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इस शहादत को मीडिया जगत कभी नहीं भूलेगा

: जेडे को श्रद्धांजलि : मुंबई में मिड डे के वरिष्‍ठ क्राइम रिपोर्टर ज्‍योतिर्मय डे की हत्‍या को लेकर पूरे देश के पत्रकारों में गुस्‍सा और रोष है. पूरे देश में ज्‍योति डे को श्रद्धां‍जलि देने का सिलसिला लगातार जारी है. देश भर के पत्रकार जे डे के हत्‍यारों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा पूरे मामले का खुलासा करने की मांग कर रहे हैं. जगह जगह शोक सभाएं आयोजित की जा रही है.

: जेडे को श्रद्धांजलि : मुंबई में मिड डे के वरिष्‍ठ क्राइम रिपोर्टर ज्‍योतिर्मय डे की हत्‍या को लेकर पूरे देश के पत्रकारों में गुस्‍सा और रोष है. पूरे देश में ज्‍योति डे को श्रद्धां‍जलि देने का सिलसिला लगातार जारी है. देश भर के पत्रकार जे डे के हत्‍यारों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा पूरे मामले का खुलासा करने की मांग कर रहे हैं. जगह जगह शोक सभाएं आयोजित की जा रही है.

इसी क्रम में दिल्‍ली के अलीपुर में आयोजित शोक सभा में समाज के प्रबुद्ध लोगों ने डे की हत्या की निंदा व हत्यारों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की. दिवंगत पत्रकार को श्रद्धांजलि प्रदान करने के बाद वक्ताओं ने डे की हत्या कड़े शब्दों में भर्त्‍सना की. वक्ताओं ने इस वारदात को लोकतंत्र के चौथे खम्भे पर हमले की संज्ञा देते हुए हत्यारों और षड्यंत्रकारियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की. वक्ताओं ने कहा की सच्चाई से पर्दा उठाने वालों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने में सरकारें लगातार असफल साबित हो रही है.

श्रद्धांजलि सभा में प्रिंट व इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के अलावा समाज के प्रबुद्ध लोग सैकड़ों की संख्या में मौजूद थे. इस सभा का आयोजन अलीपुर के समाचार पत्र द्वारा किया गया और इसी पत्र के ऑफिस के आगे सभी पत्रकार जमा हुए. इसमें दिल्ली के हर जिले से पत्रकार मौजूद थे. इस दौरान मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन भी रखा.

दूसरी तरफ इंडियन मीडिया वेल्फेयर एसोसिएशन के तत्‍वावधान में राजघाट के सामने मुंबई पत्रकार जेडे की आत्मा की शांति के लिए  दिल्ली के पत्रकारों नें यज्ञ किया. इस यज्ञ में टीवी और अखबार के पत्रकारों नें आहूति दी. इस दौरान अनेक पत्रकार मौजूद रहे.

बाराबंकी में भी पत्रकारों ने शोक सभा का आयोजन किया. पत्रकार शोभित मिश्रा ने कहा कि तेल माफियाओं व तस्करों ने हमारे साथी वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे की हत्या कर दी.  डे की शहादत को मीडिया जगत कभी नहीं भूलेगा.  इस हत्या की सीबीआई जांच होने के साथ ही पत्रकारों को सुरक्षा मिलनी ही चाहिये.  हमें इस लड़ाई के लिए एकजुट होना होगा.

शोभित जिला पंचायत सभागार में तहलका टुडे द्वारा आयोजित डे की शोक सभा में बोल रहे थे. इसी दौरान तय हुआ कि डे की हत्या के विरोध में शनिवार को छाया चौराहे पर पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता कैंडिल मार्च निकालेंगे.  मिड डे के वरिष्ठ पत्रकार जे डे की हत्या को लेकर आज जनपद के पत्रकारों का आक्रोश मुखर होकर श्रद्धांजलि सभा में बाहर आ गया. श्री मिश्रा ने कहा कि डे की शहादत साधारण शहादत नहीं है। विचार करें कि उनकी हत्या किए जाने से पहले उन्हें धमकी देकर मानसिक रूप से उनकी कितनी बार हत्या की गई होगी.

उन्होंने कहा कि डे की हत्या दाऊद के गुर्गो, तेल माफियाओं व चंदन तस्करों के द्वारा भले ही करा दी गई हो लेकिन आज वह हम लोगों के बीच में विचारों के रूप में जिंदा होकर हमारे आदर्श बन गये हैं. उनकी हत्या की जांच सीबीआई से करायी जानी चाहिए. उन्होंने आह्वान किया कि पत्रकार समाज एकजुट होकर निडरता से अपना काम करे. साथ ही पत्रकारों को सुरक्षा मिले और डे की हत्यारे जेल भेजे जाये. इसके लिए एकता के स्वर के साथ अपना संघर्ष तेज करें.

सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार लेखक अरविंद विद्रोही ने कहा कि हमें जागरण के उप सम्पाक राजू मिश्रा का कथन याद रखना चाहिये कि यही मौका है एकजुटता का,  असल हत्यारों को पकड़वाने का.  इसके लिए पत्रकारों का दमन कर रहे लोगों के खिलाफ शहीद जे डे के बहाने ही सही हमे खड़ा होना ही होगा.  उन्होंने रिजवान मुस्तफा की तारीफ करते हुए कहा कि अल्प समय में यह कार्यक्रम करके उन्होंने बाराबंकी की ओर से डे को सच्ची श्रद्धांजलि दी है.

ईटीवी के ब्‍यूरो चीफ दीपक मिश्रा ने कहा कि रिपोर्टरों की खबरों को दबाने का सिलसिला आज उनकी हत्या में तब्दील हो चुका है.  जबकि पत्रकार समाज के लिए काम करते हुए अपने परिवार व अपनी जिम्मेदारियों को भूल केवल कलम की जिम्मेदारी को ही आत्मसात करता है. उन्होंने कहा कि डे की हत्या हमारी व्यवस्था पर करारा तमाचा है.  इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिये.

वरिष्ठ पत्रकार व अधिवक्ता यादवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि जे डे की शहादत के कारण पत्रकार अपने अस्तित्व को बचाने की तलाश में जागरूक हो रहे हैं. भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखने वाला पत्रकार भ्रष्टाचार के दलालों व गुण्डों का प्रतिदिन दंश झेलता है.  ऐसे में हमें सचेत रहना होगा और जो दिवंगत डे के साथ हुआ उसके खिलाफ कलमकारों को आगे आना होगा. वरिष्ठ पत्रकार हशमतउल्ला खां ने कहा कि पत्रकारिता पेशा नहीं मिशन है. पत्रकार का कलम रूपी हथियार समाज हित में भ्रष्टाचारियों, आतंकियों, अपराधियों के खिलाफ चलता है. शहीद डे का जज्बा काबिले एहतराम है, जिसने देश के कलमकारों ने आग लगा दी है.

इस अवसर पर पत्रकार हरिकरन सिंह व सामाजिक कार्यकर्ता हुमायूं ने कहा कि पत्रकारों को सुरक्षा दी जानी चाहिये और डे की हत्या करने वालों को बेनकाब करने के लिए इसकी सीबीआई द्वारा जांच करायी जानी चाहिये. पत्रकार कृष्ण कुमार द्विवेदी ने कहा कि डे की हत्या हमारे सिस्टम पर करारा तमाचा है. इससे सबक लेते हुए हम सभी पत्रकारों को एकजुट हो जाना चाहिए.

इस अवसर पर प्रमुख रूप से पत्रकार परवेज अहमद, धनंजय शर्मा, चन्द्रशेखर रावत, आमिर अली, मोहम्मद शमीम, अमीन किदवई, पाटेश्वरी प्रसाद, दीपक निर्भय, सरफराज वारसी, सतीश कश्यप, डीके गोस्वामी,  रमेश रावत, श्रीनिवास त्रिपाठी, आरबी सिंह,  उमेश, संतोष शुक्ला, एसपी सिंह, आरपी सिंह, परवेज हैदर, एसएम साज, अमित पाण्डेय, प्रेम अवस्थी,  आसिफ हुसैन सहित तमाम पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे.  श्रद्धांजलि सभा में दो मिनट का मौन रखकर डे की आत्मा की शान्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गयी.

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0 Comments

  1. pardeep mahajan

    June 18, 2011 at 2:58 pm

    अब पत्रकारों को कलम जेब मैं और लात गांड पर मारनी चाहिए
    पत्रकार बिरादरी के लिए की बड़ी शर्मनाक बात है कि किस तरह हिजड़ो की तरहमुंबई में
    मिड डे अखबार के sr. crime रिपोर्टर ज्योति डे को सरेआम गोलियों से भून दिया जाता
    है ये मामला देख कर लगता है की आने वाले समय मैं रंडुए , भडुए और गन्दुये पत्रकारों
    पर हाबी होते रहेंगे
    क्या पत्रकार सारी उम्र गिफ्ट, admission , राशन कार्ड, वोटर कार्ड बनाने के लिए ही
    पत्रकार बना है या अपने मीडिया संस्थानों के मालिको की दल्लागिरी करने के लिए
    पत्रकारिता कर रहा है
    गौरतलब है की ज्यादातर मीडिया संस्थानों के मालिको ने अपने यहाँ जो पत्रकार रखे है
    बह सिर्फ उनकी दलाली व् काले कारनामो को छुपाने के लिए रखे गए है
    यहाँ मैं कहना चाहूँगा की मरने वाला पत्रकार और कोई नहीं हमारा बिरादरी भाई था और
    उस भाई की आत्मा चाहती है की इन माफियाओ को न बक्शा जाये बल्कि इन माफियाओ को
    बेनकाब किया जाये क्योकि इन माफियाओ की कोई जाति, कोई धर्म नहीं होता और ये किसी को
    अपना दोस्त नहीं मानते है ये माफिया बिरादरी सिर्फ अपना मतलब निकालना जानती है
    क्योकि इन्हें पता है की पत्रकार सबसे पहले बिकता है और उस पत्रकार का बॉस (मालिक)
    पहले ही उनकी रखेल बना हुआ है
    पत्रकार भाइयो ये उस पत्रकार भाई को हम सबकी तरफ से सच्ची श्र्धनाजली होगी की सभी
    पत्रकार भाई अब अपने पेन जेब मैं रखे और माफियाओ की गांड पर लात मारने के लिए तैयार
    रहे
    —लेखक प्रदीप महाजन (अखिल भारतीय मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष है )09810310927 ( http://www.insmedia.org )
    [b][/b][b][/b]

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