyas to siraf cutting paste editor hain. aou kaya kuda likh rahe hain….kaya Rajul Maheshwari ji ….Yashwant Vyas ka koi poora lekh padh sakte hain.

  6. एक पत्रकार

    May 19, 2011 at 4:34 am

    अरविंद मोहन जी इतने काबिल हैं तो उनको क्या घबराना जल्द ही कहीं फिर नौकरी मिल जायेगी।

  7. हमका मौका दई दो...

    May 19, 2011 at 6:13 am

    इस बात की क्या गांरटी है कि अरविंद जी को यशवंत व्यास ने ही निकलवाया होगा।
    यशवंत व्यास इतने ही ताकतवर हैं तो अब तक समूह संपादक क्यों नहीं बन सके हैं। राजुल जी भले ही अब तक लो प्रोफाइल रहे हों लेकिन धृतराष्ट्र नहीं हैं। करोड़ों का साम्राज्य संभाल रहे हैं, कुछ देखा होगा तभी तो अरबिंद मोहन की छुट्टी की है। सिर्फ तीस साल से पत्रकारिता करते रहना योग्यता की गारंटी नहीं हो सकती है। वैसे अरविंद जी को अब आराम करना चाहिये और नौजवान पत्रकारों के लिये रास्ता छोड़ देना चाहिये। जिस तरह उनको भांजे-भतीजों की चिंता है दूसरों के भी तो बेटे, भांजे-भतीजे हो सकते हैं जिनको 30-30 साल से जमे लोगों की वजह से पत्रकारिता में घुसने का या आगे बढ़ने का मौका ही नहीं मिल पा रहा हो। अरविंद जी बहुत हुआ आराम कीजिये।

  8. free lancer

    May 22, 2011 at 11:29 am

    arvind ji one of nice n gentalman in journalism

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