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कई मायने है कीर्ति राणा के भास्कर छोड़ने के

लिखने पढऩे से सरोकार रखने वाले दैनिक भास्कर समूह के चुनिंदा संपादकों में से एक कीर्ति राणा के भास्कर को अलविदा कहने के कई मायने है। जून के पहले सप्ताह में वे इंदौर से प्रकाशित हो रहे अखबार दबंग दुनिया के संपादक का दायित्व संभालने जा रहे है। खांटी पत्रकार कीर्ति और भास्कर का नाता करीब 28-29 साल पुराना है। जिस दिन भास्कर इंदौर से लांच हुआ था उसी दिन से वे उसके साथ थे और इंदौर से शुरू हुआ उनका यह सफर उज्जैन, उदयपुर, श्रीगंगानगर होते हुए शिमला में जाकर थम गया।

लिखने पढऩे से सरोकार रखने वाले दैनिक भास्कर समूह के चुनिंदा संपादकों में से एक कीर्ति राणा के भास्कर को अलविदा कहने के कई मायने है। जून के पहले सप्ताह में वे इंदौर से प्रकाशित हो रहे अखबार दबंग दुनिया के संपादक का दायित्व संभालने जा रहे है। खांटी पत्रकार कीर्ति और भास्कर का नाता करीब 28-29 साल पुराना है। जिस दिन भास्कर इंदौर से लांच हुआ था उसी दिन से वे उसके साथ थे और इंदौर से शुरू हुआ उनका यह सफर उज्जैन, उदयपुर, श्रीगंगानगर होते हुए शिमला में जाकर थम गया।

एक जमाने में इंदौर में भास्कर के ब्रांड एंबेसेडर रहे कीर्ति राणा का संबंध निभाने में कोई सानी नहीं है। वे खुब लिखते है और अपने साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करते हुए कहते है कि यदि हमने लिखना पढऩा छोड़ दिया तो हमारी पहचान ही खत्म हो जाएगी। तेजी से बढ़ते जा रहे और देश में नंबर वन होने का दावा करने वाले भास्कर समूह में वर्तमान परिदृश्य में कीर्ति राणा जैसे लोगों का सबसे बड़ा अवगुण उनका चाटुकार व यसमैन न होना रहा। वे भास्कर में उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते थे जो अपनी कलम और मजबूत नेटवर्क के दम पर खबरें बटोरने के लिए जानी जाती है न की इमानदारी से अपना दायित्व निभाने के बजाय नेशनल एडीटर, स्टेट हेड या स्थानीय संपादक के सामने घंटों खड़े होकर हां में हां मिलाने, उनकी पत्नी व बच्चों की सुख सुविधा का ध्यान रखने,  घर के बाहर से आवारा कुत्तों को पकड़वाने, उनके द्वारा दिन को रात कहे जाने पर सहमति देने, खबरें रोकने या रुकवाने का खेल करने और दिन में चार बार कमरे में जाकर चुगली करके अपने लिए रास्ता बनाने में महारत हासिल रखती हो।

यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग यदि आज भास्कर में दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर रहे है तो इसका क्या कारण है? इनमें से ज्यादातर साल में दो-दो, तीन-तीन इंक्रीमेंट ले रहे है, छह-छह महीने में इनकी जिम्मेदारी बदली जा रही है। इनके चेहरों पर गजब की लाली है और घरों में अच्छी खासी रौनक भी। इनमें से किसी को अपने संपादक का बिजली का बिल कम करवाने में महारत हासिल है तो किसी को नेशनल हेड को यह याद दिलाने का इनाम मिल रहा है कि सर आपका पर्स में रूपये खत्म हो गए हैं, कल बैंक से पैसा निकलवाना है। इन्हीं में से एक को पत्नी की बीमारी का बहाना बनाकर संस्थान से मनमाना पैसा लेने व झूठा टीए बिल बनाने का आरोप है तो दूसरे ने अपने साथ काम करने वाली कई लड़कियों की जिंदगी खराब की है और तीसरे का ज्यादातर समय अपने संपादक के पीछे सिर झुकाकर व हाथ पीछे बांधकर चलने व साथियों की चुगली में ही बीतता है।

इन्हीं में वह नाम भी शामिल है जिसे हर खास मौके पर बनने वाली विशेष टीम में सुधीरजी की नजरों में चढ़ाने के लिए स्थान दिया जाता है तो वह शख्स भी है जो अपनी अटैची में नेशनल हेड की तस्वीर साथ में लेकर चलता है और उसे रोज प्रणाम करता है। श्रवण गर्ग के संपादकीय से संबंधित नियुक्तियों से मुक्त हो जाने के बाद भास्कर में बजाय काबिलियत के जोड़तोड़, चाटुकारिता, यसमैनशिप का जो दौर चला है वह फिलहाल तो थमने से रहा। जिन लोगों के कंधों पर अभी यह भार है वे अभी चमड़े के सिक्के चलाने जैसी स्थिति में हैं। यदि आपको भास्कर में तरक्की चाहिए तो आपको यहां पनप रही पट्ठा संस्कृति का हिस्सा बनना ही होगा अन्यथा कीर्ति राणा जैसे लोग उज्जैन, उदयपुर, श्रीगंगानगर और शिमला भटकते हुए समूह में महत्वहीन ही बने रहेंगे।

राणाजी को नई पारी के लिए शुभकामनाएं, वे जिस उंचाई को हासिल कर चुके हैं उसके बाद अब उनके लिए अपनी पहचान बनाए रखने के लिए भास्कर जैसे ब्रांड के साथ जुड़े रहना कतई जरूरी नहीं था। यह सब जानते हैं कि वे जिस काम को हाथ में लेते हैं पूरी इमानदारी के साथ पूरा करते है। उन्हें शुभकामनाएं..

भड़ास4मीडिया के पास उपरोक्त विश्लेषण [email protected] नामक मेल आईडी से आई है. मेल आईडी के अलावा भेजने वाले की कोई और पहचान नहीं है. यह एकतरफा विश्लेषण है, फिर भी इससे कई नई जानकारियां मिल रही हैं, भास्कर की अंदरुनी राजनीति का पता चल रहा है. पाठकों से अपील है कि उपरोक्त विश्लेषण के तथ्यों की सत्यता के बारे में नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए अवगत कराएं.

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0 Comments

  1. Sheelay, Bhopal

    May 26, 2011 at 10:23 am

    Tajjub hei.Andruni taur per Bhaskar 30 saal pehle bhi aisa hi tha, 20 saal pehle bhi, 10 saal pehle bhi, 24 ghante pehle bhi. Kuch nahin badla. Suna hei ki ghure ke din bhi 12 saal mein badal jate hein. Kirti Bhai change aapke liye thik hei.mujhe Jayantiji ne ek bar likha tha ki jis kam mein khushi mile wahi karna chahiye. Aap khush rahen kyonki yeh aap ka hi nirnay hei, waise bhaskar chhodne ki wajah aap hi likhte to achcha tha., dusre mirch-masala lagakar likh rahe hein.

  2. rashbihari dubey

    May 26, 2011 at 10:46 am

    bilkum sach likha gya hai.
    bhaskar me chatukaro,randibajo and kamchoron ke liye hi jagah hai.chatukarita to itni hai ki kukur bhi sampadak ban ja raha hai.
    jamshedpur me randi bajo ki bharmar hai to dhnabad aur ranchi me kamoisankhoron kji.
    khud om gaud aur santosh manav dalla hai,ajay shankar aur lalit jaise log kya kar rahe hai sab janter hai,vinay purti randi bajo ka sartaj hai.maha ghatia patra ho gay ahi bhaskar aur uske mahan sampadk to gold medla ke layak hain.

  3. rohit

    May 26, 2011 at 2:37 pm

    कीर्ति राणा जी के बहाने बात निकली है तो थोड़ी सी भड़ास निकाल ही देते हैं। दैनिक भास्कर अखबार बुरा नहीं है। आज के दौर की पत्रकारिता के अनुसार मौजूदा अखबारों से सेह्र्लश्रेष्ठ है, लेकिन क्या जहां चापलूसी पसंद बॉस हो तो क्या किया जा सकता है। किसको तरक्की नहीं चाहिए. किसे पैसे अच्छे नहीं लगते. सभी को लगते हैं। राणा जी भास्कर में थे। दबंग इंडिया में ज्यादा पैसे मिले तो चले गए। इसमें नया क्या है। आज दैनिक भास्कर में कल्पेश याज्ञनिक ने सेह्र्लेसेह्र्ला है और उन्होंने अपनी टीम बनाई. तो इसमें बुरा क्या है. सभी एेसा करते हैं। श्रेह्लण गर्ग जी की भी अपनी टीम थी। कल कोई और आएगा ेह्लो भी अपनी टीम बनाएगा। एेसे में इस बात को दिल से नहीं लगाना चाहिए कि राणा जी गए तो एेसा हो गया ेह्लैसा हो गया। आखिर कीर्ति राणा भी तो पैसे के लिए ही काम कर रहे थे। आपको भी अगर अच्छे पैसे मिलेंगे तो दौड़े-दौड़े जाएंगे तब आप बरसों की निष्ठा या साथ नहीं देखेंगे। ेह्लही कीर्ति राणा जी ने भी किया।

  4. Soumitra Roy

    May 26, 2011 at 4:57 pm

    भास्‍कर में और भोपाल स्‍थित नेशनल न्‍यूज रूम में पनप चुकी पट्ठा संस्‍कृति के बारे में जो कुछ भी लिखा है, उससे मैं पूरी तरह से सहमत हूं। कीर्ति राणा जी को उनके इस साहसिक फैसले पर हार्दिक बधाई और भविष्‍य के लिए शुभकामनाएं।

  5. abhay

    May 27, 2011 at 7:46 am

    rana ji,
    prnam
    aap ko bhaut badhi. aap ne ek achha kdam uthya. ab es news paper me chaplus, logono ki jrurat h. jin logon ne imandari se ptrkarit is akhbar k liy ki unhe dutkar mile h. yhi karan h ki vo log khunthagrst ho rhe hn. aap ka kdam uneh rasta dikheyga.
    nai pari ki badhai.

  6. mukesh rajput

    May 27, 2011 at 3:56 pm

    kirti rana ji sahi mayne me acche insan hai,mene ujjain me dekha hai, bhaskar ujjain se nikalta tha,shree rajesh jain usme buero chief the, bhaskar ujjain se indore le jane ka shrey rajesh ji ko tha, bhaskar ki pahachaan rajersh ji ke karan thi, unhone 27 saal bhaskar ke liye kaam kia, unme dabankta thi, kisi ka 1 rupya nahi lia, apne samman ke karan unhone 1989 me resign kar dia tha, ye baat ramesh ji ko bhi maloom thi,ve dabkar kaam nahi karte the

  7. kamal sharma

    May 27, 2011 at 6:23 pm

    KALPESH bhai ka ek aur dalal hai,
    >>>>>KULDEEP VYAS

  8. सचवाचक

    May 27, 2011 at 9:48 pm

    बहुत पहले यही स्तिथि नवभारत कि आई थी .किसी ज़माने में नवभारत नं.१ हुआ करता था. जो उसे जमाने वाले थे,एक एक करके चाटुकारिता के शिकार हो गए.ऐसे ऐसे संपादक विराजे है पदों पर जो संपादक कि पाद बनने लायक भी नहीं है .आज कि स्तिथि यह है कि कल सुबह का अखबार छप जाए तो ….(विदर्भ नवभारत संस्करणों के संदर्भ में नहीं )
    खैर शिखर पर पहुँच कर खुद संभाले रखना आसान नहीं है…..
    ‘कलिनायक’ को इसी कलियुग में अपने करे का फल भुगतना है…..’राज’ का राज भी संकट में आ ही गया.
    जैसा करा है वैसा भरना तो पड़ेगा……

  9. Pardeep Rai

    May 30, 2011 at 12:20 pm

    Bhayi
    Dekha jaye to vislesan me kuch bhi galat nhi likha.Mai achi tarha janta hu,kyoki maine bhi 7_8 sal Bhaskar ko Apna KHOON diya hai. Yha chaplusao ke vare nyare hai. Ye log akhbar ko chuna laga rhe hai, Lala ji na jane kaise in logo ke hatho akhbar ka beda gark hone de rhe hai. Khas toar par Madhye Pardesh ki lobby to chal hi cahpludi par rhi hai. Jis bhi Shaks ne ye vislesan likh.Bhaskar ki hakikat likh dali

    Dosto mai ap logo ki dua se BHASKAR choad desh ke ek ese Bde media sansthan me agya hu jha kam ki bat ho rhi hai chaplusi valo ko jagaha nhi hai

  10. bajrang kacholiya

    May 30, 2011 at 4:09 pm

    राणाजी, वाकई में काफी सहनशील व गंभीर किस्म के इंसान है मैने उन्हें निकट से देखा है महज पैसो के लिए वे दबंग दुनिया नहीं गए होंगे। पैसा ही सब कुछ नहीं होता कई बार परिस्थितियां ऐसी होती है कि आदमी चाहकर भी काम नहीं कर पाता, शायद राणाजी के साथ भी वैसा ही हो।

  11. kamal sharma

    May 30, 2011 at 6:31 pm

    भास्‍कर में और भोपाल स्‍थित नेशनल न्‍यूज रूम में पनप चुकी पट्ठा संस्‍कृति के बारे में जो कुछ भी लिखा है, उससे मैं पूरी तरह से सहमत हूं।
    **
    Kalpesh BHai apne dalal KULDEE VYAS ko jodhpur se bhhar kar do nahi to ye aapko bhi le dubega< kisi aadmi se ya fir jodhpur GM se hi puch lo KULDEEP kya kya kar raha hai

  12. rishikant

    May 31, 2011 at 5:43 am

    अरे भाई, 65 हजार रुपए मासिक पगार का संपादकीय सेक्रेटरी देश के किस अखबार में किस एडिटर को नसीब है? यह चमत्कार भास्कर में ही मुमकिन है। उसे अपनी पोजीशन बचाए रखने के लिए फिर दुम भी हिलानी होगी तो वह नकली दुम भी लगाकर दफ्तर में आएगा। भास्कर के नेशनल रूम में चाटुकारिता की सारी हदें इक्का-दुक्का लोगों ने ही पार की हैं। यह बिल्कुल सही है कि ऐसे मक्कारों की बातों पर बड़े एडिटर कान दे रहे हैं और मुंह लगाए हुए हैं। ऐसा इस अखबार में पिछले तीस सालों में कभी नहीं हुआ। यह नई परंपरा डली है।

  13. Rajesh joshi

    May 31, 2011 at 7:33 am

    Yashwant je
    Mene 3 din pehele apko ek comment bheja tha ise issue per pl publish it ye hekeket hai 110 present sehe

  14. BIRENDRA MISHRA

    June 2, 2011 at 5:27 am

    KRITI RANA AAK AISE SAMPADAK HAIN JINKA PRICHAI DENA MAIN UCHIT NAHI SAMJHTA UNHONE BHASKAR MAI ITNE VARAS GUZARE YE BARI BAAT HAI AAJ PAISE KA YUG HAI SABHI JANTE HAIN LEKIN WE PAISE KE PICHE KHBHI NAHI DIKHE AAJ BHASKAR KI PARSTHITI BADLI YAHAN MEIN YE NAHI KAHUGA KI BASKAR MEI ACHE LOG NAHI RAHE LEKIN ITNA JROOR HAI KI CHAPLUS LOG BHI YAHA TAK PHUCH GYE HAIN AISE MEI KIRITI RANA JAISE SAMPADAK KA BHASKAR SE AAJ NA KAL JANA TAI THA.

  15. Visitor

    June 2, 2011 at 7:55 am

    Mujhko ranaji maaf karna

  16. pramod kumar.muzaffarpur

    June 16, 2011 at 12:02 pm

    bhai kirti rana ko mahan patrakar adhikar ji ka asirvad mila hua hai.bhaskar chorne par itana hi kahunga ‘bhala hua jo hari bisare sir se bala tali’ bhai krti ji ko nayee jagaha jane ke liye subh kamnaye.

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