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आइए, राजस्थान पत्रिका पर थू थू करें

: पत्रिका ने तो अब हद ही कर दी….. :  छत्तीसगढ़ में ढाई माह पूर्व कदम रखने वाले पत्रिका अखबार ने पहले तो छोटी-मोटी समस्याओं को अपना मुख्य मुद्दा बनाकर लोगों का खासा दिल जीता। उस समय ऐसा लग रहा था कि वाकई में यह अखबार दुखी व शोषित वर्ग के लोगों के लिए हमदर्द के रूप में साबित होगा और आगे भी इसकी खबरें व इसके पत्रकारों के कलम में धार रहेगी। कई मामलों को पत्रिका ने काफी जोर शोर से उठाया।

: पत्रिका ने तो अब हद ही कर दी….. :  छत्तीसगढ़ में ढाई माह पूर्व कदम रखने वाले पत्रिका अखबार ने पहले तो छोटी-मोटी समस्याओं को अपना मुख्य मुद्दा बनाकर लोगों का खासा दिल जीता। उस समय ऐसा लग रहा था कि वाकई में यह अखबार दुखी व शोषित वर्ग के लोगों के लिए हमदर्द के रूप में साबित होगा और आगे भी इसकी खबरें व इसके पत्रकारों के कलम में धार रहेगी। कई मामलों को पत्रिका ने काफी जोर शोर से उठाया।

चाहे वह गृहमंत्री के स्पेशल स्क्वाड की कारस्तानियों का हो, या कमल विहार योजना का। इन्हीं सब खबरों से पत्रिका की साख चंद दिनों में ही बढ़ गई और अन्य अखबारों के मुकाबले देखते ही देखते पत्रिका अर्स पर पहुंच गया, लेकिन इस अखबार के दूसरे पहलू पर नजर डालें तो पत्रिका में प्रकाशित एक खबर ने इसकी सारी सच्चाई को बेनकाब कर दिया है। बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रविवार की रात ढाई बजे प्रेस क्लब के सचिव व दैनिक भास्कर के प्रांतीय प्रमुख सुशील पाठक की अज्ञात हमलावरों ने व्यस्ततम मार्ग में गोली मारकर हत्या कर दी।

इस घटना ने पत्रकार जगत के अलावा आम लोगों को भी पूरी तरह झकझोर दिया। उन्हें यह लगने लगा कि अब शहर में कोई सुरक्षित नहीं है। एक पत्रकार की हत्या की खबर सुनकर मीडिया जगत से जुड़े लगभग सभी लोग घटना के कुछ देर बाद यानी रात लगभग 3 बजे ही मौके पर पहुंच गए और उन्होंने पुलिस व प्रशासन को जमकर कोसा। यही नहीं, पत्रकार स्व. पाठक के घर भी गए और तब तक शव को मुक्तिधाम नहीं ले जाया गया, जब तक सरकार ने स्व. पाठक के हत्यारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन नहीं दिया। इस घटना को अंजाम देने वाले लोगों की सभी वर्ग ने निंदा भी की।

साथ ही सभी छोटे से लेकर बड़े अखबारों के अलावा इलेक्ट्रानिक मीडिया में यह खबर प्रमुखता से दिखाया गया, लेकिन इस खबर को प्रकाशित करने में पत्रिका ने सारी हदें पार कर दी। पत्रिका में कुछ इस तरह खबर प्रकाशित किया गया कि स्व. पाठक कोई विशिष्टजन नहीं बल्कि एक आम आदमी थे। अखबार में एक पत्रकार की हत्या के बजाय ‘एक युवक की हत्या’ का शीर्षक देकर खबर प्रकाशित किया गया। एक कालम के खबर में कहीं स्व. पाठक के नाम के सामने पत्रकार नहीं लिखा हुआ था। खबर के अंत में यह लिखा हुआ था कि ”बताया जाता है कि वे प्रेस क्लब के सचिव भी थे।”

इस पंक्ति को पढ़ने के बाद सभी को काफी आश्चर्य हुआ, क्योंकि स्व. पाठक को बिलासपुर शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के तमाम अखबार वाले और इस जगत से जुड़े लोग बेहतर ढंग से पहचानते ही नहीं बल्कि जानते भी हैं। लगभग 15 वर्षों तक दैनिक भास्कर से जुड़े स्व. पाठक को उनकी मौत के बाद भी पत्रिका द्वारा तवज्जो नहीं दिए जाने की सबसे प्रमुख वजह यह माना जाता है कि पत्रिका व भास्कर समूह के बीच काफी समय से व्यावसायिक जंग चल रही है। यह जंग जयपुर राजस्थान से प्रारंभ होकर मध्यप्रदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी पहुंच गई है। यही वजह रही है कि दैनिक भास्कर के अलावा प्रेस क्लब के एक प्रतिष्ठित पद पर रहे स्व. पाठक की हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी और उसे पत्रिका ने आम लोगों की मौत की तरह एक छोटा सा बेतुका शीर्षक से खबर छापकर खानापूर्ति कर ली, ताकि उनकी पत्रिका में यह बड़ी घटनात्मक खबर भी प्रकाशित हो जाए, और वे घटना के दूसरे दिन अन्य अखबारों से समाचार में पिछड़ न जाएं।

यहां बात यह नहीं उठती कि स्व. पाठक के किसी अखबार में खबर नहीं छपने से उनके परिवार का दुख कुछ कम होने वाला है, लेकिन ऐसे व्यक्ति के लिए जहां पूरा शहर आंसू बहा रहा है, वहीं उसे एक मामूली व रोजमर्रा की घटना मानकर गलत ढंग से खबर प्रकाशित करना भी पत्रिका जैसे अखबार को शोभा नहीं देता। साथ ही उस पत्रकार की मानवता भी बार-बार झकझोर रही होगी कि उसने अखबार के प्रतिस्पर्धा के कारण गलत ढंग से खबर प्रकाशित कराकर बहुत बड़ी गलती की है। खैर जो भी हो, लेकिन वर्षों तक मीडिया जगत से जुड़े एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की हत्या करने वाले अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर आज पूरा प्रदेश एक स्वर में बोल रहा है, लेकिन पत्रिका अखबार के लिए यह किसी पन्ने के किनारे में प्रकाशित होने के लायक महज एक छोटी सी खबर से ज्यादा नहीं होगी।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित. खबर में उल्लखित तथ्य को लेकर अगर किसी को आपत्ति हो तो वो अपनी बात नीचे दिए गए कमेंट बाक्स या फिर [email protected] के जरिए कह सकता है.

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0 Comments

  1. 8MM0?0 ...............

    December 22, 2010 at 7:12 am

    इस खबर से तो ये ही जाहिर होता है की बनिए ने दुकान खोल ली है जिसे पत्रकारिता से कोई सरोकार नहीं है ! इस अखबार ने तो पत्रकारिता के मायने ही बदल डाले है अफसोस एक तरफ इस अखबार का मालिक मध्यप्रदेश में सरकार की चमचागिरी कर किसानों की भलाई का नाटक कर रहे है वहीँ एक कलमकार की मौत पर अपना असली रूप दिखा दिया…. थू थू घटिया अखबार…..

  2. Rohitash sain

    December 22, 2010 at 7:22 am

    patrika wale khud chor hai.

  3. kumar

    December 22, 2010 at 7:55 am

    भाई देखिये, यह हमारे समाज की कमजोरी है। सवाल किसी अखबार या कंपनी का नहीं हैं। सवाल तो यह है कि उस कंपनी का मुखिया (संपादक) अपनी जाति ही भूल गया है, जिस कारण ऐसा हुआ। हमें लगता है कि वह (संपादक) यह भूल चूके हैं कि उनका भी अंत होना प्रकृति के अनुसार सुनिश्चित है। हमारे हिसाब से वह कंपनी और उसके मुखिया थूकने के योग्य भी नहीं हैं।

  4. Ankit Khandelwal

    December 22, 2010 at 9:20 am

    Aap to aise keh rahe hain jaise baaki akhbaar bahut aage hain is maamlein main? Jaane kitni baar bhadas4media main pada hain ki bhaskar, jagran or anke bade akhbaar apne hi patrkaron ke baarein main nahi chapte hain.. to mere hisab se to patrika to doshi tehrane ki bajay pure media jagat to kosna jayada acha hain… kyunki sabhi ek jaise hain..

  5. devendra sharma

    December 22, 2010 at 9:49 am

    DEVENDAR SHARMA BANSWARA RAJASTAN

    …. थू थू घटिया अखबार…..

  6. yogesh pande, nagpur

    December 22, 2010 at 10:00 am

    patrika ko is khabar ke liye aina dikhana hi chahiye…..aisa lagta hai patrika ke crime reporter se lekar citynews editor tak ne kalam ke bech di hai…thoo..thoo..patrika ……samaj ko ek pusht khabar tak nahi paros saka…

  7. sanjay singh

    December 22, 2010 at 10:18 am

    वो तो कहो पत्रिका ने छाप दिया। नहीं छापता तो भास्कर क्या उखाड़ लेता ? हमारा अखबार जो मर्जी आएगी छापेंगे। आप कौन?

  8. Rajendra upadhyay

    December 22, 2010 at 10:45 am

    ek vakil apani biradari ke liye sangthit ho jat hai.Dharna,pradarshan,gyapanawam rally nikalata hai.Doctor apane sathiyon ke liye morcha khol deta hai lekin media karmi apani biradari ke logo ke liye usaka sahyog karne ki bajay use patrakar ki bajay use ak aam adami ki tarah samachar main prastut karata hai.Kam se kam naitikata ke adhar par use thodi tawajjo deni hi chahiye thi.Mediyakarmiyon ke asangathit hone ka najayaj labh kuchlog anayas hi prapt kar lete hai.Mediyakarmiyon ko sangathit hona hi samay ki pukar hai.

  9. kabir

    December 22, 2010 at 1:13 pm

    isme itna rone ki kya baat hai. jameen vivad me agar goli mari hai to isme patrakarita kaha se ghus gayi. patrakar bata kar dhanda karoge to apradhi ki tarah hi mare jaoge. patrika ne kuchh galat nahi kiya.

  10. कुमार गौरव

    December 22, 2010 at 1:14 pm

    बात पत्रिका या भास्कर की नही है. इन सालों ने अपनी आत्मा तक को बेच डाली है . ये क्या कर रहें हैं किस के लिए पत्रकारिता कर रहे हैं . ? इन्हें कुछ नहीं पता .
    इन लोगों को गाली देने केलिए मेरे पास शब्द ही नहीं है , शायाद इन चूतियों के लिए हर गाली छोटा पड़ जायेगा

  11. raj indore

    December 22, 2010 at 1:39 pm

    patrika 1 ghatiya akhbar hai yh apna daman saaf hone ki jo baat kerta hai darsal vo bilkul nahi hai indore may bhi kailash vijayvargiya se vigyapan ki deel cansal ho jane ke baad is peper ne unke khilaf morcha khola … hai …….khair thode din baad pata chal jayega ki kon kitna pani may hai………… jaha tak baat 1 ptrakar ki mout ki hai to us mamle may ptrika walo ko mafi mangna chaiye aur jo log patrika may kaam ker rehe hai unko bhi sochana chaiye ki vo bhi kal kisi dusre peper may jayenge to kya hoga

  12. jeki

    December 22, 2010 at 2:42 pm

    एक कलमकार के दुखद निधन पर किसी भी समाचार पत्र द्वारा इस तरीके से खबर छापना निंदनीय है ! सोचो एक दिन सभी को जाना है और क्या गुलाब जी कोठारी के निधन पर भी ऐसे ही लिखा जायेगा ! क्या उनको एक कलमकार लिखा जायेगा, जब की वो तो एक व्यापारी है ! पत्रकारों इन बनियों के चक्र में आप अपना धर्म मत बेचो!

  13. jeki

    December 22, 2010 at 2:43 pm

    एक कलमकार के दुखद निधन पर किसी भी समाचार पत्र द्वारा इस तरीके से खबर छापना निंदनीय है ! सोचो एक दिन सभी को जाना है और क्या गुलाब जी कोठारी के निधन पर भी ऐसे ही लिखा जायेगा ! क्या उनको एक कलमकार लिखा जायेगा, जब की वो तो एक व्यापारी है ! [b]पत्रकारों इन बनियों के चक्र में आप अपना धर्म मत बेचो!

  14. raju

    December 22, 2010 at 4:52 pm

    जिसने यह खबर छापी है, वह अखबार नहीं, पर्चा होगा। आज गाली देने का मन कर रहा है्…और मैं दे रहा हूं….

  15. RAJKUMAR JAIN

    December 22, 2010 at 5:05 pm

    patrika ke jinhone yeh samachar likha unhe nam ke sath patrakar likhna jaroori tha. apne sathi bandhu ka khyal nahi rakha. patrika ko khed vyakt karna chahiye.
    CHIEF AUDITOR DAINIK SADAY TIKAMGARH M.P.

  16. RAJKUMAR JAIN

    December 22, 2010 at 5:09 pm

    PATRIKA KO KHED VYAKT KARNA CHAHIYE
    CHIEF AUDITOR DAINIK SADAY TIKAMGARH M.P.:););):D[url][/url]:'(

  17. देवेश तिवारी

    December 22, 2010 at 6:44 pm

    पत्रिका और भास्कर कि लड़ाई के कारनामे में एक और अध्याय जुड़ गया . वैसे अगर पत्रिका को एक पत्रकार कि हत्या पर गुस्सा या दुनिया से विदाई का दुःख नहीं था तो खबर प्रकाशित ही नहीं करनी थी | अब लगता है जैसे कुतों का इलाका या ग्रुप होता है उसी तरह भास्कर पत्रकार ग्रुप या पत्रिका का इलाका कहा जायेगा शर्मनाक बात …. खबर लिखने वाले पत्रकार को अपने पर चिंतन करना चाहिए

  18. shailendrashukla

    December 22, 2010 at 7:03 pm

    आज हमारी कल तुम्हारी देखेगें सब बारी बारी

  19. reporter

    December 23, 2010 at 3:37 pm

    isme patrika ka koi dos nahi hi. jabalpur me jab bhaskar ke photogrpher ko goli mari gai thi tab patrika or sabhi paper ne likh jayda jagah fi lekin bhaskar ne to ye likha ki jisko goli markar htya hui hi wah kisi akhbar ka photogrpher tha.jab
    .bhaskar to apne aadmi tak ko marne ke baad nahi pehcanta jiske liye poore jabalpur ke journalist ek ho aandolan kiya or dharna diya leki malik na to santwana dene gay or na hi muawja diya ulta cm se patrkaron ne maang ki. to bhai hum aap kuch nahi hi in malikon k liye yakin na ho to aap man se koi mudda chapwa kar dikhao.

  20. gorelal pandey

    December 24, 2010 at 3:54 am

    संजय सिंह नाम के एक घटिया व्यक्ति ने जो कमेंट्स किए हैं, उससे तो लगता है कि वे पत्रकार नहीं, कोई भड़ुवा है, दलाल है। कारण यह है कि उसने लिखा है कि जमीन विवाद में उसकी हत्या हुई। तो क्या हत्या व्यक्तिगत कारण से होने से वह पत्रकार नहीं रह गया। क्या पत्रकार के कोई निजी जिंदगी नहीं होती। अगर ऐसा नहीं है तो बड़े बड़े अखबारों के मालिक, संपादक, पत्रकार और अन्य कर्मचारी कोई और धंधा नहीं करते हैं क्या और उन्हें ऐसा करने की जरूरत है क्या। और उसने लिखा है कि उनकी मर्जी जो छापें या न छापें। तो फिर जनता की आवाज, आम आदमी का अखबार, षोशण के खिलाफ और तरह तरह के ढकोसले करने की क्या जरूरत है पत्रिका को, खुद ही अखबार छापे और खुद ही पढ़े। पाठकों में वितरित करने की क्या जरूरत है ?

  21. gorelal pandey

    December 24, 2010 at 3:56 am

    संजय सिंह नाम के एक घटिया व्यक्ति ने जो कमेंट्स किए हैं, उससे तो लगता है कि वे पत्रकार नहीं, कोई भड़ुवा है, दलाल है। कारण यह है कि उसने लिखा है कि जमीन विवाद में उसकी हत्या हुई। तो क्या हत्या व्यक्तिगत कारण से होने से वह पत्रकार नहीं रह गया। क्या पत्रकार के कोई निजी जिंदगी नहीं होती। अगर ऐसा नहीं है तो बड़े बड़े अखबारों के मालिक, संपादक, पत्रकार और अन्य कर्मचारी कोई और धंधा नहीं करते हैं क्या और उन्हें ऐसा करने की जरूरत है क्या। और उसने लिखा है कि उनकी मर्जी जो छापें या न छापें। तो फिर जनता की आवाज, आम आदमी का अखबार, षोशण के खिलाफ और तरह तरह के ढकोसले करने की क्या जरूरत है पत्रिका को, खुद ही अखबार छापे और खुद ही पढ़े। पाठकों में वितरित करने की क्या जरूरत है ?

  22. vipul rege

    December 24, 2010 at 9:56 am

    ye patrika akhbaar nahi balki gulaab kothari genrel store hai

  23. kapil sharma

    December 24, 2010 at 2:55 pm

    भास्कर और पत्रिका दोनों ने घटिया काम किया है. लेकिन गलती पत्रकारों की भी है. जब ये खबरे लिखी जा रही थी जबलपुर और रायपुर में तो इन अखबारों में काम
    करने वाले क्या पत्रकार नहीं थे. वे क्या सिर्फ नौकरी कर रहे या पत्रकारिता. दोनों अखबारों में काम करने वालो को पत्रकार के हित की बात करना थी. लेकिन अपनी नौकरी बचने के लिए नीच लोग चमचागिरी करके ऐसी हरकतों का विरोध नहीं करते.

  24. shankar

    December 24, 2010 at 4:30 pm

    partishpaardh ke dur me akhbar ab sirf pise add circultion ko mahtav deta kavi bhaskar v aisa karega, par hame dukh hi divangat patrkar ki mout par.

  25. ranjan das

    December 25, 2010 at 6:08 am

    is khabar ko prakasit krne se phle jra ptrkarita ka lihaj kr liya hota. jis klam ki buniyad pr ptrkarita ka astitva hai. swyam ke astitav ke bare me soch lena tha. aage chalkar ptrkaro ki jo durdsa hone wali hai, bhvisya abi se dikh rha hai.

  26. A reader

    December 25, 2010 at 12:30 pm

    us sam bhaskar kaha ta ….. jab kailesh ji ne patrika par hamla kiya tha…

  27. jabalpur reporter

    December 25, 2010 at 6:54 pm

    kabir ji aapki baaat se me sehamat hoon aaj kal patrkarita ki aad me dhandha chal raha hi.jab grahaq nahi pata to patrkar uske khilaph ho jate hi.kuch aisa hi jabalpur bhaskar ke patrkar kar rahe hi babbu vidhyak se pahle khoob kaam karwaye or maal andar kiya ab usi k khilaph beech city me dharna de rahe hi.wo bhi us malik ke smarthan me jiske photogrpher ko goli mar di gai or usne ye kahabar chpwa di ki marne waala kisi press me photogrpher tha.yani jo patrika bilaspur me chpa wo db ne apne aadmi k liye kiya.yahi nahi db ki do top jo ko chaliti kam awaz jyada karti hi dookan hi chala rahi hi wo bhi malik ko pata hi lekin malik ki itni himmat nai ki wo unhe noukri se bahar kar sakre.

  28. V9d

    December 27, 2010 at 3:37 am

    Apano va pratispardhio par thu thu karne ki jagah sabhi ko apane apane girebaan mein jaank lena chahiye,
    koi bhi ghatan agar hoti hein, to usaki puri puri jankari hone ke baad hi karyvahi honi chahiye yeh sach he, par kaam karne vale sabhi INSAAN hi he, galtia insaano se hi hoti he, bhale hi vo kitana bhi jimedaar kiu naa ho. Yeh such he ki upar ullekhit ghatna ka presentation galat ho gaya. Par ek pahlu PATRIKA, ka ye bhi he ki, ek mahine pahele, city hawker ki durghatana vas doctors ko uski Tang (leg) katani padi, usame local managers, sales team, reporters ne mil kar usaki help ke liye khabar chapvaai or usake liye avasyak money, blood, hospital expenses mein discouts, available karvaya or usaka bharpur sahyog kiya, or karavaya.
    Yeh sabhi local team par nirbhar karta he ki vo kisi bhi situation ko kis tarah se ek saath mil kar solve kare or management ko inform kar uska solution find out kare. All depends on right presentation and atitude.

  29. sanjay jaroli

    February 3, 2011 at 11:27 am

    Akhbar ke malik ne mana nahi kiya tha ki Patrakar ki khabar mat chapo, Lakin ye to Reporter jisne khabar likhi hai uski galti hai,

    Atah Us Reporter (Patrika) Se jawab-talab karna chahiye? Tatha Iske liye use Punish Karna Chahiye. …….. Sanjay

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