पंकज शुक्ला इन दिनों नई दुनिया में रीजनल एडिटर हैं. मुंबई में पदस्थ हैं. फेसबुक पर वे सक्रिय रहते हैं. उन्होंने अपने ताजे स्टेटस अपडेट में जो लिखा है, उसे पढ़कर आप कभी सबसे शानदार कहे जाने वाले न्यूज चैनल आजतक के वर्तमान बुरे हाल की एक झलकी दिखाई है. इसे अगर आजतक के कर्ताधर्ता पढ़ें तो समझ सकेंगे कि उन्हें सुधारना या सुधरना बेहद मुश्किल काम है. पंकज शुक्ला का फेसबुकी स्टेटस इस प्रकार है-
Pankaj Shukla : रात घर आता हूं तो अब भी सबसे पहले आज तक ही देखता हूं। लेकिन इस चैनल का इतना बुरा हाल कभी नहीं देखा। हिंदी की वर्तनी की गलतियां तो अक्सर दिखती हैं। रात 12 बजे के News NonStop Bulletin में अब तक करीब आधा दर्जन खबरों पर गलत विजुअल्स चलते दिख चुके हैं।
इस स्टेटस पर आई कुछ प्रतिक्रियाएं…
Anuranjan Jha : kyun dekhte hain phir ?
Prakash Singh : मैं इस बात से सहमत हूं कि आप फिर क्यों देखते हैं आज तक….
डॉक्टर ओम राजपूत : ’आजतक’ देखते ही तो रहे हैं।
Pankaj Shukla : क्या करूं…मुंबई में जहां मैं रहता हूं वहां आज तक केबल पर जीरो नंबर पर आता है और टीवी खोलते ही सबसे पहले वही चल पड़ता है। और, पैसे इस चैनल के लिए भी देते हैं तो देखने में क्या बुराई भाई? अपन तो बतौर दर्शक देखते हैं तो और बतौर उपभोक्ता शिकायत भी करते हैं…
Parivesh Vatsyayan : कहते है आज तक 10 साल से सर्वश्रेष्ठ…?
Ishita Mishra : taki hum logon ko asliyat pata chale..
Pankaj Shukla : देल्ही बेली का दौर है भाई..
Anuranjan Jha : ha ha ha ha ha … Aaj Tak …. Beep Beep












kuldeep rawat
July 19, 2011 at 9:50 am
sunkar dukh huwa lekin jo hota hi achee ke liye hota hi bcoz uske ghar der hi par andher nahi all is well
Ashwani malhotra
July 19, 2011 at 12:56 pm
आज तक और इंडिया टी.वी में अब फर्क ही क्या है??????? दोनों टी.आर .पी के पीछे भागते हैं………..अगर सही खबरें देखनी हैं तो एन.डी.टीवी देखा किजिए जनाब………..
deepak agrawal
July 19, 2011 at 2:10 pm
माननीय शुक्ला जी,
जहां तक मेरा ख्याल है, चैनलों ने वर्तनी तो दूर सही हिन्दी से भी सालों से अपना नाता तोडा हुआ है. उस पर भी मजे की बात यह है कि अधिकतर लोग सही हिन्दी शब्द क्या हैं, उन्हें ही पकडना भूलते जा रहे हैं जो साबित करता है कि भविष्य की भाषा हिन्दी नहीं होगी. उम्मीद है कि आपके अनुभवों से पत्रकारिता कुछ सबक लेगी और लोग चैनल देखना छोड अखबार पढेंगे.
दीपक अग्रवाल, मुख्य उप संपादक, लोकमत समाचार
uday
July 19, 2011 at 3:03 pm
lekin aaj tak aaj bhi aaj tak hai…..;….
मोहन
July 21, 2011 at 5:50 am
इसमें कोई शक नही खबरों की दुनिया मे एक दशक तक राज करने वाला चैनल आज खबरो की पकड़ से दूर हो गया है लेकिन अरुण पुरी जी के उस ब्यान के बाद अब खबरो पर लोटों के बाद अब आज तक के नये खबरों के तेवर को देखने का इंतजार कर रहे है। रह गई भषा के दोष की बात तो टीवी और अखबार अब कोई दूध का धूला नही रह गया है कुछ लोग है जो अपने आप बचाये हुए है।
uday
July 19, 2011 at 3:04 pm
lekin aaj tak aaj bhi aaj tak hai…..
sahi aur pusht khabron ke liye aaj bhi log aaj tak par hi yakeen karte hain…..
atul sharma
July 19, 2011 at 3:43 pm
aaj tak ki news selection to regional channel se bhi gayi gujri hai.
Haresh Kumar
July 20, 2011 at 8:10 am
आदरणीय यशवंत जी उनका नाम पंकज शुक्ल हैं न कि पंकज शुक्ला। वे नईदुनिया मुंबई के क्षेत्रीय संपादक हैं। हां अंग्रेजी में Pankaj Shukla लिखते हैं।
मोहन
July 21, 2011 at 6:12 am
वाकई में एक दशक तक खबरों की दुनिया में राज करने वाले आज तक चैनल से जो उम्मीद की जाती है उससे वह न जाने क्यो दूर हो गया । क्या टीआरपी की वजह से इसका जबाब तो प्रबंधन ही दे सकता है। लेकिन अरुण पुरी के उस ब्यान के बाद की अब खबरो पर लौटो, के बाद एक बार फिर शायद आज तक खबरो की दुनिया का बादशाह बन जाय। हम भी अरुण पुरी के ब्यान के बाद इस बात का इंतजार कर रहे है कि क्या वाकई में आज तक फिर खबर पर लौट आया है।
khoji reporter
August 2, 2011 at 8:16 pm
माननीय पंकज शुक्ल जी जेसा की आपने लिखा आज तक देख के आपको अफ़सोस होता है की चेन्नल का इतना बुरा हाल केसे ? पर ये बात तो आप भी जानते है की १० साल से अपने आपको सर्वश्रेष्ट कहलाने वाला आज तक सिर्फ अपने टीम वर्क के कारण मार खा रहा है और रही टी आर पी की बात तो अब आज तक पर भी इंडिया टीवी की तरह ही आप भूतो को देख सकते है !