
‘आंखों देखी’ का पत्रकार शानू
शानू के साथ पुलिस ने हरदोई रेलवे स्टेशन की आरपीऍफ़ पोस्ट पर तैनात सब इन्स्पेक्टर बीडी राम समेत तीन महिलाओं को भी जेल भेजा है. इन लोगों पर एक लड़की के साथ बंधक बनाकर जबरन बलात्कार करने और देह व्यापार अधिनियम के तहत कारवाई की गयी है. यह कहानी केवल ‘आँखों देखी’ की नहीं, कई और ऐसे न्यूज़ चैनलों और समाचार पत्रों की भी
है जिन्होंने बिना किसी जांच के पत्रकार नहीं बल्कि भडुए और दलाल मैदान उतार दिए हैं. ऐसे दल्लों के कारण पत्रकारों की गरिमा ना के बराबर हो गयी है.
अपने को ”आँखों देखी” का पत्रकार बताने वाले शानू के पास साल भर में ही अल्टो कार आ गई थी. इस कार पर लाइव टीवी के बड़े बड़े स्टीकर आगे और पीछे लगे थे. कहने वाले कहते हैं उसके पास जिस्म के धंधे का कारण ही पैसे आए. इस दल्ले पत्रकार के जेल जाने के बाद इसकी तथाकथित पांच बीवियों की भी जानकारी लोगों को हो चुकी है. इनमें से अधिकतर सरकारी नौकरी में हैं और इस दल्ले के कारण अपने परिवार को किनारा करके इसके जाल में फ़ंसी हैं. हालांकि इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है लेकिन जल्दी ही इसकी इस घिनौनी हरकत का भी खुलासा होगा. आखिर यह दल्ला पत्रकार पुलिस की पकड़ में कैसे आया. दरअसल इसकी दलाली की हकीकत एक मजबूर लड़की ने खोली.
पुलिस की पकड़ में आने के बाद शानू ने पुलिस को अपना रौब दिखाया. एक नेशनल और उसी के रीजनल चैनल के एक पत्रकार पूरी रात भर उसे बचाने के लिए पुलिस की चिरौरी करते रहे. शायद इसलिए कि उन्हें शानू ने एक बड़ी रकम देने की पेशकश की थी. इस दल्ले पत्रकार के पकड़े जाने के बाद पत्रकारों के मुंह पर कालिख पुत गई है. पता नहीं न्यूज़ चैनल और समाचार पत्रों के संपादक जागेंगे या ऐसे ही दल्लों को पत्रकार बनाकर पत्रकारिता के मुंह पर कालिख पोतते रहेंगे.

सेक्स रैकेट में पकड़ी गईं महिलाएं व युवतियां












कमल शर्मा
September 2, 2011 at 10:10 am
नीलिनी सिंह तो अपने को तीसमारखां पत्रकार समझती है और पत्रकारों के नाम पर भड़ए पाल रखें हैं। जय हो
MONU
September 2, 2011 at 11:47 am
vakai ?? ye sach hai .. agr hai to samaaj ka aaina kahe jane pale patrkaaro ko kaun sambhalne ka bira kaun uthayega ??
jhulan agrawal
September 2, 2011 at 1:48 pm
आज जल्दी पैसे और सोहरत कमाने के लिय इस तऱ्ह के पत्रकार इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मिडीया मे आ रहे है | जरुरत है उपर बैठे लोगो को इनके बारे मे पुरी जानकारी ईकठ्ठा करने के बाद इनको काम पर रखने की वरना आने वाले दिनो मे लोग देश का आईना ,और देश का चौथा स्तंभ ना कः कर कुछ और कहने लगेंगे |
kapil
September 2, 2011 at 2:07 pm
patrakarita ki aad me ese kukratyon ko karne vaale madarchodo ki vajah se sabhi patrkaron jo vakai me partkarita se sarokar rakhate hain ki garima ko bahut thes lagati hai.
amrendra srivastav
September 2, 2011 at 2:09 pm
यह कहानी केवल ‘आँखों देखी’ की नहीं, कई और ऐसे न्यूज़ चैनलों और समाचार पत्रों की भी है जिन्होंने बिना किसी जांच के पत्रकार नहीं बल्कि भडुए और दलाल मैदान उतार दिए हैं. ऐसे दल्लों के कारण पत्रकारों की गरिमा ना के बराबर हो गयी है. सही में पत्रकारों को ऐसी हरकत पर शर्म आती है. बेहद शर्मनाक…
abhishek.
September 2, 2011 at 4:18 pm
भैया मुझे तो यह बता दो की केबल यह दोपहर आँखों देखि आखिर चलता कहा पर हैं / कई चैनल तो ऐसे हैं जोकि दूंद्नी पर भी दिखाई नहीं देते हैं
rahul kumar
September 2, 2011 at 4:41 pm
aligarh mai bhi yhi hal hai
sudhir singh
September 2, 2011 at 7:54 pm
talab ki ek machli gandi hone se pure talab ko ganda kahna murkhta hai.samaj me har tarah ke log rahte hai.aur is kand ko lekar nalani maidam ya aankho dekhi chainal ko badnam karna aur doshi tahrana galat hai.aur aache patrakaro ke chayan ke liye national lebel par policy banni chahiye .aur agar man bhi le ki kuch patrakar gande hai to kya desh ke we neta jinko ham lakho vote dekar sadan me bhejte hai we galat nahi ho sakte ya we sarkari karmchari jinko naukari dene se paahle tamam charitra praman patra liye jate hai we galat nahi hote . mai bhi aankho dekhi chainal me 2 sal tak kam karchuka hu. sudhir singh –azamgarh u.p. 09454337444
rajesh kumar
September 3, 2011 at 8:19 am
bekuf agar paisa hi kamana tha sale apni maa-bahan ko bhade pe chalate.patakaro ki chawi dhumil karne pe kyu tule ho.sale bhaduye
SUNIL BAJPAI
September 3, 2011 at 9:21 am
DESH MEN AGAR SABSE ADHIK KAHIN BHRSTACHAR HAI PATRAKARITA JAGAT MEN HAIN. AGAR KUCHH KO APWAD MAN LIYA JAYE TO ES MAMAMLE MEN DESH KE HALAT BAHUT HEE BURE HAIN.AGAR EEMANDAR AUR KARTAVYNISTH PATRKAR HONE KA DAM BHARNE WALE LOG PATRAKARITA KO KALANKIT KARNE WALI ES BURAYEE KO DOR KARNE KE LEYE SHIGRA HI KOYEE SARTHAK AUR
PRABHAVEE PAHAL NAHI KARTE HAIN TO YAHEE MAN LENE HOGA KEE YEH LOG BHEE VAHI HAIN JINHEN HAM DADAL AUR PATRAKAR KE NAM PAR KALANK BATATE HAIN.
khan
September 3, 2011 at 11:51 am
ऐसे दल्लों के कारण पत्रकारों की गरिमा ना के बराबर हो गयी है.उपर बैठे लोगो को इनके बारे मे पुरी जानकारी ईकठ्ठा करने के बाद इनको काम पर रखना चाहिए ऐसे लोगो को रोकना होगा नही तो देश का आईना, और देश का चौथा स्तंभ की गरिमा को ऐसे लोग कलंकित कर देंगे ….हे भगवान सधबुद्धि दे ऊपर वालो को
anil tiwari
September 3, 2011 at 12:14 pm
pahle patrakarita ko ek mission ke taur per liya jata tha, ab uski bhi paribhasa badal gai, jo log patrikarita ke pese se ab jud rahe unme kafe logo ka mission kewal rupya banana he, jis per koi sansthan nahi dhyan de raha, kyo ki, unhe jo nisulk kam karne wale jo mil rahe hai. hardoi to ek bangi hai, inke jaise aur bhi hai.
boby singh
September 3, 2011 at 12:27 pm
sabhi se ye patra kar kehta tha ki meri police me badi pakad ahi. lekin aaj police ne hi inko band kardiya .iska istar itna ganda hai iski apni koi bhi biwi nhi hai ye apna kaam in jesi ladkiyo sehi nikalta hai.
hardoi se boby singh
chota patrakar
k c jha
September 3, 2011 at 3:50 pm
पत्रकारों की गरिमा ना के बराबर हो गयी है.उपर बैठे लोगो को इनके बारे मे पुरी जानकारी ईकठ्ठा करने के बाद इनको काम पर रखना चाहिए
k c jha 8800510332
RAMAN
September 3, 2011 at 4:25 pm
अरे भाइयों नीलिनी सिंह अपने को तीसमारखां पत्रकार समझती हैलेकिन है नहीं ! वो तो एक नंबर की चोटी है ! राजस्थान में कई लोगों को चुना लगाया है ! खबरे करवाई और पैसे के नाम पर ठेंगा, आखिर में जब सच्चाई की कलाई खुलती है तब तक वो बात करने से भी मनाही कर देती है ! बेचारे खबर भेजने वाले मुंह उतारकर अपने कर्म को दोष देकर बैठ जाते है ! भाई इस मोटी मेरा मतलब पत्रकारिता की मोटी महारथी को ऐसे चोटों की ही जरुरत रहती है !
ASHOK SINGH, LKO
September 10, 2011 at 1:03 am
मुझे लगता है कि नलिनी सिंह को गाली देने में हमारे कुछ साथियों ने जल्दबाजी से काम लिया है। यहां जिस ‘आंखों देखी’ का जिक्र किया जा रहा है, वह सम्भवतया कुछ और ही है। लखनऊ में भी बर्लिंगटन चौराहे के पास कुछ साल पहले तक ‘आंखों देखी’ का दफ्तर चलाने वाले एक शख्स ने सालाना 365 रुपये लेकर बहुतेरे ‘पत्रकार’ भर्ती कर लिये थे, जिनमें से अधिकतर का अड्डा विधानसभा के सामने स्थित पुराना धरनास्थल हुआ करता था। पूछने पर ये अपने को ‘आंखों देखी’ का रिपोर्टर बताते और ज्यादा कुरेदने और जोर डालने पर बताते कि वे टीवी वाले ‘आंखों देखी’ की बजाय आंखों देखी डॉट काम के रिपोर्टर हैं, और उनकी खबरें इंटरनेट पर प्रसारित की जाती हैं। एक रुपये प्रति दिन की दर पर पत्रकार का परिचय पत्र पा जाने वाले ये कथित पत्रकार इतने भर से ही खुश थे कि अब वे भी बड़े पत्रकारों की बगल में बैठकर किसी बड़ी शख्सीयत से सवाल जवाब कर सकते हैं, पुलिस को पत्रकार बताकर अर्दब में ले सकते हैं। ‘आंखों देखी’ से नाम की साम्यता का फायदा उठाकर वे छोटे-मोटे काम भी करा सकते हैं। हरदोई लखनऊ से नजदीक भी है। मेरे खयाल से पकड़ा गया शाहनवाज उर्फ शानू उसी ‘आंखों देखी’ का 365 रुपये वाला रिपोर्टर होगा। इस बारे में पुलिस को पता लगाना चाहिए।
Atul Mishra
September 11, 2011 at 3:01 pm
MUNNI (NALINI SINGH) BADNAAM HUYI ………………….. FALTU ME …….
KARE KOI………..BADNAM HOYE KOI ………..;D
vivek gargachary
October 3, 2011 at 10:27 am
mathura mai be is channel ki 4 id or 4 log hai jo khud ko patkar batata hai………….