वाराणसी। अमर उजाला का वितरण सेंटर बुधवार को भोजूबीर में वितरकों के कड़े विरोध के चलते हमेशा के लिए बंद हो गया। वितरकों की राजनीति तोड़ने के क्रम में यह काम अमर उजाला ने किया था जो फ्लाप हो गया। इसे कचहरी, पांडेयपुर के वितरकों ने बुधवार को अपनी विजय के रुप में देखा और सुबह-सुबह तिलकुट, गुड़सेव, नमकीन के साथ गरमागरम चाय का रसास्वादन किया।
इसकी एक वजह यह भी रही कि उन्होंने मंगलवार को अमर उजाला के नेशनल सेल्स हेड और वाराणसी निवासी यादवेश कुमार को अपनी मांगों पर झुका दिया था। चांदपुर स्थित अमर उजाला के दफ्तर में प्रमुख वितरकों में सर्वश्री राजेंद्र पाल, महेंद्र प्रसाद, व्यास तिवारी, नरेश तिवारी, मुन्ना बिहारी, दशरथ, सतीश, तारकेश्वर दुबे, राजेश्वर दुबे, विशाल, विकास, दुर्गेश और बृजेश आदि अमर उजाला प्रबंधन के कई बार बुलावे के बाद गए थे और अमर उजाला प्रबंधन की ओर से वितरकों के साथ किए जा रहे भेदभाव पर जमकर अपनी भड़ास निकाली।
अब तय हो गया है कि अगले दस दिनों में वितरकों को उनकी कापियों पर हुए नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी। कूपन के मुद्दे पर भी बात उठायी गयी और आरोप लगाया गया कि प्रति कूपन वितरकों का पांच रुपया प्रबंधन दबाए बैठा है। यह रकम कोई तीस लाख के आसपास है। इस कूपन को लेकर भी किसी दिन वितरकों का बवाल झेलना होगा, यह चेतावनी वितरकों ने लगे हाथ दे दी है। यह कूपन पीसीसी के समय वितरको को दिया गया था। ज्ञात हो कि अमर उजाला ने अखबार का दाम साढ़े तीन रुपये से घटाकर ढाई रुपया कर दिया है और वितरकों को फी कापी एक रुपये का विशुद्ध घाटा हो रहा था। इसे लेकर वे बेहद आक्रोशित थे। सूत्रों का कहना है कि अमर उजाला वाराणसी में 30 से 32 हजार के बीच बिकता है! साभार पूर्वांचलदीप











