गाजियाबाद : आरुषि-हेमराज डबल र्मडर केस में एक ऐसा साक्ष्य सामने आया है, जो र्मडर मिस्ट्री में एक अहम् सुराग साबित हो सकता है। एक पत्रकार ने दावा किया है कि घटना के बाद उसे राजेश तलवार के घर के पास नाले से एक सर्जिकल ग्लब्स मिला था, जिसका इस हत्याकांड से संबंध हो सकता है। हालांकि उसने इसे सीबीआई को सौंपने के लिए कई बार आला अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इसे लेने में कोई रुचि नहीं दिखाई।
शुक्रवार को सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस पत्रकार की याचिका को स्वीकार करते हुए सीबीआई के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सीबीआई अधिकारियों को 22 मार्च को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। इस दोहरे हत्याकांड से संबंधित एक अंग्रेजी दैनिक में बृहस्पतिवार को छपी खबर में हत्यारों के दस्ताने पहनकर घटना को अंजाम देने की शंका जताने की खबर प्रकाशित होने के बाद एक मीडियाक र्मी ने शुक्रवार को सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति सिंह की अदालत में एक अर्जी दी।
वैशाली निवासी के. आशीष नामक पत्रकार ने अपने अधिवक्ता संजय त्यागी के माध्यम से शुक्रवार को प्रस्तुत की गई अर्जी में सीबीआई अदालत को बताया कि आरुषि हेमराज हत्याकांड के समय वह भी घटना की कवरेज के लिए मौके पर गया था। राजेश तलवार के घर के पास से नाले से एक सर्जिकल ग्लव्स बरामद हुआ था। आशीष का कहना है कि उसने यह दस्ताना सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार व अन्य अधिकारियों को सौंपने के लिए कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क किया, लेकिन किसी भी सीबीआई अधिकारी ने इसे अपने कब्जे में लेकर उसकी जांच कराने में रुचि नहीं दिखाई। तबसे उन्होंने वह दस्ताना बिना छेड़छाड़ किए अपने पास सुरक्षित रखा था जिसे शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया है। याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि अदालत इस दस्ताने को अपने अधीनस्थ मजिस्ट्रेट को नियुक्त कर उसका प्रयोगशाला में परीक्षण कराए और परीक्षण की सीलबंद रिपोर्ट अदालत में भेजने का आदेश पारित करे। साभार : राष्ट्रीय सहारा












Rohit K Gupta
March 5, 2011 at 2:40 pm
कहीं न कहीं ग्लब्स की जानकारी होते हुये भी अगर इस अहम् सुबूत को दरकिनार किया जा रहा है, तो आप समझ सकते है की “आरुषी हेमराज मर्डर मिष्ट्री” जो हमारे देश पर बदनुमा दाग बन गया है, को जानते हुये भी अनजान बन रहे है और नही चाहते है की ये डबल मर्डर मिष्ट्री सुलझ सके ???
मै अपने पत्रकार भाई जो वैशाली निवासी के. आशीष जी है को बधाई देता हूँ की इतना कुछ होने के बावजूद इस अहम् सुबूत को सुरक्षित रखे हुये है !
Rajesh kapil (Legal Reporter), Jal
March 5, 2011 at 6:11 pm
Evidence agar murder case se linked nikla to prove karne kay liye Ashish ko 100 se jiada swaalo se cross examin hona padega. I think itne time baad issko expose karna he defence kay liye solid daleel hogi, woh swaal kar saktay hai ki agar CBI ne ussko ignore kiya tha to tab usne aisa kyon nahi kiya ? Fir bhi chalo ashish bhai der aye ho drusst bhi hoge.
Good Job.
राजीव शर्मा
March 6, 2011 at 3:35 am
पहले अदालत में क्यों नहीं दिया…
Arvind jha
April 4, 2011 at 5:05 pm
SABSEY PEHLI BAAT TO YE HAI KI AEK JOURNALIST KA KAAM INVESTIGATE KARNA HOTA HAI KHABAR NIKALNA HOTA HAI. YE GLOVES AAPKO APNEY SAATH NAHI LE JAANEY CHAHIYE THEY. Do you understand the senstivity of this evidence. Aap cbi ko phone kar rahey they ye gloves le jaaney kay baad. usi waqt police ko de saktey they. aisey main aapkay upar muqadma bhi ho sakta hai janab.zara sambhal kay.