लखनऊ से प्रकाशित हिन्दी दैनिक अमर उजाला के ब्यूरो प्रमुख रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव आखिर किसके निशाने पर हैं? 18-19 की रात्रि में उनके आवास के अहाते में चार शक्तिशाली बम बरामद होने के बाद से यह सवाल यक्ष प्रश्न बना है। घटना के तीन दिन बीतने के बाद भी आज तक पुलिस के हाथ अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।
समाचार पत्र के ब्यूरो प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार हैं और मण्डल मुख्यालय पर आईटीआई रोड पर अपने आवास पर रहते हैं। अपने आवास से कार्यालय और कार्यालय से आवास के अलावा सार्वजनिक स्थानों पर शायद ही कभी आते-जाते हों। रात को 09 बजे के बाद अपनी स्कूटी से घर पहुंचना उनके दिनचर्या में शामिल है। 18 जनवरी की शाम को उनके बच्चे की तबीयत खराब होने की सूचना मिली तो वे दवा लेकर थोड़ा जल्दी घर पहुंच गए और फिर घर से नहीं निकले। रात को करीब 10 बजे परिवार के साथ खाना पीना खाकर जब उनकी धर्मपत्नी कुत्ते को रोटी देने के लिए दरवाजे से बाहर निकलीं तो बरामदे में उनके पैर में पालीथिन में रखी कोई वस्तु लगी। टार्च की रोशनी में देखने में उसमें बम निकले। यह देखते ही उनके होश उड़ गए। आवास पर बम रखे जाने की सूचना रवीन्द्र श्रीवास्तव ने फोन पर नगर कोतवाल भरत लाल यादव को दी। वे तत्काल दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और 200 ग्राम तम्बाकू के डिब्बे में बनाए गए चार बमों को कोतवाली लाकर निष्क्रिय कर दिया। बताते हैं कि बम इतने ताकतवर थे कि निष्क्रिय करने के लिए पानी में डाले जाने पर करीब दो घंटे तक उसमें से धुंआ निकलता रहा। हालांकि पुलिस ने रवीन्द्र श्रीवास्तव की तहरीर पर अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है, किन्तु घटना के तीन दिन बाद भी वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
पुलिस अधीक्षक डीसी मिश्रा का कहना है कि बम रखने का उद्देश्य आतंकित करने का था क्योंकि न तो वह टाइम बम था और न ही रिमोट बम था। जिससे वह अपने आप फटता या रिमोट से फोड़ा जा सकता। निश्चित रूप से यह ऐसा ही था किन्तु यदि रवीन्द्र जी समय से पहले अपने घर न पहुंच गए होते और बाद में स्कूटी से आते। बरामदे में स्कूटी अन्दर करते समय उस पर चढ़ जाती तो फिर बम का फटना तय था और ऐसी स्थिति में परिणाम का अंदाजा लगाया जा सकता है। बहरहाल जो भी हो किन्तु आखिर पता तो चले कि कौन लोग आतंकित करना चाह रहे हैं और उनका मकसद क्या है? उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष कैलाश नाथ वर्मा के नेतृत्व में पत्रकारों का एक दल जिलाधिकारी मधुकर द्विवेदी तथा पुलिस अधीक्षक दुर्गा चरण मिश्रा से मिला और घटना का पर्दाफाश किए जाने, दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही किए जाने तथा पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की।
बहरहाल इस घटना से जिले के पत्रकारो में दहशत फैल गई है। मुख्यालय पर पत्रकारों ने एक बैठक करके सामूहिक रूप से इस कृत्य की निंदा की है तथा बम रखकर आतंकित करने के दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की है। इस घटना की निंदा करने वालों में वरिष्ठ पत्रकार केसी महन्त, छेदी लाल अग्रवाल, एसपी मिश्रा, आशुतोष पाण्डेय, कैलाश नाथ वर्मा, टीपी सिंह, राम जियावन शुक्ल, उपनिदेशक सूचना रवि कुमार तिवारी, जिला सूचना अधिकारी प्रभाकर तिवारी, यशोदा नंदन त्रिपाठी, ओंकार पाठक, ओपी पाण्डेय, पीपी यादव, जानकी शरण द्विवेदी, जीसी श्रीवास्तव, संजय तिवारी, एसएन शर्मा, इस्लाम खॉ, हरि नरायन शुक्ल, धनंजय तिवारी, अरूण कुमार मिश्र, अनिल कुमार गुड्डू, राम मोहन पाण्डेय, अजीत सिंह लवी, नंद लाल तिवारी, राजेश तिवारी, अम्बिकेश्वर पाण्डेय, सुरेश पाण्डेय, कमला सिंह, रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव, देव नाथ मिश्र, अंचल श्रीवास्तव, अनुराग सिंह, जुबेर अहमद, अंकित मिश्रा, हरि सिंह बादल, पंकज सिन्हा, हाजी अब्दुल हफीज, शिव नाथ, ओम प्रकाश उपाध्याय, अकील सिद्दीकी, जलील अहमद खान, मनोज श्रीवास्तव, मनु यादव, कल्बे वसी, रमन मिश्रा, अंकित ओझा, हरीश चन्द्र तिवार विशाल सिहं, राजेन्द्र सिंह, भूपेन्द्र द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
जानकी शरण द्विवेदी
सचिव
प्रेस क्लब गोण्डा












prashan tripathi. pindra varanasi
January 28, 2011 at 11:30 am
is mamle ko prasasn ko eak challenge ke rup me lena hoga kyo ki ye prahar sirf sampadak je per nahi hai ……………..prashant tripathi …..rashtriya sahara pindra varanasi