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ओजस्‍वी पत्रकारों की अंतिम कड़ी थे नंदन

: नंदन के निधन से एक युग का अवसान : रुद्रपुर। प्रख्यात हिंदी पत्रकार, लेखक और कवि कन्हैया लाल नंदन के निधन पर क्षेत्र के रचनाकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। एक शोक सभा में वक्ताओं ने उनके निधन को हिंदी पत्रकारिता, संवेदनशील लेखन और काव्य जगत के लिए बड़ी क्षति बताया। लेखक और पत्रकार अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ ने श्री नंदन का परिचय देते हुए कहा कि उन्होंने प्रख्यात साहित्यकार धर्मवीर भारती के संपादन में बंबई से छपने वाली लोकप्रिय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ से पत्रकारिता प्रारंभ की।

: नंदन के निधन से एक युग का अवसान : रुद्रपुर। प्रख्यात हिंदी पत्रकार, लेखक और कवि कन्हैया लाल नंदन के निधन पर क्षेत्र के रचनाकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। एक शोक सभा में वक्ताओं ने उनके निधन को हिंदी पत्रकारिता, संवेदनशील लेखन और काव्य जगत के लिए बड़ी क्षति बताया। लेखक और पत्रकार अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ ने श्री नंदन का परिचय देते हुए कहा कि उन्होंने प्रख्यात साहित्यकार धर्मवीर भारती के संपादन में बंबई से छपने वाली लोकप्रिय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ से पत्रकारिता प्रारंभ की।

उन्होंने बच्चों की सर्वश्रेष्ठ पत्रिका ‘पराग’ का संपादन किया। उन्होंने लोकप्रिय साप्ताहिक ‘सण्डे मेल’ और साहित्यिक पत्रिका ‘सारिका’ का भी संपादन किया। इसके अलावा वे सर्वाधिक सम्मानित हिंदी दैनिक ‘नवभारत टाइम्स’ के फीचर संपादक भी रहे। श्री नंदन ने हिंदी साप्ताहिक ‘दिनमान’ के लिए भी रिपोर्टिंग की। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारत की तमाम स्तरीय हिंदी पत्र-पत्रिकाओं, आकाशवाणी और दूरदर्शन को भी अपनी सेवाएं दीं। नंदन ज्वलंत विषयों पर वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष रिपोर्टिंग व लेखन के लिए जाने जाते रहे हैं।

भारती ने कहा कि वे अपने संपादन में छपने वाली पत्र-पत्रिकाओं में लेखकों के साथ कोई भेदभाव नहीं करते थे और आलेख स्तरीय होने पर उसे अवश्य प्रकाशित करते थे। उन्होंने दर्जनों बेहतर पत्रकार तैयार किए। भारती ने स्‍व. नंदन को याद करते हुए कहा कि उन्‍होंने उनके अनेक आलेख नवभारत टाइम्स और सण्डे मेल आदि में छापे। भारती ने कहा कि 1980-90 के दशक में अनेक स्तरीय पत्रकार काम कर रहे थे, जिनमें राजेन्द्र माथुर, शरद जोशी, कमलेश्वर, अज्ञेय, प्रभाष जोशी, राजेंद्र अवस्थी, सुरेंद्र प्रताप सिंह, रघुवीर सहाय और कन्हैया लाल नंदन शामिल हैं। उनमें से अंतिम नंदन जी के भी चले जाने से पुरानी पीढ़ी के पत्रकारिता के आदर्शों को समर्पित लोगों की जबरदस्‍त कमी हो गयी है।

अन्य वक्ताओं ने स्‍व. नंदन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक संवेदनशील पत्रकार और कवि का अवसान राष्ट्र और समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है। आज जबकि पत्रकारिता में गिरावट आ रही है, ऐसे में नंदन जी जैसे लोग नये पत्रकारों को सही राह दिखाते थे। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि पत्रकारिता के आदर्शों पर चलते हुए वस्तुनिष्ठ साथ ही जनपक्षीय लेखन किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि उनका लेखन सदैव आम लोगों, लेखकों और पत्रकारों को सही मार्ग दिखाता रहेगा।

श्रद्धांजलि सभा में कश्तूरी लाल तागरा, प्रद्युम्न कुमार जैन, बीसी सिंघल, शंभुदत्त पांडे ‘शैलेय’, डॉ. सुभाष वर्मा, विवेक तागरा, हरप्रसाद पुष्पक, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, नरेश कुमार, खेमकरण ‘सोमन’, ललितमोहन जोशी, रूपेश कुमार सिंह, अरविंद सिंह, आदि मौजूद थे।

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