यशवंत जी, नमस्कार, जैसा कि संज्ञान में आया है कि संडे नई दुनिया जैसे अखबार में भी जिले स्तर पर वितरण व्यवस्था से जुडे़ एजेंसी धारको का शोषण बखूबी किया जा रहा है। पहले तो यह होता है कि एजेंटो को बगैर बताये उनकी एजेंसी समाप्त कर दी जाती है फिर उनके द्वारा जमा करायी गयी जमानत धनराशि वापस नही की जाती है। उत्तर प्रदेश के जनपद गोण्डा जिले में एक मामला प्रकाश में आया है।
गोण्डा नगर में संडे नई दुनिया की एजेंट सुमन तिवारी की एजेंसी 06 जून 2010 को बन्द कर दी गयी थी और उसे मार्च 2011 बीतने के बावजूद अभी तक उसकी जमानत धनराशि करीब एक लाख रुपये अखबार द्वारा वापस नही किया गया है। एजेंट ने इस सम्बन्ध में नई दुनिया के इन्दौर, दिल्ली से लेकर लखनऊ आफिस तक अपने रुपये पाने के लिये ईमेल किया व पत्र लिखा लेकिन उसे नई दुनिया की ओर से कोई जवाब नही मिला। श्रीमान यशवंत जी, कृपया इस विषय पर विषेष ध्यान दें। अखबारों को समाज का पथ प्रदर्शक माना गया है और नई दुनिया जैसा बड़ा अखबार क्या एजेंटों के पैसे मार कर उसके बल पर चल रहा है या फिर वह अपने सरकुलेशन देने वाले एजेंटो का कोई अस्तित्व ही नही समझ रहा है?
द्वारा
हरीश चन्द्र तिवारी
गोण्डा
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aasheesh
April 3, 2011 at 2:16 pm
yaswant ji,
ye bahut hi galat bat hai.ajent akhbar ki reedh hote hai.inka paisa vapas kiya jana chahiya.
aasheesh gonda
mehtab ali
April 3, 2011 at 2:22 pm
yaswant ji
namskar, kya nai dunia ka paisa kamane ka yeh naya fanda hai. yah intna durbhagypurna hai ki isse akhbaro ki visvasniyata apne pariwar me hi ghati hai.
mehtab ali
shivankam ojha
April 3, 2011 at 2:26 pm
yaswant ji,
ye kya ho raha hai mujhe to yakeen hi nahi ho raha hai ki nayi duniya akhbar apne agency holders ke sath aisa krit kar sakta hai?
shivankam ojha, turkadiha UP