भारतीय समाचार पत्र संगठन (इलना) ने केंद्र सरकार द्वारा पुराने बिल में संशोधन के बाद बनाए जाने वाले ‘प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एंड पब्लिकेशन बिल 2010’ का विरोध किया है. सरकार इस नए बिल को ‘प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट 1867’ में संशोधन के बाद लाने जा रही है. इसी संशोधन का विरोध इलना कर रही है.
इलना का आरोप है कि इस बिल के पास हो जाने के बाद प्रेस की स्वतंत्रता खतम हो जाएगी. इस स्थिति में एक आलोचक समाचार पत्र प्रकाशित करना या वर्तमान में प्रकाशित हो रहे अखबारों को चला पाना बहुत मुश्किल होगा. पूरा प्रेस तंत्र अफसरशाही तथा बाबूशाही के चंगुल में फंस कर रह जाएगा.

















