Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

हलचल

किसानों को प्‍याज के आंसू रूला रही सरकार : पोहरे

: दुश्‍मन देशों को तार रही : प्याज के निर्यात पर आगामी 15 जनवरी तक प्रतिबंध लगाए जाने पर महाराष्ट्र के जाने-माने किसान नेता प्रकाश पोहरे ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जमकर लताड़ लगाई है. उन्होंने कहा है कि प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाना जहां भारतीय किसानों पर कुठाराघात है, वहीं दुश्मन देश से प्याज आयात कर यह सरकार वहां के किसानों को तार रही है.

: दुश्‍मन देशों को तार रही : प्याज के निर्यात पर आगामी 15 जनवरी तक प्रतिबंध लगाए जाने पर महाराष्ट्र के जाने-माने किसान नेता प्रकाश पोहरे ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए जमकर लताड़ लगाई है. उन्होंने कहा है कि प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाना जहां भारतीय किसानों पर कुठाराघात है, वहीं दुश्मन देश से प्याज आयात कर यह सरकार वहां के किसानों को तार रही है.

इस प्रतिनिधि से हुई विशेष बातचीत में किसान नेता प्रकाश पोहरे ने प्याज निर्यात पर लगाई गई पाबंदी तुरंत हटाने की मांग करते हुए कहा कि यह सरकार एक तो किसानों की कोई मदद नहीं करती. जो ‘किसान पैकेज’ वह घोषित करती है, उसमें भी भ्रष्टाचार हो जाता है. ऐसी दयनीय स्थिति में जब बाजार की अवस्था के कारण किसानों को उसकी फसल का उचित भाव मिल रहा है तो सरकार फिर रोड़े अटका रही है. क्या यह जीवन से जूझते किसानों पर कुठाराघात नहीं है? शहरी उपभोक्ताओं को खुश करने के लिए सरकार द्वारा उठाया गया ‘प्याज निर्यात पर प्रतिबंध’ वाला कदम किसानघाती नहीं तो और क्या है?

खुली अर्थव्यवस्था पर तमाचा

किसान नेता प्रकाश पोहरे ने बताया कि प्याज के दाम भी केन्द्र सरकार की लचर उपभोक्ता नीति और किसान विरोधी नीति के कारण ही बढ़े हैं. जब अतिवृष्टि हुई और प्याज, सोयाबीन, धान आदि की फसलों पर मौसम की मार पड़ी, तब सरकार क्यों नहीं चेती? गीले अकाल से प्याज की फसलें सड़ गयीं और प्याज की नर्सरी ही खराब हो गयी. ऐसे किसानों को किसी तरह राहत देना तो दूर, उल्टे सरकार ने प्याज के निर्यात को रोक कर खुली अर्थव्यवस्था पर तमाचा मारा है. पोहरे ने सवाल उठाया कि प्याज के निर्यात से केन्द्र का क्या बिगड़ रहा था? अच्छा दाम तो किसानों को मिल रहा था. अब सरकार किसानों को मिलने वाला ज्यादा दाम देख रही है, मगर जब किसानों ने नुकसान उठाया, तब क्या यह सरकार सो रही थी? कुछ किसानों के लिए थोड़े-से अच्छे दिन देखना भी क्यों नहीं चाहती यह सरकार?

दूसरी तरफ केन्द्र सरकार ने दुश्मन देश पाकिस्तान से प्याज आयात करने का फैसला किया है. यानी दुश्मन देशों के किसानों को तारना… और देसी किसानों को मारना, क्या यही केन्द्र सरकार का न्याय है? जबकि एक अन्य दुश्मन देश चीन से सस्ता माल आयात किया जाता है. इसी कारण हमारी कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो गयी हैं. सच तो यह है कि भारतीय उत्पादकों और किसानों के हित में चीन से आयातीत माल पर पाबंदी लगाना चाहिए अथवा आयात शुल्क बढ़ाना चाहिए. मगर इसे विपरीत हम चीन के प्रधानमंत्री का पलक पावड़े बिछाकर स्वागत कर रहे हैं, उनसे कई प्रकार के करार कर रहे हैं.

कांग्रेस की किसान विरोधी नीतियां

बातचीत में किसान नेता प्रकाश पोहरे ने यह भी आरोप लगाया कि केन्द्र की कांग्रेस नीत सरकार की नीतियां दुश्मन राष्ट्र का समर्थन करने वाली हैं. वह किसान विरोधी हैं, तभी तो यहां के किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं. पोहरे ने यह भी कहा कि शहरी उपभोक्ताओं के हितों की पूर्ति के लिए ही प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगाने वाली सरकार कपास के निर्यात पर लगी हुई पाबंदी नहीं हटा रही है. साथ ही साथ कपास के धागे (सूत) के निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है. पोहरे ने आरोप लगाया कि चूंकि भारत की कपड़ा-लॉबी बेहद पॉवरफुल है, इसलिए उसी के प्रेशर में न कपास के दाम बढ़ाए जा रहे हैं, न कपास के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाया जा रहा है.

लॉबीइस्टों की कठपुतली है सरकार!

प्रकाश पोहरे ने कहा कि केन्द्र सरकार कपड़ा-लॉबी, शुगर-लॉबी आदि का हित देख रही है. क्योंकि विदेशों में चीनी (शक्कर) सस्ती है. ऐसे में शक्कर का आयात करना चाहिए. लेकिन चीनी का निर्यात शुरू है और आयात पर पाबंदी लगी हुई है. बताने की जरूरत नहीं कि देश में शुगर-लॉबी कितनी पॉवरफुल है. वह इस सरकार पर कितना दबाव डालती है! पोहरे के मुताबिक केन्द्र सरकार किसान विरोधी कार्य कर रही है. दरअसल वह लॉबीइस्टों के हाथों की कठपुतली बनी हुई है. कुल मिलाकर केन्द्र सरकार की नीतियां ही परस्पर विरोधी चल रही हैं. क्योंकि कभी वह प्याज के लिए शहरी उपभोक्ताओं के हितों की बात करती है, तो कभी कपास के मामले में कपड़ा-लॉबी के दबाव में आ जाती है. कुल मिलाकर यह सरकार किसान विरोधी साबित हो रही है. उसने आज तक इस साल किसानों की कोई मदद नहीं की है.

पहले ही ‘गीले अकाल’ (अतिवृष्टि) से महाराष्ट्र का किसान तबाह हो चुका है. ऐसे में जब बाजार के हालात उसे अच्छे दाम दिला रहे थे, तो उसने प्याज का निर्यात रोक दिया. क्या यह सरकार जानती है कि सोयाबीन और कपास के भाव गिरे हैं और किसान आत्महत्या का प्रमाण बढ़ा है. महाराष्ट्र में हुई अकाल वर्षा से भी खेती का लागत-खर्च बढ़ा है. मजदूरी भी महंगी हुई है. ऐसे में किसान बेहद त्रस्त हैं. मगर उन्हें ही बार-बार परेशान कर यह सरकार आखिर चाहती क्या है? यह भी समझ से परे है. प्रकाश पोहरे ने अंत में यह सवाल भी उठाया कि यह सरकार कब जागेगी? और किसान-हित में कुछ करेगी या नहीं?

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

0 Comments

  1. ..XYZ..

    December 22, 2010 at 3:48 pm

    Pohre sahab ka *Desonnati* paper kisaanon ke hit mein aawaz uthaaye ! Sharad Pawar ji KRISHI MANTRI hain, ummid hai ki Pohre ji unke qhilaaf (apne paper ke zariye) muhim chalaayenge. Haalanki aisa mushkil hi hai !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास तक खबर सूचनाएं जानकारियां मेल करें : [email protected]

भड़ास के वाट्सअप चैनल से जुड़ें और नवीनतम खबरें पाएं : Bhadas Whatsapp

भड़ास लीगल टीम : किसी किस्म की लीगल हेल्प के लिए संपर्क करें- Bhadas Legal Team

You May Also Like

Uncategorized

भड़ास4मीडिया डॉट कॉम तक अगर मीडिया जगत की कोई हलचल, सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. इस पोर्टल के लिए भेजी...

Uncategorized

भड़ास4मीडिया का मकसद किसी भी मीडियाकर्मी या मीडिया संस्थान को नुकसान पहुंचाना कतई नहीं है। हम मीडिया के अंदर की गतिविधियों और हलचल-हालचाल को...

हलचल

[caption id="attachment_15260" align="alignleft"]बी4एम की मोबाइल सेवा की शुरुआत करते पत्रकार जरनैल सिंह.[/caption]मीडिया की खबरों का पर्याय बन चुका भड़ास4मीडिया (बी4एम) अब नए चरण में...

Uncategorized

मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया. कम अवधि में इस पोर्टल...