Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

पॉवर-पुलिस

कानपुर में पुलिस ने पत्रकार को बुरी तरह पीटा

कानपुर में पत्रकारों पर पुलिस का कहर थम नहीं रहा है. निष्‍पक्ष रिपोर्टिंग से खुन्नस खाए शहर के चमनगंज एसओ ने हिन्दी दैनिक आज में प्रशिक्षु रिपोर्टर जितेन्द्र पांडेय पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाए कहर बरपा दिया. घटना से नाराज पत्रकारों ने पुलिस खिलाफ डीआईजी को तहरीर दी है. रिपोर्टर जितेन्‍द्र कवरेज करके अनवरगंज एरिया से गुजर रहे थे कि दूसरे थाना क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग कर रहे एसओ चमनगंज सुनील कुमार सिंह ने जितेन्‍द्र को रोक लिया. जितेन्‍द्र ने पुलिस के मांगने पर गाड़ी के पूरे कागज दिखा दिए. इसके बाद पुलिस ने हेलमेट न पहने होने का बहाना कर धमकाना शुरू कर दिया. तब जितेन्‍द्र ने अपना परिचय दिया और कहा कि आप चालान काट दीजिए. बस, इसी से नाराज होकर पुलिस वालों ने जितेन्‍द्र को लात-घूंसों से सरेआम पीटना शुरू कर दिया.

कानपुर में पत्रकारों पर पुलिस का कहर थम नहीं रहा है. निष्‍पक्ष रिपोर्टिंग से खुन्नस खाए शहर के चमनगंज एसओ ने हिन्दी दैनिक आज में प्रशिक्षु रिपोर्टर जितेन्द्र पांडेय पर कानूनी कार्रवाई करने के बजाए कहर बरपा दिया. घटना से नाराज पत्रकारों ने पुलिस खिलाफ डीआईजी को तहरीर दी है. रिपोर्टर जितेन्‍द्र कवरेज करके अनवरगंज एरिया से गुजर रहे थे कि दूसरे थाना क्षेत्र में वाहनों की चेकिंग कर रहे एसओ चमनगंज सुनील कुमार सिंह ने जितेन्‍द्र को रोक लिया. जितेन्‍द्र ने पुलिस के मांगने पर गाड़ी के पूरे कागज दिखा दिए. इसके बाद पुलिस ने हेलमेट न पहने होने का बहाना कर धमकाना शुरू कर दिया. तब जितेन्‍द्र ने अपना परिचय दिया और कहा कि आप चालान काट दीजिए. बस, इसी से नाराज होकर पुलिस वालों ने जितेन्‍द्र को लात-घूंसों से सरेआम पीटना शुरू कर दिया.

पीडि़त पत्रकार

पीडित पत्रकार से हालचाल पूछते डीआईजी

बताया जाता है कि जितेंद्र के दोनों हाथ पीछे की ओर बांध कर बूटों से भी मारा. जब इतने से पुलिस का जी नहीं भरा तो वे उन्‍हें थाने ले आए.  फिर लॉकप में बंद कर पिटाई की. पुलिस ने रिपोर्टर पर 400 ग्राम चरस और छेड़खानी की धाराओं में फर्जी मुकदमा तक दर्ज करने की तैयारी कर ली. पर घटना की सूचना साथी पत्रकारों को लगी तो वे तुरंत थाने पहुंचे. पुलिस ने उनके साथ भी बदसलूकी की, इसके बाद पत्रकारों ने डीआईजी मुथा अशोक जैन को घटना की जानकारी दी. कई घंटे के बाद रिपोर्टर को पुलिस ने छोड़ा. रिपोर्टर को शहर के उर्सला हॉस्पिटल के आईसीयू में एडमिट कराया गया है.

डीआईजी मुथा अशोक जैन ने हॉस्पीटल पहुंचकर पीडि़त से पूरे मामले की जानकारी हासिल की. पत्रकारों ने डीआईजी को आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ नामजद तहरीर सौंपी है और आरोपी थानाध्यक्ष को बर्खास्त किए जाने की मांग की है. डीआईजी ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन पत्रकारों को दिया है.

कानपुर पुलिस ने पहली बार पत्रकारों को निशाना नहीं बनाया है, कुछ दिन पहले एक स्कूल की घटना में निष्‍पक्ष रिपोर्टिंग से खफा पुलिस ने 21 पत्रकारों को नोटिस जारी कर दी थी और एक हिन्दी दैनिक की अखबार लेकर जा रही गाड़ियों को रोक लिया था. इसके खिलाफ प्रेस क्लब के लोगों ने आगे आते हुए धरना दिया था.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. khabri

    November 13, 2010 at 8:05 am

    ये मायाराज हे। इसी को कहते हैं अंधेर नगरी चौपट राजा।

  2. media

    November 13, 2010 at 9:38 am

    पुलिस हमेशा से पत्रकारो से दुशमनी निकालते रहे है इस घटना में सभी पत्रकारो को एक जुड़ होके आंदोलन करना चाहिए उस पुलिस वाले जबतक ऐसी तैसी न हो जाए तब तक न छोड़ा जाएं:-*

  3. akash rai

    November 13, 2010 at 10:23 am

    ise kahte hai kanoon ka raaj

  4. suyash.vajpai

    November 13, 2010 at 1:06 pm

    पुलिस पर घटता meadia का दबाव है, इसके जिम्मेदार पत्रकार ही है…

  5. Ashu Pragya Mishra

    November 13, 2010 at 2:46 pm

    [b][b][b]ye haalaat isliye paida hue hain, kyonki thaane ki dalali karne waale aur imaan ko tukdon ke bhaav nilaam kar dene wale farzi patrakaron ne jinhone is peshe ki pavitrata aur mahatv ko na samajhte hue sirf gaadi par press likhwaane aur ghar par press likhkar mohalle main dhauns jamane ke liye kalam ki aawaaz ko nilaam karne ka gunaah kar daala..in logon ki vajah se aaj patrakaron ki takat ko police kam karke aankati hai, kyon nahi divya kand par jab hindustaan kanpur ke patrakaron ne police atyacharon par ladai ladi, aur ise abhiyaan banakar gareeb bachchi ke haq ki ladai ladi, kahan the senior police officer, aur kyon so raha tha kanpur ka pulisiya prashashan.. vajah hai unhen pata hai patrakaar aapas main hi toot jayenge, ye kuch nahi hai kanpur main divya kand ke baad aayi patrakaron ki chetna aur unke sangharsh ko todne ka prayaas hai, main vintee karoonga kanpur nagar ke samast varishth patrakaron se baat trainee par hamle ki nahi hamari asmita ki hai, is ladai ko aise laden ki barson se rajnetaon ke fenke tukdon par bharashtachaar ki panaah main palne waala kanpur ka prashashan ya to sudhar jaaye, ya fir bhrasht apna tabadla kisi aur shahar ki or karwa len….

    ashu pragya mishra[/b][/b][/b]

  6. मदन कुमार तिवारी

    November 13, 2010 at 3:53 pm

    एक बात बताउ भाइ जी , आपकी यू पी पुलिस देश की सबसे खराब पुलिस है। आप गुडों से भी बुरा माने उसे। आल एक रहस्य खोल रहा हुं। यू पी में मुलायम का शासन था। मैं गाजीपुर से बलिया एक किराये की जीप लेकर लौट रहा था । मेरे साथ मेरी बीवी नीलम और ४ साल का बेटा औशो था । रास्ते में एक थाना था , वहां गाडी को रोक कर ह्मलोगों से कहा गया की गाडी छोड दे , कल मुलायम की रैली है , सभी गाडीयां उसमे जायेंगी। मैने विरोध किया लेकिन थाना प्रभारी थाने छोड कर चला गया , हवलदार सिर्फ़ थाने में था। अंत में हम तीनो ३ किलोमीटर पैदल चल कर एक टेम्पों लिया और बलिया पहुचें। मुझे लगता है अगर नक्सलियों की कहीं जरुरत है तो वह यू पी है। बहुत गंदे है वहां के पुलिस वाले।

  7. vakeel khan

    November 14, 2010 at 3:31 am

    police walo ki pol kholti hai media isliye jalti hai police bahana chahiye police ko pareshaan karne ka patrakaro ko aise police walo ke khilaf patrakaro ko aik jut hokar aandolan karna chahiye

  8. kuldeepdevd

    November 14, 2010 at 5:30 am

    ek salah_____ bhaiya ptrakar mahoday jab aap police ko nahi chhodte hai. to ye aapke pakke wale dushman ban jate hai. jra sa aapne kami ki aapki fadne me koi kasar nahi chhodenge… isliye is maya ke janjal se jitna ho sake bach ke rahiye isi me kalyan hai……….

  9. sahid pathan

    November 14, 2010 at 10:15 am

    100 rS ke liye chamangang police ne patrkar ko jis traha peeta hai usse police ke aukat pat chalti hai phelbhi police ne cheking ke naam par vasili ka virodh karne par patrlaro par hamla kiya hai par lagta hai ke dig ashok bhang ke nase rahete hai sab kuch janne le bad bhi koi karvi nhi kar rahe hai

  10. ashish sharma 'rishi '

    November 14, 2010 at 2:24 pm

    यसवंत जी मै अपनी आप बीती बता रहा हु .. लखनऊ के ठाकुरगंज थाने में सिरोही नाम के थानेदार है .. धनतेरस के दिन मै ऑफिस से घर जा रहा था .. सोचा की सिगरट पि लू .. तभी ये साहब आ गये और मुझसे बोले की जाओ यहाँ से भागो मैंने जब अपना परिचय दिया की मै न्यूज़ चैनल में रिपोर्टर हु तो भड़क गये और बोले की पत्रकारों को मै गिरा की मरता हू .. भाग जा यहाँ से नहीं तो अभी मारुगा कोई बचा भी नहीं सकेगा .. और तुम लोग कितना मिलता है तुम को हा उस से अधिक मै अपने हमराह को देता हू ….. ये हाल है उत्तर प्रदेश पोलिसे का यहाँ रिपोर्टिंग करना बहुत परेशानी का काम हो गया है .. और एक बात मै आज तक नहीं समज सका की थानेदार को हुआ क्या था जो इतना नाराज़ हो गया ….. ये भी हो सकता है की वो पत्रकारों से निजी रंजिश मानता हो

    आशीष शर्मा

  11. s.p.chauhan

    November 14, 2010 at 5:29 pm

    yah ghatna batati he ki patrakaron me foot he.varna etni police me himmt nahin.hamen apna ghar sudharna hoga.samay hea ki ekjut hoeye.

  12. EKHLAQU KHAN

    November 15, 2010 at 10:31 am

    Police ka ravaiyya hamesha patrakaron ke saath doglepan ka hota hai. Jitna ye dusron ko fasane me lage rahte hain. vaise hi apne kaam ko anjaam den to state ki takdeer sawar jayegi. Khar police pratarna ka bhukt-bhogi mai bhi ho chuka hoon.1 samachar ke mamle me.
    Mob. 08004192800

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...