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कलाम ने किया पत्रकार संजय की किताब का विमोचन

: सिकल सेल को कैंसर से ज्‍यादा खतरनाक बताया :  दुनिया में पत्रकारिता की भूमिका कभी पायलट की रही है तो कभी फालोगार्ड की। अनेक अवसरों पर यह देखा गया है कि पत्रकारिता ने जिस अंधेरे रास्तों पर दीये का प्रकाश बिखेरा है, वह बाद में जाकर प्रकाश स्तंभ बन गया। रायपुर के पत्रकार संजय दीक्षित की कुछ पहल ऐसी ही है। उन्होंने सिकल सेल जैसी लाइलाज बीमारी पर शोध किया है। उक्‍त बातें संजय दीक्षित की सिकल सेल पर लिखी गई किताब के विमोचन पर वक्‍ताओं ने कही।

: सिकल सेल को कैंसर से ज्‍यादा खतरनाक बताया :  दुनिया में पत्रकारिता की भूमिका कभी पायलट की रही है तो कभी फालोगार्ड की। अनेक अवसरों पर यह देखा गया है कि पत्रकारिता ने जिस अंधेरे रास्तों पर दीये का प्रकाश बिखेरा है, वह बाद में जाकर प्रकाश स्तंभ बन गया। रायपुर के पत्रकार संजय दीक्षित की कुछ पहल ऐसी ही है। उन्होंने सिकल सेल जैसी लाइलाज बीमारी पर शोध किया है। उक्‍त बातें संजय दीक्षित की सिकल सेल पर लिखी गई किताब के विमोचन पर वक्‍ताओं ने कही।

रायपुर मेडिकल कालेज में सिकल सेल पर आयोजित अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. कलाम ने दीक्षित की शोध पुस्तक का विमोचन किया।  इस मौके पर मुख्‍यमंत्री रमन सिंह भी मौजूद थे. 2006 में राष्ट्रपति डॉ. कलाम के हाथों ही श्री दीक्षित को स्व.चंदूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता फेलोशिप मिली थी। ओर इसी के तहत पत्रकारीय दृष्टिकोण से यह शोध पुस्तक लिखी गई है। सिकल सेल पर हिन्दी में लिखी गई संभवत: यह पहली पुस्तक होगी।

संजयपुस्तक में श्री दीक्षित ने बताया है कि सिकल सेल को केंसर से भी ज्यादा खतरनाक बताया है। शुरूआती स्टेज में अगर कैंसर पकड़ में आ गया तो उसका इलाज है। मगर सिकल सेल का अब तक कोई निदान नहीं ढूंढा जा सका है। छत्तीसगढ़ में 30 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से ग्रस्त है, इस बीमारी से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यक्स्था पर भी बुरा असर पड़ा है। दीक्षित का कहना है कि सिकल सेल पहली ऐसी बीमारी होगी, जिससे एक साथ कई अंग प्रभावित होते हैं।

उन्‍होंने बताया कि सिकल सेल ग्रस्त छह राज्यों से घिरे होने की वजह से छत्तीसगढ़ में यह बीमारी मौत का तांडव मचा रही है। आलम यह है कि सिकल प्रभावित 7 फीसदी बच्चे तो छह महीने के अंदर काल के ग्रास बन जाते है। सिकल रोगी अगर 50 वर्ष जी गए तो आश्चर्य माना जाता है। सूबे में पिछड़ी जातियों की आबादी 50 फीसदी के करीब हैं और सबसे अधिक पिछड़े वर्ग के लोग ही सिकल सेल से प्रभावित हैं। इनमें से कुर्मी, साहू जैसी जातियों में तो 22 प्रतिशत तक लोग सिकल सेल की चपेट में हैं। सिकल सेल से सबसे अधिक वे ही प्रभावित हैं। बच्चों की थादी में बाधा आने की आशंका से लोग इस अनुवांशिक बीमारी के बारे में बताना नहीं चाहते और इस बीमारी के लगातार फैलने की वजह भी यही है।

शादी के बाद संतान उत्पति की प्रक्रिया में यह बीमारी फैलती जाती है। दो सिकल सेल रोगी की अगर शादी हो गई तो उनकी संतान भी सिकल रोगी होगी। इसलिए शादी के पहले अगर सिकल कुंडली मिला ली जाए तो 70 फीसदी तक बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। मगर इसके लिए सामाजिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। क्योंकि जनजागृति ही सिकल सेल का एकमात्र उपाय है और सामाजिक संगठनों को साथ लिए बगैर जनजागृति संभव नही है।

गौतरलब है कि संजय दीक्षित 17 साल से पत्रकारिता में हैं और दैनिक भास्कर, देशबंधु, जनसत्ता, जैसे कई अखबारों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं; वर्तमान में वे दैनिक हिन्दुस्तान के संवाददाता के तौर पर काम कर रहे हैं।

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0 Comments

  1. राजेश अग्रवाल

    November 29, 2010 at 5:49 pm

    संजय भाई को इस उपलब्धि के लिए बधाई। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच पत्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ें तो प्रसन्नता होती है। छत्तीसगढ़ के पिछड़े और गरीब तबके में सिकलसेल एक गंभीर बीमारी बन चुकी है। निश्चय ही संजय के इस प्रयास से बीमारी की गंभीरता को समझने मेंमीडिया, प्रशासन और राजनीतिज्ञों को मदद मिलेगी।

  2. Anil Pandey

    November 29, 2010 at 7:44 pm

    सिकलसेल पर अगर कोई डाक़्टर किताब लिखे तो कोई खास बात न होगी, लेकिन एक पत्रकार के द्वारा इस पर शोधपरक किताब लिखा जाना उसकी मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करता है. भाई संजय दीक्षित को बहुत-बहुत बधाई!

  3. rudra awasthi

    November 30, 2010 at 9:02 am

    समाज में चल रही घटनाओं का सच सामने लाना तो पत्रकारों की जिम्मेदारी है ही….समाज की गंभीर संस्याओँ के समाधान की दिशा में ठोस पहल की उम्मीद भी पत्रकारों से की जाती है। संजय भाई का यह काम इसी दिशा में एक अच्छा प्रयास है। बहुत-बहुत बधाई
    रुद्र अवस्थी

  4. Narendra Kumar Sharma

    December 4, 2010 at 7:10 am

    Full stop is not an end becouse you can write a new sentance after it.
    It is the real begning of the success. Go Ahead and ahead ahead ahead…………………..

    Congratulations…..

    Hope for the best of new era.

  5. satish pandey

    December 5, 2010 at 3:14 pm

    अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच पत्रकार सामाजिक सरोकारों से जुड़ें तो प्रसन्नता होती है। संजय भाई को इस उपलब्धि के लिए बधाई। छत्तीसगढ़ के पिछड़े और गरीब तबके में सिकलसेल एक गंभीर बीमारी बन चुकी है। निश्चय ही संजय के इस प्रयास से बीमारी की गंभीरता को समझने मेंमीडिया, प्रशासन और राजनीतिज्ञों को मदद मिलेगी। [b][/b][b][/b][i][/i]:)

  6. Nitin Singhvi

    December 6, 2010 at 12:32 pm

    Mr. Dixit–I hope the study published by u and the suggestions made will be taken seriously by all concerns and will held the state in overcoming the disease. Congratulation to Mr Sanjay Dixit….Nitin Singhvi

  7. Vishwanahth Harangaonker

    December 11, 2010 at 3:48 am

    Congratulations !
    Sanjay. I am happy to read the little bit content of the book in the news. I didnt know about this that this is so common and yet dangerous. It is remarkably good to study and publish the book about this common and dangerous disease. Hope people will be aware of this and will try to find the cure.

    Congratulations once again and we are proud of your work. Keep it up the good work.

    Vishwanath Harangaonker

  8. Vishwanahth Harangaonker

    December 11, 2010 at 3:55 am

    Congratulations!
    I am extremely delighted to know the book is Published by Such a wonderful person. And we are proud of you that you have done such a good job by publishing the information about the dangerous and very common disease.
    I myself was not aware about this. Hope fully people will be aware of this and will work to find the cure of this deadly disease.

    Keep up the good work and congratulations to you once again.

  9. rajesh kumar

    December 17, 2010 at 7:55 am

    sickle cell par hindi me pahli kitab likhane par badhai

  10. sanjay nayyar

    December 21, 2010 at 9:33 am

    sickle cell par bahut accha prayas hai. sanjay dixit badhai ke patra hain.

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